• प्रभासाक्षी के कार्यक्रम में बोलीं मंजरी पांडे, 90 फीसदी लोग कर रहे हैं रोमन का इस्तेमाल

कवियित्री मंजरी पांडे ने कहा कि बहुत सी संस्थाएं ऐसी हैं जिनकी वेबसाइट सालों तक अपडेट नहीं होती हैं। इसलिए सबसे पहले विद्यालय, विश्वविद्यालय सबकी वेबसाइट होनी चाहिए और अलग-अलग भाषाओं की अपनी वेबसाइट होनी चाहिए।

नयी दिल्ली। हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी की प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइट प्रभासाक्षी.कॉम ने एक वेबिनार का आयोजन किया। जिसमें कवियित्री मंजरी पांडे समेत तमाम हिन्दी के जानकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मंजरी पांडे ने अपने वक्तवय में कहा कि डिजिटल क्रांति में ज्ञान क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को तो विश्व हिन्दी दिवस और हिन्दी दिवस के बारे में ही जानकारी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को देवनागरी लिपी के साथ ही राजभाषा के तौर पर स्वीकार की गई थी। जब हम किसी बच्चे को सिखाते हैं तो हम उसे धीरे-धीरे सही करते हैं। 

इसे भी पढ़ें: राष्ट्रीय एकता का तत्व है हिन्दी, विश्व में बढ़ रही है इसकी स्वीकार्यता

उन्होंने कहा कि बहुत सी संस्थाएं ऐसी हैं जिनकी वेबसाइट सालों तक अपडेट नहीं होती हैं। इसलिए सबसे पहले विद्यालय, विश्वविद्यालय सबकी वेबसाइट होनी चाहिए और अलग-अलग भाषाओं की अपनी वेबसाइट होनी चाहिए। इसमें सभी छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के जमाने में वेबसाइट कल्चर को विकसित करना बहुत जरूरी है। ऐसे में महज वेबसाइट को बनाने बस से काम पूरा नहीं हो जाता है। उसे बढ़ाते रहना जरूरी है। वेबसाइट का कंटेंट अब हिन्दी में लिखा जाना चाहिए। क्योंकि डिजिटली सभी के मन में प्रभाव ज्यादा पड़ता है। ऐसे में तकनीक की सबसे ज्यादा जरूरत है। बहुत सारी जगहों में कंटेंट लिखने का रोजगार है और उनकी कमी भी है।

इसे भी पढ़ें: प्रभासाक्षी के कार्यक्रम में बोलीं इंदिरा दांगी, विश्व की सबसे प्राचीन भाषा की संवाहिका हिंदी है 

इस दौरान उन्होंने हिन्दी पर लिखी अपनी एक रचना पेश की। राजमहल से निकली राजदुलारी है, अपनी हिन्दी प्यारी है... उन्होंने अंत में कहा कि 90 फीसदी लोग रोमन का इस्तेमाल कर रहे हैं वो घातक है।