चले गए वो भी साथ छोड़कर (कविता)

By प्रतिभा तिवारी | Publish Date: Jan 4 2019 4:28PM
चले गए वो भी साथ छोड़कर (कविता)
Image Source: Google

कवयित्री प्रतिभा तिवारी की ओर से नववर्ष पर रची गयी कविता ''चले गये वो भी साथ छोड़कर'' में दर्शाया गया है कि किस तरह से पूरा साल अचानक से खत्म हो जाता है और नया साल दबे पांव आ जाता है।

चले गए वो भी साथ छोड़कर 
भाजपा को जिताए
उम्मीद भी नहीं कर सकते 
वो एक बार भी देख ले मुड़कर
जब तक थे साथ हमारे


हमें उनके कीमत का एहसास ना था 
उन्हीं वक्त के लिए 
वक्त हमारे पास ना था 
यूं ही पल, दिन, सप्ताह, महीने 
साल बीत जाता है और


दबे पांव नया साल आ जाता है 
फिर क्या नए साल के पहले दिन
जश्न, उल्लास, उत्साह
खुशी से लोग बदहवास 


आप सभी के लिए 
ये साल हो बहुत खास
वक्त अपने कदम पीछे नहीं लेता 
एक भी पल दुबारा साथ 
जीने नहीं देता 
तो जी भरके जी लो 
हर एक पल 
कीमत सिर्फ आज की होती है 
वापस नहीं आता 
बीता हुआ कल 
आज ने हम सभी को परखा है 
"कल किसने देखा है
मेरे हाथों में तो
बस आज की ही रेखा है"।  
       
-प्रतिभा तिवारी

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.

Related Story