स्वेज नहर में लगा जाम 6 दिन बाद खुला, जानिए पहले कब-कब बने ऐसे हालात?

Suez Canal
अभिनय आकाश । Mar 30, 2021 6:22PM
विश्व के समुद्री रास्ते में जाम लग गया। दुनिया का सबसे बड़ा जहाज स्वेज नहर में फंस गया था और समुद्र में लगे ट्रैफिक जाम में 100 से ज्यादा जहाज फंस गए थे। स्वेज नहर में पिछले 6 दिनों से फंसा विशालकाय मालवाहक जहाज को निकालने में मिली कामयाबी। 400 मीटर लंबा जहाज धीरे-धीरे अब मंजिल की ओर बढ़ा।

ये देश की राजधानी दिल्ली है जहां सड़क कम और गाड़िया ज्यादा है। और अगर आप इस हुजूम में फंस गए तो क्या दिन और क्या रात। बसर सड़क पर ही हो जाएगी। लाखों की गाड़ियां हो या करोड़ों का बैंक बैलेंस, सड़क पर इस तरह फंसे तो सबकुछ धड़ा का धड़ा रह जाएगा। ये नजारा तो सड़क का है लेकिन आपने कभी पानी में जाम का नजारा देखा है। अगर नहीं तो आज हम दिखाते हैं। समुद्र में लगे ट्रैफिक जाम की खबर से रूबरू करवाते हैं। ऐसा जाम जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था गिर सकती, तेल की कीमतों में इजाफा हो सकता और मिस्र गरीबी के कगार पर पहुंच सकता है। दरअसल, विश्व के समुद्री रास्ते में जाम लग गया। दुनिया का सबसे बड़ा जहाज स्वेज नहर में फंस गया था। समुद्र में लगे ट्रैफिक जाम में 100 से ज्यादा जहाज फंस गए। जिसकी वजह से अब यूरोप और एशिया के बीच कारोबार ठप्प होने और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने की संभावना जताई जा रही थी। स्वेज नहर में चीन से माल लेकर जा रहे एक विशालकाय कंटेनर शिप के फंसने से भीषण ट्रैफिक जाम लग गया था। स्वेज पोर्ट के उत्तर में नहर को पार करने के दौरान एवरगीवेन नाम के शिप के कैप्टन ने कंट्रोल खो दिया। रिपोर्ट के मुताबिक स्वेज को पार करते समय नहर में एक बड़ा सा बवंडर उठा और हवा के तेज बवंडर के कारण शिप घूम गया। बाद में जब शिप को सीधा करने की कोशिश की गई तो वो नहर की चौड़ाई में घूमकर पूरे ट्रैफिक को ही बंद कर दिया। जिसकी वजह से चार सौ मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा कंटेनरशिप नहर में फंस गया। 

बड़े पैमाने पर टग बोट्स तैनात 

इसे निकालने के लिए बड़े पैमाने पर टग बोट्स को तैनात किया गया। बड़े-बड़े जहाजों को धक्का देने वाली ताकतवर बोट्स को टग बोट्स कहते हैं। कई टग बोट्स को इस काम में लगाया गया है। कंटेनरशिप के फंस जाने से लाल सागर और भू-मध्य सागर के किनारों पर बड़ी संख्या में जहाजों का जाम लगा हुआ है। जाम में फंसे जहाजों में एक और मालवाहक जहाज द मेसर्क डेनवर भी है। समुद्र में फंसे इस शिप की लंबाई इतनी ज्यादा है कि अगर इसको सीधा खड़ा कर दिया जाए तो इसकी ऊंचाई एफिल टॉवर और फॉयर स्टेट बिल्डिंग से भी ज्यादा होगी। 

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30 प्रतिशत शिपिंग कंटेनर वैल्यूम यही से करता है मूव 

स्वेज कनॉल से दुनिया का 30 प्रतिशत शिपिंग कंटेनर वैल्यूम मूव करता है। खासकर तेलों के कंटेनर का जो रूट है जिसके जरिये यूरोप और अमेरिका की तरफ जाते हैं। नहर में जाम की वजह से दुनिया में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल आ सकता है, खास तौर से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा हो सकता है। स्वेज नहर अथॉरिटी के अनुसार इस नहर से 2020 में 18 हजार जहाज गुजरे। यानी हर घंटे 53 जहाज, ये जहाज 1.17 बिलियन टन सामान लेकर एक जगह से दूसरी जगह गए। जबकि 1870 में यहां हर साल मात्र 486 जहाज गुजरते थे। 1996 में यह संख्या 21250 हो गई। भारत से लंदन की दूरी स्वेज नहर के रास्ते 11482 किलोमीटर है। जबकि अफ्रीका के रास्ते 20 हजार 1 किलोमीटर है। यानी आप मुंबई से लंदन स्वेज नहर के रास्ते 15 से 17 दिन में पहुंच जाएंगे, जबकि अफ्रीका के रास्ते जाने में आपको दो गुनी दूरी तय करनी होगी। इसमें आपका समय और पैसा भी दोगुना खर्च होगा। 

स्वेज नहर की कहानी 

स्वेज नहर से दुनिया का 12 प्रतिशत व्यापार होता है। लाल सागर से भू-मध्य सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर को बने डेढ़ सौ वर्ष हो गए हैं। 1859 में फ्रांस के इंजीनियर की देख-रेख में नहर काम शुरू हुआ था जो कि सन 1869 में जाकर पूरा हुआ। इसी वर्ष इसे व्यापार के लिए खोल दिया गया था। 165 किलोमीटर लंबी और 60 मीटर चौड़ी इस नहर से दुनिया का करीब 12 फीसदी समुद्री व्यापार होता है। स्वेज नहर बनाने से पहले जो जहाज यूरोप से भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ आते थे। उन्हें अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाना पड़ता था। लेकिन इस नहर के बनने से जहाज भू मध्य सागर से होते हुए लाल सागर में प्रवेश करते हैं और अंत में हिंद महासागर होते हुए भारत आते हैं। स्वेज नहर से यूरोप से एशिया, पूर्वी अफ्रीका का मार्ग खुल गया। जिससे 9 हजार 550 किलोमीटर की दूरी कम हो गई। 

भारत पर क्या असर 

इससे भारत को काफी नुकसान की आशंका है और इसके साथ ही महत्वपूर्ण सप्लाई भी बाधित हो सकती है। इस संकट से शिपिंग रेट बढ़ने से ट्रांसपोर्ट कॉस्ट भी बढ़ने की आशंका है। भारत को तेल, स्टील के आइटम, स्क्रैप और मशीन पार्ट्स जैसे बेसिक केमिकल्स के आयात में देरी हो सकती है। एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट ऑटोमैशन प्लेटफॉर्म shipsy के मुताबिक इस ब्लॉकेज से मालभाड़े में 5 से 15 फीसदी की तेजी आ सकती है। भारत का यूरोप, नार्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका के साथ स्वेज नहर के रास्ते सालाना व्यापार 200 अरब डॉलर का है।

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जापानी जहाज ने 2017 में रोका था रास्ता 

साल 2017 में एक जापानी जहाज ने स्वेज नहर का रास्ता रोक दिया था। लेकिन मिस्र के अधिकारियों ने इसे निकालने के लिए जहाज तैनात किए और कुछ घंटों में इसे वहां से हटा दिया गया। स्वेज नहर मिस्र में स्वेज इस्थमस को पार करती है। ये लगभग 193 किमी लंबा है और इसमें तीन प्राकृतिक झीलें शामिल हैं। साल 2015 में मिस्र की सरकार की तरफ से स्वेज नहर का विस्तार किया गया। जिसकी वजह से जलमार्ग को और गहरा किया गया। वहां से गुजरने वाले जहाजों को 35 किलोमीटर का एक समानान्तर चैनल प्रदान किया गया। 

हालांकि ताजा रिपोर्ट के अनुसार स्वेज नहर में पिछले 6 दिनों से फंसा विशालकाय मालवाहक जहाज एवर गिवेन को निकालने में मिली कामयाबी। 400 मीटर लंबा जहाज धीरे-धीरे अब मंजिल की ओर बढ़ा।- अभिनय आकाश

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