पाकिस्तान में शरीफ भैंस (व्यंग्य)

By विजय कुमार | Publish Date: Oct 3 2018 3:06PM
पाकिस्तान में शरीफ भैंस (व्यंग्य)

किसी समय दूध का अर्थ था, जंगल में चरने वाली देसी गाय का दूध; पर समय बदला, तो दूध कई तरह का हो गया। हर स्तनपायी मादा के पास अपनी संतानों के लिए दूध होता है; पर गाय, भैंस, जरसी, बकरी, भेड़ या ऊंटनी का दूध मनुष्यों के काम भी आ जाता है।



किसी समय दूध का अर्थ था, जंगल में चरने वाली देसी गाय का दूध; पर समय बदला, तो दूध कई तरह का हो गया। यों तो हर स्तनपायी मादा के पास अपनी संतानों के लिए दूध होता है; पर गाय, भैंस, जरसी, बकरी, भेड़ या ऊंटनी का दूध मनुष्यों के काम भी आ जाता है।
 
लेकिन बीसवीं सदी आयी, तो दूध में मिलावट होने लगी। अब मानव की बुद्धि के विकास से दूध मिलावटी हुआ या मिलावटी दूध से मानव की बुद्धि भ्रष्ट हुई, यह शोध का विषय है। इसके बाद एक मशीन का आविष्कार हुआ, जो दूध में से चिकनाई निकाल लेती थी। बाकी बचे हुए को सप्रेटा दूध कहते थे। गरीबों के लिए यह वरदान जैसा था। कई लोग हंसी में उसे ‘लोहे की भैंस’ का दूध कहते थे। 
 
गांधी जी के जीवन में भी दूध का बड़ा स्थान था; पर वे बकरी का दूध पीते थे। इसलिए वह बकरी भी उनके साथ चलती थी। उसका दूध गाढ़ा और पौष्टिक रहे, इसके लिए उसे काजू, किशमिश और बादाम खिलाए जाते थे। एक मुंहफट कांग्रेसी ने तो एक बार कह ही दिया कि बापू, आपकी ये बकरी हमें बहुत महंगी पड़ रही है।


 
आजकल तो रेलगाड़ी में पशुओं को साथ ले जाना मना है; पर तब का नियम मालूम नहीं। गांधी जी की उस वी.आई.पी. बकरी का टिकट बनता था या नहीं, यह भी पता नहीं। इसका उत्तर कोई सच्चा गांधीवादी दे सकता है या उस भाग्यवान बकरी का कोई वंशज। और इन दोनों का मिलना भी शुद्ध दूध की ही तरह कठिन है। 
 


पर आज बात गाय या बकरी की नहीं, पाकिस्तानी भैंसों की हो रही है। क्योंकि जब से पाकिस्तान में इमरान साहब सत्ता में आये हैं, तब से वे अपने पूर्ववर्ती शरीफ मियां की हर निशानी मिटाने पर तुले हैं। पहले तो उन्होंने खर्च घटाने के लिए उनकी सैंकड़ों कीमती कारें सस्ते में बेच दीं और खुद अपने घर से दफ्तर हैलिकॉप्टर से आने-जाने लगे। यद्यपि इससे खर्चा कई गुना बढ़ गया; पर उनकी सब मूर्खताएं माफ हैं। बुद्धि होती, तो क्या वे क्रिकेट छोड़कर पाकिस्तान जैसे कंगाल देश के प्रधानमंत्री बनते ? अब उन्होंने प्रधानमंत्री निवास में शरीफ मियां द्वारा पाली गयी भैंसें नीलाम कर दी हैं। सुना है इसे शरीफ समर्थकों ने ही खरीदा है। उन्हें विश्वास है कि इमरान की पारी जल्दी ही समाप्त हो जाएगी और शरीफ मियां बाइज्जत फिर प्रधानमंत्री बनेंगे। तब ये भैंस फिर वहां पहुंचा दी जाएंगी।
 
दुनिया में हर देश के पास एक सेना होती है; पर पाकिस्तान में सेना के पास एक देश है। इसीलिए वहां देश के अंदर भी मारकाट मची है और बाहर भी। पाकिस्तान जब से बना है, वहां यही हो रहा है। और जब तक उसके तीन-चार टुकड़े और नहीं हो जाते, तब तक यही होता रहेगा। कब शरीफ मियां अंदर होंगे और कब मुशर्रफ या इमरान, कुछ पता नहीं। कहते हैं कि गाय के दूध से बुद्धि तेज होती है और भैंस के दूध से मोटी। मेरा पाकिस्तानी सेना प्रमुखों से आग्रह है कि वे भारत से कुछ अच्छी देसी गाय मंगाकर उनका दूध पियें। इससे उनकी बुद्धि निर्मल होगी और स्वभाव गाय जैसा शांत हो जाएगा। और वे सब भैंस मेरे पास भेज दें। इससे मेरा भी भला होगा और उन शरीफ पाकिस्तानी भैंसों का भी।
 
-विजय कुमार


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