बाहरी ताकतों को खुद को अस्थिर करने का मौका न दें एससीओ के सदस्य देश: चिनफिंग

 Xi Jinping
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चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने परोक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से कहा कि वे बाहरी ताकतों को ‘सरकार विरोधी आंदोलनों’ के जरिए उन्हें अस्थिर करने से रोकें। उन्होंने सामरिक स्वतंत्रता बरकरार रखने, सुरक्षा सहयोग को लेकर आम सहमति बनाने और आतंकवाद रोधी सहयोग बढ़ाने की अपील की।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने परोक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से कहा कि वे बाहरी ताकतों को ‘सरकार विरोधी आंदोलनों’ के जरिए उन्हें अस्थिर करने से रोकें। उन्होंने सामरिक स्वतंत्रता बरकरार रखने, सुरक्षा सहयोग को लेकर आम सहमति बनाने और आतंकवाद रोधी सहयोग बढ़ाने की अपील की। चिनफिंग ने उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर में एससीओ के 22वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए समूह के सदस्य देशों से कहा कि वे संगठन को सही रास्ते पर ले जाएं, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ बनाएं और विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देते रहें।

चिनफिंग ने समूह द्वारा आतंकवाद रोधी कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए चीन में एक केंद्र स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को गति देने के लिए एक विकास बैंक की स्थापना का विचार प्रकट किया। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। चिनफिंग ने एससीओ की आगामी अध्यक्षता के लिए भारत को बधाई दी। उन्होंने शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं भारत को एससीओ का अगला अध्यक्ष बनने पर चीन की ओर से बधाई देना चाहता हूं। हम, अन्य सदस्य राष्ट्रों के साथ, भारत की अध्यक्षता के दौरान उसका समर्थन करेंगे।’’

उन्होंने परोक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सदी की भीषण महामारी का प्रकोप जारी है। क्षेत्रीय संघर्ष भड़कते रहते हैं। शीत युद्ध की मानसिकता और गुटीय राजनीति फिर से उभर रही है, इसलिए एकपक्षवाद और संरक्षणवाद भी उभर रहा है। आर्थिक वैश्वीकरण को विपरीत हालात का सामना करना पड़ा है।’’ उन्होंने कहा कि इन नयी स्थितियों के तहत अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में एक महत्वपूर्ण रचनात्मक शक्ति के रूप में एससीओ को अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बदलने, एकजुटता और सहयोग को मजबूत करने के लिए खुद को अच्छी स्थिति में रखना चाहिए।

उन्होंने एससीओ के लिए नयी पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में एससीओ सदस्य देशों के लिए 2,000 कानून प्रवर्तन कर्मियों को प्रशिक्षित करने और आतंकवाद रोधी कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए ‘चीन-एससीओ बेस’ स्थापित करने को तैयार है। चीन विकासशील देशों को 1.5 अरब आरएमबी युआन, (10.5 करोड़ डॉलर) के अनाज और अन्य आपातकालीन मानवीय सहायता प्रदान करेगा।

शी ने कहा, ‘‘हमें एससीओ सदस्य राष्ट्रों के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान की हिस्सेदारी का विस्तार करने, सीमा पार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में निपटान के लिए बेहतर प्रणाली विकसित करने, एससीओ विकास बैंक की स्थापना के लिए काम करने तथा क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण’ को गति देने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा कि अगले साल, चीन विकास सहयोग और औद्योगिक तथा आपूर्ति श्रृंखला मंच पर एससीओ के मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा, और साझा विकास के लिए ‘चीन-एससीओ बिग डेटा को-ऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना करेगा।

उन्होंने कहा कि चीन अन्य सभी पक्षों के साथ अंतरिक्ष को लेकर सहयोग करने और कृषि विकास, कनेक्टिविटी और आपदा न्यूनीकरण तथा बचाव-राहत में उनका सहयोग करने के लिए उपग्रह डेटा सेवा प्रदान करने को तैयार है। चीन ‘चीन-एससीओ आइस’ और ‘स्नो स्पोर्टस’ प्रदर्शन क्षेत्र का निर्माण करेगा और अगले साल गरीबी में कमी और सतत विकास तथा सहयोगी शहरों पर एससीओ मंचों की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में चीन एससीओ सदस्य देशों के लिए 2,000 मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन करेगा और उन्हें 5,000 मानव संसाधन प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘सदस्य राष्ट्रों को आम, व्यापक, सहकारी और टिकाऊ सुरक्षा के दृष्टिकोण की वकालत करने और गुटीय टकराव पैदा करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के किसी भी प्रयास को खारिज करने की आवश्यकता है।’’ चीन ‘क्वाड’ (अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया) और औकस (अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया) गठबंधनों की आलोचना करता रहा है। चीन का आरोप है कि इन संगठनों का उद्देश्य उसके उभार को रोकना है।

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