उपसभापति चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए AAP ने रखी शर्त

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 8, 2018   16:38
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उपसभापति चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए AAP ने रखी शर्त

आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा के उपसभापति पद के लिये कांग्रेस द्वारा आज बी के हरिप्रसाद की उम्मीदवारी घोषित किये जाने को विपक्ष की एकता के लिये बाधक बताते हुये इसे एकपक्षीय फैसला करार दिया।

नयी दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा के उपसभापति पद के लिये कांग्रेस द्वारा आज बी के हरिप्रसाद की उम्मीदवारी घोषित किये जाने को विपक्ष की एकता के लिये बाधक बताते हुये इसे एकपक्षीय फैसला करार दिया। पार्टी ने साफ कर दिया है कि आप सदस्य कांग्रेस उम्मीदवार को अब बिना मांगे वोट नहीं देंगे। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगर आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से हरिप्रसाद के लिये समर्थन मांगेंगे तब ही आप सदस्य वोट देंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में आप के तीन सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि उपसभापति पद के लिये विपक्ष की ओर से प्रत्याशी के चयन की प्रक्रिया के दौरान अभी तक गैर कांग्रेसी दलों के सदस्यों के नाम सामने आ रहे थे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और कांग्रेस ने अपना ही उम्मीदवार घोषित कर दिया। 

सिंह ने कहा ‘‘कांग्रेस तंगदिली से राजनीति करती है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में हमने कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवार को बिना मांगे समर्थन दिया था। अब उन्होंने अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा है, अगर कांग्रेस अध्यक्ष आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से समर्थन मांगेगे तो वोट देंगे।’’

कांग्रेस द्वारा समर्थन के लिये अब तक बातचीत की कोई पहल होने के सवाल पर सिंह ने कहा ‘‘अभी तक न तो कोई संपर्क किया गया, ना ही कोई बातचीत हुयी, इनको अगर हमारा वोट नहीं चाहिये तो जबरन वोट देने से क्या फायदा।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह रवैया विपक्ष की एकता के लिये नुकसानदायक है। व्यापक हित में यह ठीक नहीं है।





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राॅबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है ED, राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 18, 2021   13:39
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राॅबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है ED, राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका

डी ने प्रार्थना पत्र पेश कर आरोपियों से हिरासत में लेकर पूछताछ को आवश्यक बताते हुए हाईकोर्ट से अनुमति मांगी है। ईडी की अर्जी पर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ आज इस मामले पर सुनवाई करेगी।

चर्चित कोलायत जमीन घोटाला और धन शोधन मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा के पति राॅबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राॅबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है। ईडी ने प्रार्थना पत्र पेश कर आरोपियों से हिरासत में लेकर पूछताछ को आवश्यक बताते हुए हाईकोर्ट से अनुमति मांगी है। ईडी की अर्जी पर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ आज इस मामले पर सुनवाई करेगी। 

इसे भी पढ़ें: आयकर विभाग की पूछताछ के बाद बोले रॉबर्ट वाड्रा, हर सवाल का जवाब देने को तैयार

क्या है मामला

आरोप है कि राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने कई संदिग्ध नामों से भूमि आवंटित करा ली। साल 2010 में वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हाॅस्पिटैविटी प्राइवेच लिमिटेड ने 72 लाख रुपये में 69.55 हेक्टेयर की भूमि खरीद उसे दो साल बाद 5.15 करोड़ रुपये में दूसरी कंपनी एलीगेनी फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी।  ईडी मे मामले में सूचना रिपोर्ट दाखिल कर राॅबर्ट वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था। साल 2018 में कंपनी ने हाईकोर्ट का रुख कर लिया था। 





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किसान आंदोलन पर बोले कैलाश चौधरी, यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो समाधान हो जाएगा

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 18, 2021   13:13
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किसान आंदोलन पर बोले कैलाश चौधरी, यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो समाधान हो जाएगा

कैलाश चौधरी ने यह भी कहा कि शुरू में जब पहली बैठक हुई थी, तब उनके जो मुद्दे थे उन पर सरकार ने अमल करके उसमें संशोधन कर लिया है। उसके लिए लिखित में आश्वासन देने की बात भी हो चुकी है। कल इस मानसिकता के साथ बैठें कि कोई न कोई समाधान निकालना है।

सरकार और किसानों के बीच में कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है। अब तक लगभग 9 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन निष्कर्ष कुछ नहीं निकल पाया है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। इस सब के बीच केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक कैलाश चौधरी ने कहा कि किसान यूनियन के कुछ नेता चाहते हैं कि इसका समाधान हो। अगर यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो कल इसका समाधान हो जाएगा। कम्युनिस्ट, कांग्रेस और कुछ राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते कि इसका समाधान हो।

इसके आगे कैलाश चौधरी ने यह भी कहा कि शुरू में जब पहली बैठक हुई थी, तब उनके जो मुद्दे थे उन पर सरकार ने अमल करके उसमें संशोधन कर लिया है। उसके लिए लिखित में आश्वासन देने की बात भी हो चुकी है। कल इस मानसिकता के साथ बैठें कि कोई न कोई समाधान निकालना है। आपको बता दें कि सरकार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों से तीन कृषि कानून के बारे में अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने एवं ठोस प्रस्ताव तैयार करने के लिये एक अनौपचारिक समूह गठित करने को कहा जिस पर 19 जनवरी को अगले दौर की वार्ता में चर्चा हो सकेगी। तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ शुक्रवार को हुई नौवें दौर की वार्ता में प्रदर्शनकारी किसान तीन नये विवादित कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे जबकि सरकार ने किसान नेताओं से उनके रुख में लचीलापन दिखाने की अपील की एवं कानून में जरूरी संशोधन के संबंध अपनी इच्छा जतायी। 





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पाकिस्तान में अलग सिंधु देश की मांग, PM मोदी की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 18, 2021   13:03
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पाकिस्तान में अलग सिंधु देश की मांग, PM मोदी की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन

पीएम मोदी के अलावा कई अन्य बड़े देशों के नेताओं के पोस्टर भी इस रैली में थे। प्रदर्शन करने वाले लोग अलग सिंधुदेश और पीएम मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी पीएम मोदी से सिंध को अलग गेश बनाने के लिए समर्थन भी मांग रहे थे।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के तारे गर्दिश में हैं। पाकिस्तान में इमरान खान पर विपक्ष तो हमलावर था ही जैसा जनता का रुख है उसने भी इमरान खान की मुश्किलें बढ़ा दी है। रविवार को सिंध के सान कस्बे में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। रैली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैनर और पोस्टर भी देखने को मिले। पीएम मोदी के अलावा कई अन्य बड़े देशों के नेताओं के पोस्टर भी इस रैली में थे। प्रदर्शन करने वाले लोग अलग सिंधुदेश और पीएम मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी पीएम मोदी से सिंध को अलग गेश बनाने के लिए समर्थन भी मांग रहे थे। 

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके को दी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

 गौरतलब है कि 1947 के भारत-पाक बंटवारे से लेकर अब तक पाकिस्तान के दोयम दर्जे की नीतियों और सेना की जूतों के तले रखने की आदतों का शिकार होना पड़ता है। जिस तरह बलूचिस्तान पश्चूनिस्तान की मांग पंजाबी वर्चस्व वाली पाकिस्तानी सरकार और सेना के लिए गले की हड्डी बनी हुई है, ठीक उसी तरह सिंध प्रांत की मांग भी लंबे अरसे की की जाती रही है। वहां की सड़कों पर रह-रहकर यह नारा जोर मारता है 'कल बना था बांग्लादेश, अब बनेगा सिंधुदेश'।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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