यूक्रेन की बढ़त से रूसी सेना पर दबाव बढ़ा

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यूक्रेन ने पहले की रूसी अग्रिम पंक्ति को तोड़कर पूर्वोत्तर खारकीव क्षेत्र में बड़े क्षेत्रों पर फिर से कब्जा कर लिया है, जो रूस की सीमा से लगते हैं। ब्रिटिश सेना ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या रूसी सेना एक और मजबूत यूक्रेनी हमले का सामना करने में सक्षम होगी।

पश्चिमी रक्षा अधिकारियों और विश्लेषकों ने शनिवार को उम्मीद जताई कि पूर्वी क्षेत्र में यूक्रेनी सेना के और बढ़त बनाने के प्रयास के बीच रूसी सेना पूर्वोत्तर यूक्रेन में नयी रक्षा पंक्ति तैयार कर रही है। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने दैनिक खुफिया जानकारी से अवगत कराते हुए कहा कि इस पंक्ति के ओस्किल नदी और स्वतोव के बीच रहने की संभावना है, जो यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। युद्ध में यूक्रेनी सेना के जवाबी हमले के बाद पहले की अग्रिम पंक्ति टूटने से रूसी सेना नयी अग्रिम पंक्ति तैयार कर रही है।

यूक्रेन ने पहले की रूसी अग्रिम पंक्ति को तोड़कर पूर्वोत्तर खारकीव क्षेत्र में बड़े क्षेत्रों पर फिर से कब्जा कर लिया है, जो रूस की सीमा से लगते हैं। ब्रिटिश सेना ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या रूसी सेना एक और मजबूत यूक्रेनी हमले का सामना करने में सक्षम होगी। वाशिंगटन स्थित ‘इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वार’ के अनुसार, यूक्रेनी सेनाएं खारकीव क्षेत्र में ओस्किल नदी को पार करना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि वह रूसी-कब्जे वाले क्षेत्र पर जवाबी हमला करने की कोशिश में हैं।

संस्थान ने शनिवार की अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपग्रह से ली गईं तस्वीरों से पता चलता है कि यूक्रेनी सेनाएं कुपियांस्क में ओस्किल के पूर्वी तट को पार कर गई हैं और इसने वहां तोपखाना तैनात किया है। यह नदी रूस से दक्षिण में यूक्रेन की ओर बहती है। इंटरनेट पर शनिवार को प्रसारित एक वीडियो में युद्धग्रस्त पूर्वी यूक्रेन में भी यूक्रेनी सेना भूमि पर कब्जा करती दिखती है। उधर, रूसी सेना ने यूक्रेनी शहरों और गांवों पर मिसाइल दागना और गोलाबारी करना जारी रखा।

क्षेत्रीय गवर्नर ओलेह सिनीहुबोव ने कहा कि शनिवार तड़के एक रूसी मिसाइल हमले में खारकीव के औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई। सिनीहुबोव ने कहा कि मिसाइल के अवशेष से पता चलता है कि रूस ने शहर में सतह से हवा में मार करने वाली एस-300 मिसाइल दागी थीं। एस-300 को आसमान में मिसाइल या विमानों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है, न कि जमीन पर निशाना लगाने के लिए। विश्लेषकों का कहना है कि रूस द्वारा जमीनी हमलों के लिए एस-300 मिसाइल के इस्तेमाल से पता चलता है कि महीनों से चल रहे युद्ध के चलते उसके पास कुछ सटीक हथियारों की कमी हो गई है।

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