क्या है भारत-अमेरिका 2+2 डायलॉग, इस बैठक से क्या हासिल होगा?

Two Plus Two dialogue
अभिनय आकाश । Oct 26, 2020 12:53PM
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को टू-प्लस-टू वार्ता से नई ऊंचाई मिलेगी। चीन से एलएसी पर जारी तनाव के बीच प्रस्तावित वार्ता से भारत को खास उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 26-27 अक्तूबर को हो रही बातचीत में भारत-अमेरिका के साथ बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर आगे बढ़ने की संभावना है।

दिल्ली में 27 अक्टूबर को भारत-अमेरिका के बीच टू-प्लस-टू वार्ता होगी। भारत-अमेरिका के बीच टू-प्लस-टू वार्ता तीसरी बार होगी। दिल्ली में होने वाली बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षामंत्री मार्क एस्पर हिस्सा लेंगे। वहीं, भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भाग लेंगे। चीन से तनातनी और अमेरिका में तीन नंवबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक सप्ताह पहले हो रही यह वार्ता भारत और अमेरिका के लिहाजे से काफी अहम माना जा रहा है। 2 + 2 संवाद क्या है? इस बैठक क्या हासिल होगा, साथ ही इस डायलाग से जुड़े सब कपछ जो आप जानना चाहते हैं, उसकी आज के इस विश्लेषण में बात करेंगे। 

सबसे पहले 3 लाइनों में बताते हैं कि क्या है ‘टू प्लस टू वार्ता’?

  • ‘टू प्लस टू वार्ता’ एक ऐसी मंत्रिस्तरीय वार्ता होती है जो दो देशों के दो मंत्रालयों के मध्य आयोजित की जाती है।
  • भारत और अमेरिका के बीच ‘टू प्लस टू वार्ता’ दोनों देशों के मध्य एक उच्चतम स्तर का संस्थागत तंत्र है जो भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के लिये मंच प्रदान करता है।
  • भारत और अमेरिका के बीच आयोजित यह तीसरी ‘टू प्लस टू वार्ता’ है।

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अब आते हैं विस्तार पर, क्या है ये टू प्लस टू बैठक और क्या है इसका एजेंडा। 

टू प्लस टू संवाद' टर्म दो देशों के रक्षा और बाहरी मामलों के मंत्रालयों के बीच एक संवाद तंत्र की स्थापना के लिए उपयोग किया जाता है। सरल भाषा में कहे तो टू प्लस टू वार्ता एक प्रकार की अभिव्यक्ति है जिसके अंतर्गत प्रत्येक देश के दो नियुक्त मंत्री रक्षा और विदेश दोनों देशों के रणनीतिक और सुरक्षा हितों पर चर्चा करने के लिए मिलेंगे। जिसका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधित रक्षा और विदेश मामलों के प्रमुखों के बीच एक कूटनीतिक, और फलदायी बातचीत स्थापित करना है। वर्ष 2010 में भारत और जापान के बीच भी इस तरह की वार्ता हो चुकी है। जून 2017 में व्हाइट हाउस में प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तय हुआ था कि टू प्लस टू वार्ता साल में दो बार होगी। अभी तक दो बार यह बातचीत हुई है। इसके तहत तीन बैठकों का दौर चलता है। पहले दोनों देशों के विदेश व रक्षा मंत्रियों की अलग-अलग बैठक होती है। इसके बाद एक संयुक्त बैठक होती है। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच टू-प्लस-टू वार्ता का पहला संस्करण सितंबर, 2018 में दिल्ली में आयोजित किया गया था। पहली टू प्लस टू बातचीत दिल्ली में हुई। भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और जेम्स मेटिस के साथ अलग-अलग बातचीत हुई। वार्ता के दूसरे संस्करण का आयोजन पिछले साल दिसंबर में वॉशिंगटन में हुआ था।

ऐसे काम करता है

दो देशों के विदेश और रक्षा मंत्री अपने-अपने देशों की रणनीति का ध्यान रखते हुए महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम राय पर पहुंचते हैं। राष्ट्राध्याक्षों की समिट के दौरान इस पर अंतिम निर्णय होता है। 

इसलिए बेहतर है व्यवस्था

दो देशों के बीच मुख्य रणनीति संबंध विदेश और रक्षा मंत्रालय ही देखते हैं। ऐसे में इन मंत्रियों के आपस में मिलने से कई महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। 

पहली 2+2 वार्ता 

भारत और अमेरिका ने 06 सितम्बर 2018 को नई दिल्ली में पहली बार टू प्लस टू (2+2) वार्ता का आयोजन किया. टू प्लस टू बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत अमेरिका की अफगान नीति का समर्थन करता है. इसके बाद स्वराज ने भारत और अमेरिका की ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट में मीडिया को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि एनएसजी में जल्द से जल्द भारत की सदस्यता को लेकर बातचीत हुई जिसपर सभी ने सहमति जताई है।  एनएसजी सदस्यता, अफगान नीति, रक्षा और सुरक्षा पर चर्चा के साथ ही दोनों देशों के बीच अहम सुरक्षा समझौते COMCASA पर हस्ताक्षर हुए. इस समझौते के बाद अमेरिका संवेदनशील सुरक्षा तकनीकों को भारत को बेच सकेगा। खास बात यह है कि भारत पहला ऐसा गैर-नाटो देश होगा, जिसे अमेरिका यह सुविधा देने जा रहा है। 

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दूसरी टू प्लस टू वार्ता

18 दिसंबर, 2019 को भारत और अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच वाशिंगटन में ‘टू प्लस टू वार्ता’ हुई। इस वार्ता में दोनों पक्षों ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों में बढती साझेदारी को सकारात्मक रुप से स्वीकार किया और कहा कि सितंबर 2018 में दिल्ली में आयोजित पहली ‘टू प्लस टू वार्ता’ के बाद दोंनों देशों के बीच संबंधों में मज़बूती आई है। इस वार्ता में एक तरफ जहाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संबंध प्रगाढ़ बनाने को लेकर स्पष्टता देखी गई वहीं अमेरिका की निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों द्वारा भारत में अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की राह में एक बड़ी अड़चन समाप्त हो गई है। दोनों देशों ने इसके लिये ‘इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एनेक्स’ नामक समझौते को मंज़ूरी दी है। रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल कार्यक्रम के तहत रक्षा व्यापार के क्षेत्र में निष्पादित की जाने वाले प्राथमिकता पहलों की पहचान की गई। भारत और अमेरिका की तीनों सेनाओं के बीच नवंबर 2019 में ‘टाइगर ट्राइंफ’ नामक युध्दाभ्यास का आयोजन किया गया जो अब वार्षिक रूप से आयोजित किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने भारत को अपना लोकतांत्रिक मित्र बताते हुए आतंकवाद से अमेरिका तथा भारत के लोगों की सुरक्षा किये जाने की बात कही और भारत को पाकिस्तान प्रायोजित तथा अन्य प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने में समर्थन देने का आश्वासन दिया।

भारत और अमेरिका के बीच तीसरी ‘टू प्लस टू’ वार्ता

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को टू-प्लस-टू वार्ता से नई ऊंचाई मिलेगी। चीन से एलएसी पर जारी तनाव के बीच प्रस्तावित वार्ता से भारत को खास उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 26-27 अक्तूबर को हो रही बातचीत में भारत-अमेरिका के साथ बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर आगे बढ़ने की संभावना है। चीन के साथ जारी टकराव के बीच इस समझौते पर बात बढ़ी तो भारत को अमेरिका से बड़ी मदद मिलेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने कहा है कि अगले सप्ताह नयी दिल्ली में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ‘टू प्लस टू’ मंत्रिस्तरीय वार्ता में विश्व के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच वैश्विक सहयोग की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आगे उठाए जाने वाले कदमों का खाका तैयार किया जाएगा। अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है और यह चुनाव से पहले ट्रंप सरकार की आखिरी सबसे बड़ी राजनयिक वार्ता होगी। इस दो दिवसीय वार्ता में भारत और अमेरिका के शीर्ष चार कैबिनेट मंत्री भाग लेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगामी चार साल के लिए आधारशिला रखे जाने की संभावना है, भले ही चुनाव कोई भी जीते।

अमेरिका से ड्रोन की खरीदारी:

जानकारों का कहना है कि भारत अमेरिका से एमक्यू -9 बी ड्रोन खरीद रहा है। परस्पर समझौते के बाद भारत अंतरिक्ष के डाटा का प्रयोग दुश्मन के अड्डों पर हमला करने के लिए कर सकेगा। भारत और अमेरिका के बीच पहले ही तीन मौलिक समझौते हो चुके हैं। इन समझौतों के तहत दोनों देश पहले से ही एक-दूसरे के मिलिट्री संस्थानों का प्रयोग रि-फ्यूलिंग और आपूर्ति के लिए करने में सक्षम हैं। इसके अलावा कम्युानिकेशन के समझौतों के बाद दोनों देश आपस में जमीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्यय जानकारियों को साझा कर रहे हैं।

बेका पर टिका अंतरिक्ष सहयोग:

जानकारों का मानना है कि अगर बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर दस्तखत हुआ तो दोनों देशों के बीच जियो-स्पेशियल यानी अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। बेका के तहत भारत को यह मंजूरी मिल सकेगी कि वह दुश्मन पर हमले के लिए क्रूज या फिर मिसाइल का प्रयोग अगर करता है तो अमेरिका के जियो मैप का प्रयोग कर सकेगा। इसकी वजह से सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अभियान में बड़ी सफलता मिल सकेगी। 

पिछले 15 साल में करीब 20 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद

दोनों देश रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में घनिष्ठता के साथ काम कर रहे हैं। पिछले 15 सालों के दौरान भारत ने सी-17 ग्लोबमास्टरर्स और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस स्पेशल ऑपरेशन ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट समेत करीब 20 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद की है। ये वायुसेना के बेड़े के अहम आधार बन गए हैं। इसके अलावा हेलिकॉप्टर के मामले में भी अमेरिकी चिनूक और अपाचे की खरीद सशस्त्र बलों के लिए की गई है। सेना अमेरिकी अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर का भी इस्तेमाल कर रही है। नौसेना ने हाल ही में अमेरिकी एमएच-60 रोमियो एंटी-सबमरीन युद्धक बहुराष्ट्रीय हेलिकॉप्टरों को अपनी जरूरतों के लिए चुना है।- अभिनय आकाश

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