प्रचंड बहुमत वाली बीजेपी सरकार से उम्मीदें बहुत थी, उसने कई बड़े फैसले भी किए, उत्तराखंड सरकार की उपलब्धियों पर एक नज़र

प्रचंड बहुमत वाली बीजेपी सरकार से उम्मीदें बहुत थी,  उसने कई बड़े फैसले भी किए, उत्तराखंड सरकार की उपलब्धियों पर एक नज़र

प्रदेश सरकार के पांच साल नए इरादे-युवा सरकार कार्यक्रम के तहत रुद्रप्रयाग एवं अगस्त्यमुनि में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। पलायन उत्तराखंड का सबसे बड़ा मुद्दा है और इसीलिए रिवर्स पलायन शुरु करवाने के दावे के साथ बहुमत में आई बीजेपी सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया जो इसका सबसे अहम फ़ैसला रहा।

कहने को उत्तराखंड महज 70 विधानसभा की सीटों वाला छोटा राज्य है, लेकिन वहां की सियासत इतनी बडी और बगावती तेवरों वाली है कि राज्य बनने से लेकर आज तक कोई भी मुख्यमंत्री पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। प्रचंड बहुमत के साथ बनी उत्तराखंड की बीजेपी सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में तीन मुख्यमंत्री प्रदेश ने देखे। जहां तकरीबन चार साल त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्रित्वकाल में निकाल दिए। जब यह लग रहा था कि एनडी तिवारी के बाद त्रिवेंद्र मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पांच साल पूरे करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बन जाएंगे तो उनकी विदाई हो गई। तीरथ सिंह रावत ने कमान संभाली और कुछ ही महीने में उनकी भी कुर्सी खिसक गई। पार्टी ने युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी को बागडोर थमाई। बदलाव की हवा से भाजपा और कांग्रेस का संगठन भी महफूज न रहा। दोनों दलों ने अपने-अपने संगठन की कमान नए चेहरों के हाथों में सौंपी। प्रदेश कांग्रेस की कमान हरीश रावत खेमे के गणेश गोदियाल के हाथों में दे दी गई। प्रदेश अध्यक्ष पद से रुख्सत हुए प्रीतम सिंह कांग्रेस विधायक मंडल दल के नेता बना दिए गए।

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प्रदेश सरकार के पांच साल नए इरादे-युवा सरकार कार्यक्रम के तहत रुद्रप्रयाग एवं अगस्त्यमुनि में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। पलायन उत्तराखंड का सबसे बड़ा मुद्दा है और इसीलिए रिवर्स पलायन शुरु करवाने के दावे के साथ बहुमत में आई बीजेपी सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया जो इसका सबसे अहम फ़ैसला रहा।

2018 में आयोजित इंवेस्टर समिट भी त्रिवेंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि रही। इसमें देश भर के कारोबारियों ने 124 लाख करोड़ के 601 एमओयू साइन किए।

राज्य के हर नागरिक को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ़्त उपलब्ध करने के लिए अटल आयुष्मान योजना की शुरुआत की गई।

उड़ान योजना के तहत पंतनगर और पिथौरागढ़ को हवाई नक्शे से जोड़ा गया।

सरकार ने देहरादून में रिस्पना और अल्मोड़ा में कोसी नदी को को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरु किया।

किसानों को दो फ़ीसदी ब्याज पर एक लाख तक का लोन देना शुरु किया गया।

 जब जल जीवन मिशन योजना लॉन्च हुई थी, तब उत्तराखंड में 8 प्रतिशत घरों में पानी के कनेक्शन थे अब उत्तराखंड में 47 प्रतिशत पानी के कनेक्शन उत्तराखंड में हैं।

कब है उत्तराखंड का चुनाव 

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा. 70 सदस्यीय विधानसभा सीट के लिए इस बार एक ही चरण में वोटिंग होगी, जबकि इससे पहले दो चरण में वोटिंग होती थी। चुनाव आयोग की मानें तो उत्तराखंड में एक ही चरण में सभी 70 सीटों पर 14 फरवरी को मतदान होगा। 10 मार्च को एक साथ सभी राज्यों के साथ उत्तराखंड चुनाव के परिणाम सामने आएंगे।





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