भारत के 1 लाख स्कूल सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे! UNESCO का दावा

भारत के 1 लाख स्कूल सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे! UNESCO का दावा

यूनेस्को की, 2021 स्टेट द एजुकेशन फॉर इंडिया: 'नो टीचर नो क्लास' की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शिक्षा का स्तर काफी कम है। भारत में तकरीबन 1.1 लाख स्कूल एकल शिक्षा संस्थाएं हैं। देश के स्कूलों की बात करते हुए यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया कि देश में कुल 19 प्रतिशत या कहें, 11.16 लाख शिक्षण पद रिक्त हैं, जिनमें से 69 प्रतिशत गांव के क्षेत्रों में आते हैं।

नयी दिल्ली। भारत के सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। गांव परिवेश में कई ऐसे स्कूल हैं जहां स्कूलों की जरजर हालत वहां हो रही शिक्षा पर सवाल खड़े करती है। इन्ही तस्वीरों और आंकलनों के आधार पर यूनेस्को की, 2021 स्टेट द एजुकेशन फॉर इंडिया: 'नो टीचर नो क्लास' की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शिक्षा का स्तर काफी कम है। भारत में तकरीबन 1.1 लाख स्कूल एकल शिक्षा संस्थाएं हैं। देश के स्कूलों की बात करते हुए यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया कि देश में कुल 19 प्रतिशत या कहें, 11.16 लाख शिक्षण पद रिक्त हैं, जिनमें से 69 प्रतिशत गांव के क्षेत्रों में आते हैं। 

इसे भी पढ़ें: शख्स को बेचने के लिए सामान की तस्वीर फेसबुक पर डालना पड़ा महंगा, घर से उठा ले गई पुलिस

यूनेस्को एजुकेशन रिपोर्ट ने की सिफारिश 

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, युनेस्को 2021 स्टेट ऑफ दा एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया में दिया गया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार कक्षा 3,5 और 8 कम सीखने के परिणाम जानने के बाद यूनेस्को ने शिक्षकों के रोज़गार की शर्तों में सुधार करने, गांवों में उनकी काम करने की स्थिति में सुधार करने के जरूरी जिलों को चिन्हित करने के साथ शिक्षकों को फ्रंटलाइन कार्यकर्ता के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की है।

शिक्षक अयोग्य होने की कही बात

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 7.7 प्रतिशत प3 माइमरी, 4.6 प्रतिशत पाइमरी और 3.3 प्रतिशत अपर प्राइमरी शिक्षक अयोग्य हैं। 2019 की रिपोर्ट जो आंकड़ों में शामिल है अपने सारांश में रिपोर्ट यही बताती है।

COVID-19  के समय भूमिका हुई उजागर

महामारी कॉविड-19 में शिक्षकों की भूमिका उजागर की। सही शिक्षा और लचीली शिक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करने और उनका शिक्षण गुणवत्ता को बढ़ाने की आवशयकता है। 

शिक्षण प्रणाली में महिलाओं की भूमिका

भारत में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं शिक्षण कार्यबल को संभाल रही हैं हांलांकि राज्यों और शहरो में इनके आंकड़ों में भिन्नताएं हैं। एक लाख से अधिक रिक्तियों वाले तीन राज्य हैं जिनमें उत्तर प्रदेश 3.3 लाख, बिहार 2.2 लाख और पश्चिम बंगाल 1.1 लाख है। यूनेस्को की रिपोर्ट में इन तीन राज्यो को संबंधित विषय में सबसे खराब राज्यों का दर्जा दिया गया है। आपको बताते चलें कि मध्य प्रदेश में भी एकल शिक्षण विद्यालयों की संख्या करीबन 21,077 है।

कितने शिक्षक पद खाली पड़े

ज्यादातर ग्रामीण स्कूलों में रिक्तियां देखने को मिलती हैं जैसे बिहार में 2.2 लाख शिक्षकों की आवश्यकता है वहीं बिहार के गांवों में 89 प्रतिशत खाली है। इसी तरह यूपी में खाली पड़े 3.2 लाख पजों में से 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में हैं। पश्चिम बंगाल में यह 69 प्रतिशत है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनसार यूनिफाइड डिस्ट्रिक इंफोर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन के डेटा का विश्र्लेषण करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण शहरों में का फी असमानता देखने को मिली है इसके साथ कहा गया कि पूर्वोत्तर में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता और भर्ती में सुधार की आवश्यकता है। आगे यूनेस्को रिपोर्ट में शिक्षकों के करियर के रास्ते बनाने उनके शिक्षण स्तर को सुधारने, पूर्व-सेवा पेशेवर विकास के पुनर्गठन और पाठ्यचर्या और शैक्षणिक सुधार को मजबूत करने और सही आईसीटी प्रशिक्षण प्रदान करने की सिफारिश की गई है।