फेसबुक और ऑस्ट्रेलिया के बीच विवाद और समझौते के बारे में सबकुछ

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अभिनय आकाश । Feb 24, 2021 6:59PM
फेसबुक ने बीते हफ्ते ऑस्ट्रेलिया में सभी मीडिया कंटेंट को ब्लॉक कर दिया। ऑस्टेलिया के लोगों ने जब खबरें पढ़ने या अन्य जरूरी जानकारियों के लिए अपने-अपने फेसबुक अकाउंट खोले तो उन्हें कुछ नहीं मिला। सुबह से ही ऑस्ट्रेलिया में आम लोग इस प्लेटफॉर्म पर खबरें नहीं देख पा रहे थे।

वे दुनिया को बदल रहे हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वे अब दुनिया को चलाएंगे भी। हम बड़ी टेक कंपनियों के धमकियों से डरने वाले नहीं है। वे हमारी संसद पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये ऑस्टेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का बयान है। आखिर कौन दे रहा था ऑस्ट्रेलिया को धमकी, और वो भी ऐसी की देश के प्रधानमंत्री को इस तरह के बयान देने की जरूरत आन पड़ी। देश और दुनिया की खबरे जानने के लिए बहुत सारे प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। टीवी चैनल और मैगजीन के अलावा मीडिया हाउस अपनी बेवसाइट और ऐप के जरिये भी खबरें आप तक पहुंचाते हैं। वर्तमान दौर में गूगल और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खबर तक पहुंचने या पढ़ने का एक बहुत बड़ा अड्डा बन चुके हैं। लेकिन क्या हो अगर आप एक सुबह उठे और फेसबुक अकाउंट ओपन करने पर आपको खबरें नजर ही न आए। फेसबुक ने बीते हफ्ते ऑस्ट्रेलिया में सभी मीडिया कंटेंट को ब्लॉक कर दिया। ऑस्टेलिया के लोगों ने जब खबरें पढ़ने या अन्य जरूरी जानकारियों के लिए अपने-अपने फेसबुक अकाउंट खोले तो उन्हें कुछ नहीं मिला। सुबह से ही ऑस्ट्रेलिया में आम लोग इस प्लेटफॉर्म पर खबरें नहीं देख पा रहे थे। इसके साथ ही उन्हें आधिकारिक हेल्थ पेज, आपातकालीन सुरक्षा चेतावनी आदि से जुड़ी अपडेट मिल पा रही थी। मीडिया आउटलेट्स के पेजों को ब्लॉक करते हुए फेसबुक ने कई गैर सरकारी संस्थानों के पेजों को भी ब्लॉक कर दिया। 

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दरअसल, ऑस्टेलिया में मीडिया बारगेनिंग कोड यानी एमबीसी नाम का एक कानून लाया गया है। इसके तहत मीडिया कंटेंट के लिए फेसबुक और अल्फाबेट जैसी कंपनियों को भुगतान करने को कहा गया। जिसके बाद फेसबुक और गूगल ने इसका विरोध किया। फेसबुक ने न्यूज कंटेंट देने वाले संस्थानों के पेजों को ब्लॉक कर दिया। जिस कोड के विरोध में फेसबुक ने कंटेंट पेज को ब्लॉक किया है उसे ऑस्ट्रेलिया की संसद ने अभी तक पारित भी नहीं किया। सोशल मीडिया की इस कंपनी के रवैये पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑस्ट्रेलिया संसद के सदस्य और एनबीसी को लेकर बातचीत कर रहे सरकार के प्रतिनिधि ट्रेजर जॉश फेडनबर्ग ने कहा कि फेसबुक ने ये गलत किया है। उसका ये कदम गैर जरूरी था। उन्होंने तानाशाही दिखाई है और वे ऑस्ट्रेलिया में अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएंगे। 

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क्या है कानून में

कोरोना महामारी के दौर में मीडिया हाउसेसज को घाटा का सामना करना पड़ा और छंटनी के दौर से भी उसे रूबरू होना पड़ा वहीं फेसबुक और गूगल जैसी सोशल मीडिया कंपनियों ने न्यूज लिंक शेयर करके काफी मुनाफा कमाया। बीते वर्ष ऑस्ट्रेलिया प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग की एक जांच में ये पता चला कि फेसबुक-गूगल ने मीडिया क्षेत्र में राजस्व और मुनाफे का एक भारी हिस्सा एकट्टा किया है। डेढ़ वर्ष तक चले इस जांच के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में डिजिटल विज्ञापन पर खर्च किए गए प्रत्येक 100 डॉलर में से 81 डॉलर गूगल और फेसबुक की जेबों में जाता है। जिसमें फेसबुक का हिस्सा 28 डॉलर और गूगल के हिस्से 53 डॉलर आता है। जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कानून बनाया जिसके अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अगर न्यूज कंटेट शेयर करेंगे तो संबंधित कंपनी से प्रॉफिट शेयर करना होगा। ऑस्टेलिया की सरकार के अनुसार इस कानून का उद्देश्य टेक कंपनियों और न्यूज मीडिया के बीच समानता स्थापित करना है। फेसबुक और गूगल इसके लिए तैयार नहीं हुए और अपनी सर्विस बंद करने की धमकी भी देने लगे। 

काम आया प्रेसर पॉलिक्स

फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने ऑस्ट्रेलिया के अफसरों से प्रस्तावित कानून के बारे में बातचीत की थी। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने दो टूक शब्दों में ये साफ कर दिया था कि फेसबुक की धमकियों के सामने झुकने का सवाल ही नहीं उठता। हम अपने देश और यहां कि कंपनियों के हित जरूर देखेंगे। इसके बाद मॉरिसन ने  दुनिया के कई राष्ट्रध्यक्षों से बात भी की।  

पीएम मोदी से की बात 

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन फेसबुक के कदम के खिलाफ दुनिया के नेताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश में जुट गए। फेसबुक के फैसले के खिलाफ ऑस्टेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कड़ा रुख अपनाते हुए भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों से बात की। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अन्य देश भी न्यूज शेयर करने के एवज में डिजिटल कंपनियों से शुल्क वसूलने के उनकी सरकार के फैसलों का अनुसरण कर सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। फेसबुक को चुनी हुई सरकारों को इस तरह से धमकाने की कोशिश बंद करनी चाहिए। मॉरिसन ने फेसबुक द्वारा लगाई रोक का मसला पीएम मोदी के सामने उठाया। 

ऑस्ट्रेलिया सरकार और फेसबुक के बीच हुई सहमति

इस्टन ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पब्लिशर्स के बीच इनोवेशन और सहयोग को बढ़ाने वाले फ्रेमवर्क को हमने अपना समर्थन दिया है. उन्होंने बताया कि बातचीत के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया की सरकार कई बदलावों के लिए सहमत हुई है. इन बदलावों के तहत अब पब्लिक जर्नलिज्म में निवेश का दायरा बढ़ेगा और आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलिया में न्यूज शेयरिंग पर लगा बैन भी फेसबुक हटाएगा.

न्यूज शेयरिंग समझौता

ऑस्ट्रेलिया सरकार के सख्त रुख और मसौदा कानून में कुछ बदलाव के ऐलान के बाद फेसबुक ने कहा कि वह अपने यूजर्स को आने वाले दिनों में धीरे-धीरे न्यूज प्रकाशित करने की अनुमति देगा। माना जा रहा है कि फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया सरकार के साथ एक समझौते के तहत यह बैन हटाने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि फेसबुक और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक समझौते के तहत यह बैन हटाने का फैसला किया है। 

क्या भारत में भी बनेंगे ऐसे कानून

ऑस्ट्रेलिया के बाद क्या भारत में भी ऐसे कानून बनेंगे। ये एक बड़ा सवाल है। कानून की जरूरतों पर ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने भारत समते अन्य देशों से बात भी की। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक की ओर से अपने पाटर्नरों को इंस्टेंट आर्टिकल द्वारा और फेसबुक वॉच पर प्रकाशित वीडियो कंटेंट के बदले मीडिया वालों को पैसे देता है। गूगल और फेसबुक दोनों वीडियो विज्ञापन से होने वाली कमाई से भी भारतीय मीडिया कंपनियों को थोड़े पैसे देते हैं। लेकिन कमाई का कितना हिस्सा भारतीय कंपनियों को दिया जाता है इसका खुलासा नहीं हो पाया। अभी तक भारतीय मीडिया कंपनी ने औपचारिक रूप से अपने हिस्से की कमाई में बढ़ोत्तरी की मांग नहीं की है और ना ही भारत सरकार ने ऑस्टेलिया जैसे कानून लाने का कोई संकेत दिया है।- अभिनय आकाश

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