पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 19, 2021   19:59
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पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था।

अमेरिका में नए राष्ट्रपति आधिकारिक रूप से 20 जनवरी को शपथ ग्रहण करते हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह वॉशिंग्टन डीसी की कैपिटल बिल्डिंग की सीढ़ियों पर होता है। कल यानी 20 जनवरी को जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे साथ ही कमला हैरिस भी उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। 

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क्यों 20 जनवरी को ही होता है शपथ

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था। जिसे बाद में 20 जनवरी को शपथ लेने की रवायत चल पड़ी। पहली बार 1937 में अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने दूसरी बार इस पद पर काबिज होने पर इस तारीख को शपथ ली थी। नियम के अनुसार अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होना तय है वहीं 20 जनवरी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलवाई जाती है। 

पहले 5 मार्च को होता था शपथ ग्रहण 

1937 से पहले अमेरिका में 5 मार्च को शपथ ग्रहण होता था। जार्ज वाॅशिंगटन ने फेडरल हाॅल की बाॅलकनी में 30 अप्रैल 1789 को शपथ लीथी। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर उन्होंने 4 मार्च 1793 को शपथ लिया था। जेम्स मोनरो ने राष्ट्रपति बनने पर सुप्रीम कोर्ट के जजों से विचार करने के बाद 5 मार्च 1821 को अपना शपथ ग्रहण का कार्यक्रम रखा। इसके बाद अमेरिकी संविधान में 20वां संशोधन हुआ और राष्ट्रपति के शपथ लेने की तारीख 20 जनवरी हो गई। 







सिडनी में कृषि कानूनों को लेकर सिखों पर हुआ हमला, हथौड़े से वाहन पर किया हमला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 5, 2021   16:16
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सिडनी में कृषि कानूनों को लेकर सिखों पर हुआ हमला, हथौड़े से वाहन पर किया हमला

कृषि कानूनों को लेकर भारतीय समुदाय में मतभेद बढ़ने के बीच सिडनी में सिखों पर हमला किया। चैनल ने बताया कि पुलिस ने समुदाय के नेताओं से बात कर उन्हें संयम बरतने को कहा है और इस हमले के पीछे की मंशा का पता लगाया जा रहा है।

मेलबर्न।भारतीय सिखों के एक समूह ने कहा है कि भारत के कृषि कानूनों को लेकर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के बीच बढ़ रहे मतभेद के बीच सिडनी में वतन के ही कुछ लोगों ने बेसबॉल बैट और हथौड़े से उन पर हमला कर दिया। ‘‘7 न्यूज’’ चैनल के मुताबिक सिडनी के हैरिस पार्क में रविवार रात अज्ञात लोगों के एक समूह ने बेसबॉल बैट, लाठियों और हथौड़े के साथ वाहन पर हमला किया। चैनल ने एक पीड़ित के हवाले से बताया, ‘‘उन्होंने चारों तरफ से कार को घेर लिया। हमलावर जान ले सकते थे।’’ व्यक्ति का मानना है कि पगड़ी पहने होने के कारण उन्हें और उनके दोस्तों को निशाना बनाया गया। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गयी। एक कार से चार लोग बैट और हथौड़ा लेकर बाहर निकले।

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पीड़ित वहां से भागने लगे लेकिन उनका पीछा किया गया और फिर से उन पर हमला किया गया। हमले में कार को भी नुकसान हुआ। चैनल के मुताबिक पुलिस की गश्त बढ़ा दी गयी है और गुनाहगार लोग वतन भेजे जा सकते हैं क्योंकि प्रशासन सिडनी की सड़कों पर भारतीय समूहों के बीच झगड़े को रोकना चाहती है। चैनल ने बताया कि पुलिस ने समुदाय के नेताओं से बात कर उन्हें संयम बरतने को कहा है और इस हमले के पीछे की मंशा का पता लगाया जा रहा है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या राजनीतिक मतभेद और नस्लीय नफरत के कारण यह घटना हुई। संदिग्ध व्यक्तियों की भी तलाश की जा रही है।





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पाक PM शनिवार को करेंगे विश्वास मत का सामना, कहा- भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ेंगे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 5, 2021   15:59
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पाक PM शनिवार को करेंगे विश्वास मत का सामना, कहा- भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ेंगे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान शनिवार को विश्वास मत का सामना करेंगे।वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख को बुधवार को सीनेट चुनाव में मिली हार के मद्देनजर अपनी सरकार की वैधता को बरकरार रखने के लिए विश्वास मत हासिल करने से पहले खान ने यह संबोधन दिया।

इस्लामाबाद। सीनेट में एक कड़े मुकाबले में वित्त मंत्री के चुनाव हारने के बाद इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अपनी सरकार की वैधता साबित करने के लिए शनिवार को विश्वास मत का सामना करेंगे। खान ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान यह घोषणा की। साथ ही ‘लोकतंत्र का मजाक बनाने’ के लिए महागठबंधन की आलोचना की और कहा कि वह भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ेंगे। वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख को बुधवार को सीनेट चुनाव में मिली हार के मद्देनजर अपनी सरकार की वैधता को बरकरार रखने के लिए विश्वास मत हासिल करने से पहले खान ने यह संबोधन दिया। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने बुधवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार शेख को हराकर प्रधानमंत्री खान को एक बड़ा झटका दिया, जिन्होंने अपने मंत्रिमंडल सहयोगी के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रचार किया था।

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पीडीएम, खान की सरकार को गिराने के लिए पिछले साल सितंबर में गठित 11-दलीय गठबंधन है। क्रिकेटर से नेता बने 68 वर्षीय खान ने कहा, “मैंपरसों (शनिवार) विश्वास मत हासिल करूंगा। मैं अपने सदस्यों से यह दिखाने के लिए कहूंगा कि उनका मुझ पर विश्वास है। अगर वे कहते हैं कि उन्हें कोई भरोसा नहीं है, तो मैं विपक्षी बेंच पर बैठूंगा।” खान ने कहा, “अगर मैं सरकार से बाहर होता हूं, तो मैं लोगों के पास जाऊंगा और उन्हें देश के लिए अपना संघर्ष जारी रखने के लिए कहूंगा। मैं इन गद्दारों (जिन्होंने देश को लूटा है) को शांति से नहीं बैठने दूंगा। मैं उन्हें गद्दार कहता हूं क्योंकि वे लुटेरे हैं। 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में खान की पार्टी के 157 सदस्य हैं। निचले सदन में विपक्षी पीएमएल-एन और पीपीपी के क्रमशः 84 और 54 सदस्य हैं।

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राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को शनिवार को नेशनल असेंबली का सत्र बुलाने के लिए कहा गया है। साथ ही सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों के सदस्यों को शनिवार को इस्लामाबाद में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री खान ने सीनेट चुनाव का उल्लेख करते हुए इसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उन्होंने सीनेटर बनने के लिए अन्य को रिश्वत देने के आरोप भी लगाए। खान ने सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाते हुए पाकिस्तान में लोकतंत्र का मजाक बनाने की बात भी कही। इमरान खान ने 2018 के उस दौर को भी याद किया, जब उनकी पार्टी के 20 सांसदों ने पैसे लेकर अपना वोट कथित तौर पर बेच दिया था। प्रधानमंत्री ने निर्वाचन आयोग पर चुनाव में भ्रष्टाचार को रोक पाने में नाकाम रहने का भी आरोप लगाया। गौरतलब है कि गिलानी की जीत के बाद कई विपक्षी नेताओं ने खान की भारी आलोचना की और मांग की कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। परिणाम घोषित होने के कुछ घंटे बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने विश्वास मत हासिल करने का फैसला किया है।





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न्यूजीलैंड में आया 8.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, खतरा फिलहाल टला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 5, 2021   15:20
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न्यूजीलैंड में आया 8.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, खतरा फिलहाल टला

न्यूजीलैंड से एक हजार किलोमीटर दूर केरमाडेक द्वीप समूह पर लगातार कई भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस दौरान 8.1 तीव्रता का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके अलावा 7.4 और 7.3 तीव्रता के भूकंप के झटके भी महसूस किए गए।

वेलिंगटन (न्यूजीलैंड)। दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए जाने के बाद महासागर में सुनामी के खतरे के बीच न्यूजीलैंड में तटीय इलाकों से शुक्रवार को हजारों लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। हालांकि राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (एनईएमए) ने बाद में खतरा टल जाने की बात कहते हुए लोगों को घर लौटने की सलाह दी। न्यूजीलैंड से एक हजार किलोमीटर दूर केरमाडेक द्वीप समूह पर लगातार कई भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस दौरान 8.1 तीव्रता का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके अलावा 7.4 और 7.3 तीव्रता के भूकंप के झटके भी महसूस किए गए। सुनामी के खतरे के मद्देनजर न्यूजीलैंड में कई जगह सड़कों पर जाम लग गया और अफरातफरी की स्थिति भी उत्पन्न हो गई क्योंकि अधिकतर लोग ऊंचाई वाले स्थानों की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे।

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गिसबोर्न के पास टोकोमारू बे सहित कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने छोटी लहरों के वीडियो भी बनाए। राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने दिन में कहा था कि खतरा टल गया है और लोग अपने-अपने घरों में वापस लौट सकते हैं, लेकिन समुद्र तट पर जाने से बचें। ‘अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण’ ने कहा कि सबसे शक्तिशाली भूकंप का केन्द्र केरमाडेक द्वीप समूह के पास 19 किलोमीटर की गहराई पर था। एजेंसी ने एक रिपार्ट में कहा कि इससे पहले 1973 में क्षेत्र में8.0 तीव्रता का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया था।





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