चूहों की हड़ताल (व्यंग्य)

By विजय कुमार | Publish Date: Sep 17 2018 5:33PM
चूहों की हड़ताल (व्यंग्य)
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कुछ दिन पूर्व गणेश चतुर्थी का पर्व था। मेरा एक अमरीकी मित्र हर साल अपने घर में गणेश जी को स्थापित करता है। उसी प्रतिमा के सामने से वह वीडियो कॉलिंग कर रहा था। तभी गणेश जी के वाहन मूषकदेव प्रकट हो गये।

इन्सानों की हड़ताल तो कई बार देखी और सुनी है; पर चूहों की हड़ताल पहली बार सुनी है। और वे चूहे अमरीका के हैं, तो बात जरूर गंभीर होगी। 
 
कुछ दिन पूर्व गणेश चतुर्थी का पर्व था। मेरा एक अमरीकी मित्र हर साल अपने घर में गणेश जी को स्थापित करता है। उसी प्रतिमा के सामने से वह वीडियो कॉलिंग कर रहा था। तभी गणेश जी के वाहन मूषकदेव प्रकट हो गये। उन्होंने कहा कि पहले हमारी बात सुनिये, क्योंकि हमारा अस्तित्व संकट में पड़ गया है। 
 
मैं ठहरा पत्रकार। मुझे इसमें से कोई बड़ी खबर मिलने की संभावना दिखायी दी। अतः मैंने उन्हें विस्तार से बात बताने को कहा। 


 
- देखिये, आप लोग बड़े दयालु हैं। आप चूहों को नहीं मारते; पर अमरीका में ऐसा नहीं है।
 
- आपकी बात आधी ठीक है मूषकराज। भारत में लोग चूहे मारना पसंद नहीं करते; पर जब घर में उत्पात होने लगे, तो चूहेदानी लगानी ही पड़ती है। ये बात दूसरी है कि लोग अपने घर के चूहे गली या तालाब में छोड़ देते हैं। दो-चार दिन घूमकर वे फिर वापस आ जाते हैं; पर कई लोग अहिंसक नहीं होते। वे एक कांटेदार शिकंजे में रोटी लगा देते हैं। चूहे के आते ही शिकंजा उसकी गर्दन में कस जाता है और....।
 
- छी, छी। चूहे की हत्या महापाप है; पर सुना है कुछ लोग चूहे खाते भी हैं।


 
- जी हां, उन्हें मुसहर कहते हैं। पर ये उन गरीबों की मजबूरी है।
 
- आप तो चूहे के बारे में काफी जानते हैं। कहीं पिछले जन्म में ... ?
 


- उसे छोड़ो, हमारे प्राचीन साहित्य में ‘मूषक सेठ’ की कहानी आती है। उसमें एक व्यापारी के बेटे ने मरे चूहे से ही कारोबार खड़ा कर लिया था। एक कहानी बिल्ली के गले में घंटी बांधने वाली भी है। उस चूहे के त्याग को भी बहुत याद किया जाता है, जिसने बिल्ली के मुंह में जाने से पहले जहर की कई गोलियां खा ली थीं। इससे चूहे के साथ वह बिल्ली भी मर गयी।
 
- यानि चूहे बहुत समझदार हो गये हैं ?
 
- जी हां। एक कंजूस ने चूहेदानी में रोटी की बजाय उसकी फोटो लगा दी। सुबह उसने देखा कि चूहेदानी में भी चूहे की फोटो रखी है। कम्प्यूटर युग के चूहे कम थोड़े ही हैं। 
 
- पर अब एक संकट आ गया है। अमरीकी शासन ने आदेश पारित किया है कि होटल वाले कुत्ते और बिल्ली का मांस ग्राहकों को नहीं परोसेंगे।
 
- छी..। कुत्ता और बिल्ली भी कोई खाने की चीज है ?
 
- भारत में तो नहीं; पर अमरीका में इसे लोग चटखारे लेकर खाते हैं। इसलिए वहां हर साल करोड़ों कुत्ते और बिल्ली मारे जाते हैं। इससे हम बचे रहते हैं। क्योंकि बिल्ली हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है; पर अब यदि बिल्ली नहीं मरेंगी, तो हमारी पूरी प्रजाति ही मिट जाएगी।
 
- पर इसमें हम क्या कर सकते हैं ? आप वहां, हम यहां। 
 
- फिर भी कोई रास्ता तो बताओ..?
 
- देखो मूषकराज; भारत में कर्मचारी हो या व्यापारी, छात्र हो या अध्यापक। सबको हड़ताल का हक है। लोकतंत्र के इस अमोघ शस्त्र को तुम भी आजमा कर देखो। 
 
मूषकराज को बात जंच गयी। सुना है तब से अमरीका में चूहे हड़ताल पर हैं। उन्होंने घोषणा कर दी है कि यदि सरकार ने कुत्ते और बिल्ली के मांस से प्रतिबंध नहीं हटाया, तो वे गणेश जी को विसर्जन के लिए नहीं ले जाएंगे। 
 
इस हड़ताल का अमरीकी सरकार पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ा; पर विघ्न विनाशक गणेश जी बड़े संकट में फंस गये हैं। उनका विसर्जन न हुआ, तो अगले बरस वे जल्दी कैसे आएंगे ?
 
आपके पास उनके विघ्नों के विनाश के लिए कोई ठोस सुझाव हो, तो जरूर बताएं।
 
-विजय कुमार

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