अगर अस्पताल में ज्योतिषी भी हों तो (व्यंग्य)

By अरुण अर्णव खरे | Publish Date: May 31 2019 4:10PM
अगर अस्पताल में ज्योतिषी भी हों तो (व्यंग्य)
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ज्योतिषी पं. रतन लाल पण्ड्या ने मरीज़ के हाथ की रेखाओं और जन्मपत्री के ग्रहों का अध्ययन कर ऑपरेशन के लिए दिए गए समय को मरीज़ के लिए घातक क़रार दिया। मरीज़ दर्द से कराह रहा था।

अस्पताल में ज्योतिषी होंगे नियुक्त। मुरारी लाल जी की सपनों की दुनिया के लिए यह एक बेहतरीन ख़बर थी। उस दिन सपने में ही उन्होंने ज्योतिषियों की नियुक्ति कर डाली और लगे हाथ ख़ुद को एक बड़े अस्पताल के अंदर पाया। वहाँ पहुँचते ही उनकी भेंट पेट दर्द से पीड़ित एक मरीज़ से हो गई जिसे डॉक्टर ने अपेण्डिक्स के आपरेशन के लिए सुबह का समय दिया था। ज्योतिषी पं. रतन लाल पण्ड्या ने मरीज़ के हाथ की रेखाओं और जन्मपत्री के ग्रहों का अध्ययन कर ऑपरेशन के लिए दिए गए समय को मरीज़ के लिए घातक क़रार दिया। मरीज़ दर्द से कराह रहा था लेकिन पण्ड्या जी के अनुसार ऑपरेशन का शुभ समय दो दिन पश्चात रात में ग्यारह बजे का है। डॉक्टर ने हाथ उठा दिए कि मरीज की हालत को देखते हुए यदि सुबह ऑपरेशन न किया गया तो अपेण्डिक्स बर्स्ट होने का ख़तरा है जिससे मरीज़ की जान जा सकती है और वह इस मामले मे कोई रिस्क नहीं ले सकते। रात में आपरेशन करने की सुविधा भी अस्पताल में नहीं थी फलत: पण्ड्या जी ने ग्रह दोष निवारण हेतु पूजा और हवन करने के लिए इक्कीस सौ रुपए मरीज़ के परिवार वालों से झटक लिए और अगले दिन सुबह आपरेशन करने की अनुमति दे दी। बेचारा डॉक्टर कुढ़ कर रह गया।

 
इस अस्पताल से निकल कर मुरारी जी ने लेडी हास्पिटल का रुख किया। वहाँ उन्हें पता चला कि डिलीवरी के लिए भर्ती फूलबती की रेखाएँ देखकर ज्योतिषी मीरा अवस्थी ने भविष्यवाणी की है कि यदि बुधवार से पहले डिलीवरी हुई तो लड़की होगी। तीन लड़कियाँ पहले ही घर में आ चुकी थी और अब चौथी... सास ने सुनते ही बहू को हिदायत दे दी कि उसे बुधवार तक दर्द को किसी तरह सहन करना है इसके बाद ही बच्चा पैदा करना है। बिचारी फूलवती दर्द सहते सहते मंगलवार की सुबह ही अचेत हो गई और डॉक्टर ने आपरेशन करके डिलीवरी करा दी। लड़का पैदा हुआ था और फूलवती भी बचा ली गई। मीरा जी को पता चला तो उन्हें गहरा सदमा पहुँचा पर पुराने ज़माने की कामिनी कौशल की तरह उन्होंने सदमे का ज़रा-सा भी अंश चेहरे पर प्रस्फुटित नहीं होने दिया। मुरारी जी ने उनसे पूछ लिया- "आपकी गणना में कहाँ गड़बड़ी हो गई जो रिज़ल्ट उल्टा आ गया।"


मीरा अवस्थी ने गहन चिंतन वाली भंगिमा से बाहर आते हुए कहा- "मेरी गणना बिल्कुल परफ़ेक्ट थी। यदि डॉ. नेहा रायज़ादा के हाथों डिलीवरी होती तो लड़की तय थी लेकिन उस समय ड्यूटी पर उपस्थित डॉ. मंजरी सहाय ने डिलीवरी कराई इसलिए लड़का हो गया।" मुरारी जी बुरी तरह चौंके- "इसमें डॉक्टर का क्या रोल... क्या डॉक्टर बदलने से शिशु का सेक्स भी बदल सकता है।" "आप नहीं समझोगे मुरारी जी...ये बड़ा जटिल शास्त्र है... डॉ. मंजरी की कुण्डली में ज़बर्दस्त यश-भाव है इसी प्रबल यश-भाव की वजह से ही उनके हाथों से फूलवती को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई और उसकी जान भी बच सकी।" मीरा जी के तर्क सुनकर मुरारी जी का सिर भारी होने लगा। उन्होंने वहाँ से खिसकते हुए मेडिकल कॉलेज हास्पिटल की राह पकड़ ली।
मेडिकल कालेज हास्पिटल में नवनियुक्त ज्योतिषी पं० हरिहर उपाध्याय अधीक्षक से बहस कर रहे थे कि जिस साल और जिस घड़ी में इस अस्पताल की नींव रखी गई थी उसका मुहुर्त ठीक नहीं था, ओटी भी गलत दिशा में बना हुआ है, इन दोषों का तत्काल निवारण जरूरी है जिसके लिए हवन और तीन दिनों के लिए ओटी बंद रखनी होगी पर अधीक्षक मान ही नहीं रहे थे। मुरारी जी से वहां रुका नहीं गया, उनका सिर बहुत भारी हो गया था और चौंक कर जाग गए थे।
 


-अरुण अर्णव खरे
 

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