दिल थाम के बैठिए, अब समय आ गया है एडवेंचर स्पोर्ट्स का, पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है उत्तराखंड

  •  अनुराग गुप्ता
  •  सितंबर 26, 2020   13:44
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दिल थाम के बैठिए, अब समय आ गया है एडवेंचर स्पोर्ट्स का, पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है उत्तराखंड
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राफ्टिंग के शौकीन लोग जल्द ही इसका लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा जो लोग ट्रैकिंग और कैंपिंग के दीवाने हैं उन्हें भी अपना बैग पैक कर लेना चाहिए और उत्तराखंड की राह पकड़ लें।

ऋषिकेश। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की वजह से अब घरों में रह-रहकर बहुत सारे लोग बोर हो चुके हैं। ऐसे में इन लोगों के लिए एक खुशखबरी है। दरअसल, खुशखबरी यह है कि आप फिर से वादियों का मजा ले सकेंगे। गंगा किनारे बैठ सकेंगे। ट्रैकिंग कर सकेंगे। उत्तराखंड सरकार ने निर्णय लिया है कि कुछ पाबंदियों के साथ फिर से ऐडवेंचर्स टूरिजम को शुरू किया जाए। तभी तो रिवर राफ्टिंग के मद्देनजर गंगा में जल स्तर का परीक्षण कराया गया है। 

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राफ्टिंग के शौकीन लोग जल्द ही इसका लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा जो लोग ट्रैकिंग और कैंपिंग के दीवाने हैं उन्हें भी अपना बैग पैक कर लेना चाहिए और उत्तराखंड की राह पकड़ लें क्योंकि उत्तराखंड आपका स्वागत करने के लिए अब तैयार है।

कोविड नियमों में दी गई ढील

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना वायरस के नियमों में ढील दी है ताकि फिर से पर्यटक उत्तराखंड के एडवेंचर स्पोर्ट्स की तरफ वापस लौटें। इसके लिए बकायदा नई गाइडलाइन्स जारी की गई हैं। अब पर्यटक बिना कोरोना की जांच कराएं उत्तराखंड आ सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में तैराकी और स्विमिंग पूल्स को चलाने की अभी भी अनुमति नहीं मिली है लेकिन वॉटर स्पोट्र्स, ट्रैकिंग, माउंटेनियरिंग, एरो स्पोर्ट्स और कैंपिंग को इजाजत मिल गई है। 

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साथ ही आदेश में यह भी कहा गया है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स चलाने वाले ऑपरेटरों को अपनी गतिविधियों की पूरी जानकारी जिला प्रशासन समेत जिला पर्टयन अधिकारी और शासन को देनी होगी।

प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद पर्यटन उद्योग के रफ्तान पकड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। एक अक्टूबर से उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्ट्स की शुरुआत होने वाली है। एडवेंचर स्पोर्ट्स चलाने वाले ऑपरेटर्स तैयारियों में जुटे हुए हैं। जो लोग अपने घरों में बोर हो रहे हैं और काफी वक्त से घूमने की योजना बना रहे थे उनके लिए उसे पूरा करने का समय आ गया है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 30, 2020   23:30
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भोपाल के ईदगाह हिल्स का नाम गुरु नानक टेकरी रखने की माँग
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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे।

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने  प्रदेश की राजधानी  भोपाल स्थित ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भोपाल की यह टेकरी ऐतिहासिक रूप से गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। वही रामेश्वर शर्मा ने होशंगाबाद शहर का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखने की वकालत की है। 

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भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाए। उन्होंने कहा कि 500 साल पहले जब गुरु नानक देव जी भारत भ्रमण पर निकले थे, तब वे भोपाल भी आए थे। यहां गुरु नानक देव जी उसी टेकरी पर आए थे, जिसे ईदगाह हिल्स कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पहले इस टेकरी को गुरुनानक टेकरी कहा जाता था, लेकिन बाद में यहां ईदगाह बन गई और उसका नाम ईदगाह हिल्स पड़ गया। अब इसे बदलकर गुरु नानक टेकरी किया जाना चाहिए। वही रामेश्वर शर्मा ने कहा कि होशंगाबाद का नाम भी बदलकर नर्मदापुरम किया जाना चाहिए। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


नर्मदा और गौ संरक्षण की मांगों को लेकर भैयाजी सरकार ने शुरू किया सत्याग्रह

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 30, 2020   23:00
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नर्मदा और गौ संरक्षण की मांगों को लेकर भैयाजी सरकार ने शुरू किया सत्याग्रह
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भैयाजी सरकार धूनी वाले द्वारा विगत 46 दिन से अन्न त्याग कर मां नर्मदा गौ सत्याग्रह किया जा रहा है। जबलपुर, मंडला आदि अनेक नर्मदा तटों पर उनके समर्थकों के द्वारा इस सत्याग्रह को समर्थन दिया जा रहा है।

होशंगाबाद। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में नर्मदा और गौ संरक्षण की मांग को लेकर बीते 46 दिनों से सत्याग्रह कर रहे संत भैयाजी सरकार ने सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा से जिले के बांद्राभान संगम तट पर सत्याग्रह शुरू कर दिया है। उनके साथ नर्मदा मिशन से जुड़े कई संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा सत्याग्रह किया जा रहा है। मां नर्मदा की पूजन अर्चन के साथ सत्याग्रह सोमवार सुबह 9 बजे से शुरू हो गया है। जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के सैंकड़ों लोग जुड़ते जा रहे हैं। 

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भैयाजी सरकार धूनी वाले द्वारा विगत 46 दिन से अन्न त्याग कर मां नर्मदा गौ सत्याग्रह किया जा रहा है। जबलपुर,  मंडला आदि अनेक नर्मदा तटों पर उनके समर्थकों के द्वारा इस सत्याग्रह को समर्थन दिया जा रहा है। ब्रांदाभान में सत्याग्रह से पूर्व संत भैयाजी सरकार ने कहा कि माँ नर्मदा के रिपेरियन जोन जो कि 300 मीटर में हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया है, इस तटीय क्षेत्र को संरक्षित करने, माँ नर्मदा को जीवंत इकाई का दर्जा देने की मांग, गौ संरक्षण, गौचर विकास की मांग को लेकर सत्याग्रह जारी है। उन्होंने बताया कि नर्मदा गौ सत्याग्रह जनजागरण जन आंदोलन समिति मध्य प्रदेश के द्वारा यह सत्याग्रह किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के अनेक संगठन शामिल हो रहे हैं।

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ये हैं प्रमुख मांगे

- हाईकोर्ट के आदेशानुसार नर्मदा के दोनों ओर 300 मीटर तक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर तत्काल संरक्षित किया जाए।

- मां नर्मदा को जीवंत इकाई का दर्जा देकर ठोस नीति व कानून बनाए जाए।

- हरित क्षेत्र में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, भंडारण, खनन प्रतिबंधित किया जाए। 

- अमरकंटक तीर्थ क्षेत्र में हो रहे निर्माण अतिक्रमण खनन पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए।

- नर्मदा के जल में मिल रहे गंदे नालों विषेले रासायनों को बंद करने व अपशिष्ट द्रव्य पदार्थों के प्रबंधन हेतु प्रभावी ठोस कार्ययोजना लागू की जाए।

- बेसहारा गौ वंश के लिए आरक्षित नगरीय निकायों की गौचर भूमि को संरक्षित किया जाए एवं अवैध अतिक्रमण निर्माण कब्जा से मुक्त कराया जाए।

- नर्मदा पथ के तटवर्ती गांव नगरों को जैवविविधता क्षेत्र घोषित कर समग्र गौ-नीति, गौ अभ्यारण बनाया जाए। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


अपने साथी बलराम की मौत के बाद हिंसक हुआ हाथी राम, दो लोगों पर किया हमला

  •  दिनेश शुक्ल
  •  नवंबर 30, 2020   22:41
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अपने साथी बलराम की मौत के बाद हिंसक हुआ हाथी राम, दो लोगों पर किया हमला
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मंडला के बीजाडांडी वन परिक्षेत्र में रविवार रात उसने दो ग्रामीणों पर हमला किया। सीसीएफ जबलपुर एचडी मेहिले का कहना है कि खतरनाक हो चुके राम का रेस्क्यू करने के लिए कान्हा व पेंच के डायरेक्टर मंडला वन विभाग की टीम के साथ उसे ट्रेंक्युलाइज करने की कोशिश कर रहे हैं।

मंडला। अपने साथी बलराम की मौत के बाद हाथी राम हिंसक हो गया है। बीती रात मंडला जिले में उसने दो ग्रामीणों पर हमला कर दिया। हालांकि दोनों ही बच गए। इधर, हाथी बलराम के हिंसक होने पर वन अधिकारियों ने उसे ट्रेंक्युलाइज करके रेस्क्यू करने के प्रयास तेज कर दिये हैं। जबलपुर वन मंडल के बरगी के मोहास में हाथी बलराम (20) की शिकारियों द्वारा बिछाए गए करंट से मौत के बाद उसका साथी राम बेकाबू हो गया है। वह काफी गुस्से में है।

 

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मंडला के बीजाडांडी वन परिक्षेत्र में रविवार रात उसने दो ग्रामीणों पर हमला किया। सीसीएफ जबलपुर एचडी मेहिले का कहना है कि खतरनाक हो चुके राम का रेस्क्यू करने के लिए कान्हा व पेंच के डायरेक्टर मंडला वन विभाग की टीम के साथ उसे ट्रेंक्युलाइज करने की कोशिश कर रहे हैं। मंडला डीएफओ कमल अरोड़ा का कहना है कि राम हाथी की सोमवार को लोकेशन टिकरिया रेंज में मिली है। कान्हा नेशनल पार्क के डायरेक्टर एसके सिंह और पेंच के विक्रम सिंह परिहार की अगुवाई में वन विभाग की टीम टिकरिया रेंज में पहुंच चुकी है। हाथी राम को ट्रेंक्युलाइज कर कान्हा नेशनल पार्क ले जाया जाएगा। कर्नाटका के विशेषज्ञों से भी बातचीत चल रही है। 

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जबलपुर वन विभाग का अमला बीते तीन दिनों से राम हाथी की लोकेशन पता करने में लगा था, लेकिन सफलता नहीं मिली। रविवार को उसके पग मार्क जरूर नेवास रोड पर मनेरी औद्योगिक क्षेत्र में पाए गए थे। रविवार शाम सात बजे के लगभग मनेरी से वह बीजाडांडी वन परिक्षेत्र में पहुंच गया था, जो बरगी के मोहास से 45 किमी दूर है। राम हाथी सबसे पहले बीजाडांडी क्षेत्र के भैसवाही गांव निवासी भगत सिंह बैगा (45)  के खलिहान में घुस आया। उसने भगत सिंह के पीठ पर दांत से हमला कर घायल कर दिया। यहां ग्रामीणों ने शोर मचाया तो वह खेतों की ओर भाग गया।

 

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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती बीजाडांडी निवासी भगत सिंह ने बताया कि खलिहान में धान खा रहे हाथी को भैंस समझकर भगाने गए थे, तभी उसने हमला कर दिया। वहीं, नगरार गांव निवासी राजकुमार यादव (55) खेत में रखवाली करने गए थे। राम हाथी ने गुस्से में उन्हें सूंड से धक्का देकर गिरा दिया। राजकुमार यादव के मुताबिक हाथी उन्हें रौंदने के लिए आगे बढ़ा था। उसने भाग कर किसी तरह अपनी जान बचाई। हाथी ने दूर तक उसका पीछा भी किया था। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।