आफताब का नार्को टेस्ट दो घंटे के बाद हुआ खत्म, कई अनसुलझे सवालों के मिलेंगे जवाब

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रितिका कमठान । Dec 01, 2022 12:27PM
श्रद्धा मर्डर केस के आरोपी आफताब का नार्को टेस्ट दिल्ली के रोहिणी स्थित अंबेडकर अस्पताल में हो चुका है। आफताब का नार्को टेस्ट लगभग दो घंटे तक चला है। नार्को टेस्ट के बाद संभावना है कि हत्याकांड में कई सवालों के जवाब मिल सकेंगे।

श्रद्धा मर्डर मामले में आफताब का नार्को टेस्ट पूरा हो गया है। आफताब का नार्को टेस्ट दिल्ली के रोहिणी स्थित अस्पताल में अंबेडकर अस्पताल में दो घंटे तक नार्को टेस्ट किया गया है। इस नार्को टेस्ट के जरिए आरोपी आफताब के नार्को टेस्ट से कई राज सामने आएंगे। डॉक्टरों की टीम ने आफताब से सवाल पूछे हैं।

जानकारी के मुताबिक आफताब को फिलहाल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। आफताब को नार्को टेस्ट के लिए 10 बजे के बाद आफताब को खाना नहीं खाने को दिया गया था। नार्को टेस्ट करने के लिए दो डॉक्टर हैं, जिसमें एक एनेस्थीसिया के डॉक्टर और एक जूनियर डॉक्टर थे, जिन्होंने बीपी और पल्स पर नजर रखी। वहीं फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम के भी साइकोलॉजिस्ट और दो फोटो एक्सपर्ट शामिल रहे। माना जा रहा है कि आफताब के नार्को टेस्ट की वीडियोग्राफी भी कराई गई है।

आफताब को नार्को टेस्ट से डेढ़ घंटा पहले अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया था। नार्को टेस्ट होने से पहले का प्रोसीजर भी किया गया, जिसके तहत आफताब का कंसेंट नार्को टेस्ट के लिए फॉरेंसिक टीम ने लिया था। इस दौरान आफताब से पूछा गया था कि क्या वो नार्को टेस्ट के लिए सहज महसूस कर रहा है या नहीं। यहां उसका मेडिकल चेकअप किया गया, जिसमें ब्लड प्रेशर, प्लस रेट, शरीर का तापमान, हर्ट बीट मापे थे। सभी रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद आफताब का नार्को टेस्ट शुरू हुआ था। 

नार्को टेस्ट की शुरुआत से पहले आफताब की टीम ने आफताब को सहमित फॉर्म पढ़कर सुनाया था। इस फॉर्म पर आफताब का हस्ताक्षर लेने के बाद ही टेस्ट की शुरुआत की गई थी। बता दें कि नार्को टेस्ट की शुरुआत करने से पहले आरोपी की सहमति लेना आवश्यक होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में आदेश दिए है। बता दें कि नार्को टेस्ट को ट्रूथ सीरम भी कहा जाता है। इसे कई अहम मामलों में इस्तेमाल किया जा चुका है।

जानें क्या है नार्को टेस्ट?

दरअसल नार्को टेस्ट में सोडियम पेंटोथल नाम के केमिकल युक्त साइकोएक्टिव दवा मिलाई जाती है। ये दवाई जब आरोपी की नसों तक पहुंचती है वो लंबे समय के लिए बेहोशी में चला जाता है। इसके बाद आरोपी अर्धबेहोशी की स्थिति में आरोपी सच भी बोलने लग जाता है, जो वो सामान्य स्थिति में नहीं बोल सकता है। बता दें कि इस टेस्ट का उपयोग आमतौर पर जांच एजेंसियां तब करती हैं जब आरोपी उन्हें बरगलाने की कोशिश करता है। या जब एजेंसियों के हाथ पक्के सबूत नहीं लगते तब भी इस टेस्ट को किया जाता है। नार्को टेस्ट आरोपी की मर्जी के बिना नहीं किया जा सकता है।

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