कश्मीर घाटी में 30 साल बाद फिर शुरू हुआ 125 साल पुराना चर्च

old church Kashmir Valley
चर्च के फिर से खुलने से ईसाई समुदाय काफी खुश नजर आ रहा है। 125 साल पुराने चर्च को उसके पुराने स्वरूप और गौरव के साथ तैयार किया गया है। कश्मीर घाटी में अमूमन ईसाई धर्म के लोग होली फैमिली कैथोलिक चर्च, रोमन कैथोलिक चर्च, एमए रोड पर और चर्च लेन में एकत्रित होकर प्रार्थना करते हैं।

क्रिसमस नजदीक आते ही कश्मीर घाटी में मंदिरों के साथ चर्चों में भी घंटियां बजने लगी हैं। श्रीनगर का 125 साल पुराना चर्च 30 साल बाद फिर से प्रार्थना के लिए खुल गया है। तीन दशकों में पहली बार है जब दर्जनभर लोग एकत्रित हुए और 125 साल पुराने सेंट ल्यूक चर्च के भीतर प्रार्थना की। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार कश्मीर घाटी में 1,000 से कम ईसाइयों के साथ जम्मू और कश्मीर में उग्रवाद की शुरुआत से पहले सेंट ल्यूक चर्च को प्रार्थना के लिए बंद कर दिया गया था।

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केंद्र के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत श्रीनगर स्मार्ट सिटी परियोजना के रूप में 90 लाख रुपए के बजट के साथ चर्च को नया रूप दिया जा रहा है। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा इसका ई-उद्घाटन। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में सेंट ल्यूक चर्च का जीर्णोद्धार के बाद फिर से खोलना भगवान मसीह के बलिदान, सेवा, प्रतिदान, प्रेम और करुणा के संदेश को मनाने और आत्मसात करने का एक ऐतिहासिक अवसर है सेंट ल्यूक चर्च जम्मू-कश्मीर की मिश्रित संस्कृति का एक अनूठा प्रतीक है।

चर्च के फिर से खुलने से ईसाई समुदाय काफी खुश नजर आ रहा है। 125 साल पुराने चर्च को उसके पुराने स्वरूप और गौरव के साथ तैयार किया गया है। कश्मीर घाटी में अमूमन ईसाई धर्म के लोग होली फैमिली कैथोलिक चर्च,  रोमन कैथोलिक चर्च, एमए रोड पर और चर्च लेन में एकत्रित होकर प्रार्थना करते हैं। लेकिन अब उन्हें सेंट ल्यूक चर्च के भीतर भी प्रार्थना करने का मौका मिलेगा।

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आपको बता दें कि सेंट ल्यूक चर्च की स्थापना 1896 में हुई थी। यह गॉथिक वास्तुकला की एक सुंदर संरचना है। इसके भीतर का हिस्सा एक खटामबंद छत है। चर्च के भीतर और बाहर के हिस्से को नया रूप दिया गया है।

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