मंगल की धूल भरी चट्टानी सतह पर दिखा चीन का राष्ट्रीय झंडा रोवर और लैंडर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 11, 2021   13:22
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मंगल की धूल भरी चट्टानी सतह पर दिखा चीन का राष्ट्रीय झंडा रोवर और लैंडर

चीन ने पिछले महीने मंगल की सतह पर रोवर के साथ तियानवेन-1 अंतरिक्ष यान को उतारा था। इससे पहले यान करीब तीन महीने मंगल की कक्षा में था। अमेरिका के बाद मंगल की सतह पर अंतरिक्ष यान भेजने वाला चीन दूसरा देश है।

बीजिंग। चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने शुक्रवार को तस्वीरें जारी की जिनमें मंगल ग्रह की धूल भरी चट्टानी सतह और चीन का राष्ट्रीय झंडा लगा चीनी रोवर और लैंडर नजर आ रहे हैं। सीएनएसए ने मंगल ग्रह की चार तस्वीरें जारी की हैं जिनमें झूरोंग रोवर का ऊपरी हिस्सा नजर आ रहा है और अपने प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने से पहले के रोवर के दृश्य नजर आ रहे हैं। सीएनएसए ने एक बयान में कहा कि झूरोंग जिस जगह सतह पर उतरा था, वहां से करीब 10 मीटर की दूरी पर उसने एक रिमोट कैमरा लगाया था और फिर उसने कई तस्वीरें लीं।

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चीन ने पिछले महीने मंगल की सतह पर रोवर के साथ तियानवेन-1 अंतरिक्ष यान को उतारा था। इससे पहले यान करीब तीन महीने मंगल की कक्षा में था। अमेरिका के बाद मंगल की सतह पर अंतरिक्ष यान भेजने वाला चीन दूसरा देश है। यान के ऑर्बिटर और लैंडर दोनों पर छोटे चीनी झंडे लगे हैं। लैंडर पर 2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक एवं पैराओलंपिक के शुभंकर की आकृति भी है। छह पहियों वाला रोवर उस स्थान का सर्वेक्षण कर रहा है जिसे यूटोपिया प्लानिशिया कहा जाता है। रोवर मंगल की सतह पर विशेषकर पानी या बर्फ के संकेतों की तलाश कर रहा है जिससे कि ग्रह पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाया जा सके। झूरोंग की ऊंचाई 1.85 मीटर (छह फुट) है और यह अमेरिका के परसेवियरेंस रोवर से छोटा है।

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परसेवियरेंस रोवर एक छोटे हेलीकॉप्टर के साथ ग्रह का अवलोकन कर रहा है। नासा को उम्मीद है कि उसका रोवर जुलाई में ग्रह से नमूने एकत्रित कर 2031 से पहले जल्द से जल्द धरती पर वापस आ जायेगा। चीन अपनी महात्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम योजनाओं के तहत अगले सप्ताह अपने नए अंतरिक्ष स्टेशन में पहले चालक दल को भेजेगा। चालक दल के तीन सदस्यों की तियान्हे (हेवेनली हारमनी) स्टेशन पर करीब तीन महीने ठहरने की योजना है जो पूर्व के किसी भी चीनी अभियान से अधिक समय वाला है। इस दौरान ये सदस्य अंतरिक्ष में चहलकदमी, निर्माण, रखरखाव का काम और वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।





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