मोदी के राफेल वाले दोस्त ने जीत के साथ बनाए कई रिकॉर्ड, मैक्रों की आगे की राह कितनी आसान?

मोदी के राफेल वाले दोस्त ने जीत के साथ बनाए कई रिकॉर्ड, मैक्रों की आगे की राह कितनी आसान?
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फ्रांस के राष्ट्रपति भवन में एक और पांच साल का कार्यकाल जीतने के बाद इमैनुएल मैक्रोन का इरादा घरेलू और विदेश नीतियों को लेकर काम पर वापस जाने का है। हालांकि, उन्हें जल्द ही महत्वपूर्ण संसदीय चुनावों का सामना करना पड़ेगा, जहां उन्हें अपना बहुमत बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दोबारा फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने नेशनल रैली पार्टी की दक्षिणपंथी उम्मीदवार नेता मरीन ले पेन को हराया है। आखिरी राउंड की वोटिंग में मैक्रों को 58.2 फीसदी और ले पेन को 41.8 फीसदी वोट मिले। फ्रांस में 2002 के बाद कोई नेता दोबारा राष्ट्रपति नहीं चुना गया था। लेकिन मैक्रों ने इस सिलसिले को तोड़ दिया है। हालांकि इस बार की मैक्रों की जीत का अंतर बहुत कम है। 2017 में मैक्रों को 66.1 फीसदी जबकि ले पेन को 33.9 फीसदी वोट मिले थे। फ्रांस के राष्ट्रपति भवन में एक और पांच साल का कार्यकाल जीतने के बाद इमैनुएल मैक्रोन का इरादा घरेलू और विदेश नीतियों को लेकर काम पर वापस जाने का है। हालांकि, उन्हें जल्द ही महत्वपूर्ण संसदीय चुनावों का सामना करना पड़ेगा, जहां उन्हें अपना बहुमत बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। ऐसे में आज हम आपको राष्ट्रपति मैक्रों और उनके नेतृत्व के आगे के रास्ते के बारे में बताएंगे। 

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13 मई को एलिसी पैलेस में संभालेंगे पदभार

फ्रांस की संवैधानिक परिषद बुधवार (27 अप्रैल) को राष्ट्रपति चुनाव के आधिकारिक परिणामों को प्रकाशित करेगी (जिसमें मैक्रों ने अपने दूर-दराज़ चुनौती देने वाले मरीन ले पेन को हरा दिया)। उसी दिन मैक्रों अपने मंत्रिमंडल की बैठक करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति को उद्घाटन समारोह के लिए एक तारीख तय करनी होगी, जो 13 मई तक फ्रांस सरकार के प्रमुख के आधिकारिक निवास एलिसी पैलेस में होनी चाहिए। वह नेशनल गार्ड्स सम्मान प्राप्त करेंगे और भाषण देंगे। आमतौर पर, उद्घाटन के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है। लेकिन राष्ट्रपति फ्रांकोइस मिटर्रैंड और जैक्स शिराक दोनों ने क्रमशः 1988 और 2002 में फिर से चुने जाने के बाद उस परंपरा को तोड़ दिया। मैक्रों आधुनिक फ्रांस के एकमात्र अन्य नेता हैं जिन्होंने दूसरा राष्ट्रपति कार्यकाल जीता है।

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राष्ट्रपति सबसे पहले जर्मनी की करेंगे यात्रा

मैक्रों का दोबारा जीत के  बाद पहला दौरा जर्मनी का होगा। जहां वह चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ से मिलेंगे, और दोनों नेताओं के एजेंडे में सबसे ऊपर यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा करना होगा। वहीं उनकी मुलाकात उनके मित्र और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 मई से 6 मई के बीच यूरोप की यात्रा पर जा सकते हैं। इस दौरान वह फिर से निर्वाचित फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के साथ द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे। मैक्रों यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने के लिए किसी समय कीव भी जा सकते हैं। मैक्रों ने अपनी जीत के कुछ घंटों के भीतर ज़ेलेंस्की और स्कोल्ज़ दोनों से बात की। लेकिन उन्होंने कहा है कि वह कीव की यात्रा केवल इस शर्त पर करेंगे कि इसका "उपयोगी प्रभाव" होगा। 9 मई को मैक्रों के यूरोपीय संघ की संसद में भाषण देने की उम्मीद है।

संसदीय चुनाव अहम 

मैक्रों के सामने सबसे पहली चुनौती जून में होने वाले संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी ला रिपब्लिक एन मार्श को फिर बहुमत दिलाने की है। इस बार ये लक्ष्य आसान नहीं माना जा रहा है। फ्रांस में संसदीय बहुमत के आधार पर ही प्रधानमंत्री चुना जाता है। फ्रेंच संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बनने वाली सरकार के बीच अधिकार और कार्य क्षेत्र का स्पष्ट बंटवारा है। ऐसे में अगर मैक्रों की मन-माफिक सरकार नहीं बनी, तो उनके लिए शासन करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। 12 और 19 जून को दो राउंड में होने वाले राष्ट्रव्यापी संसदीय चुनाव यह तय करेंगे कि नेशनल असेंबली की 577 सीटों में से कौन बहुमत पर नियंत्रण रखता है। आम अनुमान है कि संसदीय चुनाव में भी मैक्रों की पार्टी का मुख्य मुकाबला ली पेन और मेलेन्शॉं के दलों से ही होगा।