16 साल बाद अचानक नरसिम्हा राव की विरासत कांग्रेस को क्यों जरूरी लगने लगी है?

16 साल बाद अचानक नरसिम्हा राव की विरासत कांग्रेस को क्यों जरूरी लगने लगी है?

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को समर्पित कांग्रेसी बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी को उनकी उपलब्धियों एवं योगदान पर गर्व है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें इस देश का ‘महान सपूत’ बताया।

दिसंबर 2004, नरसिम्हा राव की मृत्यु हो गई थी। कांग्रेस तब तक केंद्र में सत्ता में वापस आ गई थी। सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। राव की मृत्यु के एक दिन बाद, शव को नई दिल्ली के अकबर रोड पर कांग्रेस मुख्यालय के द्वार पर लाया गया। लेकिन राव के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को एआईसीसी के गेट के बाहर फुटपाथ पर रखा गया था। इस बात को बीते डेढ़ दशक से भी ज्यादा का वक्त हो गया है। लेकिन आज पीवी नरसिम्हा राव अपनी मृत्यु के 16 साल बाद सभी राजनीतिक दलों द्वारा याद किए जा रहे हैं। कई वर्षों तक नरसिम्हा राव से किनारा काटने वाली कांग्रेस पार्टी उनके योगदान को याद कर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को समर्पित कांग्रेसी बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी को उनकी उपलब्धियों एवं योगदान पर गर्व है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें इस देश का ‘महान सपूत’ बताया।

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 ये सर्वविदित बात है कि नरसिम्हा राव के गांधी-नेहरू परिवार के साथ संबंधों में खटास आ गई थी। बीते दो दशक के दौरान शायद ही कभी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से पीवी नरसिम्हा राव को याद किया गया हो। लेकिन तेलंगाना कांग्रेस ने 24 जुलाई को नरसिंह राव का जन्म शताब्दी समारोह शुरू किया है। इसी दिन 1991 में उनकी सरकार ने वह पहला बजट पेश किया था जिसे देश में आर्थिक सुधारों की दिशा में पहला प्रयास किये जाने का दावा किया जाता है।

सोनिया गांधी ने किया याद

सोनिया गांधी ने कहा कि नरसिंह राव एक सम्मानित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हस्ती थे और कांग्रेस को उनकी विभिन्न उपलब्धियों और योगदानों पर गर्व है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ पी वी नरसिंह राव का जन्म शताब्दी वर्ष हम सभी के लिए मौका है कि हम एक बहुत विद्वान व्यक्तित्व को याद करें और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करें। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में लंबा जीवन बिताने के बाद वह ऐसे समय देश के प्रधानमंत्री बने जब गंभीर आर्थिक संकट था। ’’

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आर्थिक सुधार और उदारीकरण सबसे बड़े योगदान 

पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव की सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कहा कि राव को वास्तव में भारत में आर्थिक सुधारों का जनक कहा जा सकता है। सिंह बाद में खुद देश के प्रधानमंत्री बने। सिंह ने कहा, ‘‘ आर्थिक सुधार और उदारीकरण वाकई उनके सबसे बड़े योगदान हैं।’’ उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदानों को कम करके आंका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति के संबंध में राव ने चीन सहित अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में सुधार के लिए प्रयास किया।

राहुल ने राव की राजनीतिक यात्रा का किया जिक्र

पूर्व काग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राव की उल्लेखनीय राजनीतिक यात्रा रही जो साहस और संकल्प को परिलिक्षित करता है। राहुल ने कहा कि उनके लंबे राजनीतिक सफर के दौरान 24 जुलाई, 1991 को पेश बजट में उनकी छाप एवं प्रतिबद्धता दिखती है।

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केसीआर ने की भारत रत्न देने की मांग

केसीआर ने तेलंगाना सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशती के उपलक्ष्य पर सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने नरसिम्हा राव को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समकक्ष रखते हुए भारत रत्न प्रदान करने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए कई बार राव का जिक्र किया है। 

राव के पोते ने कांग्रेस की जयंती समारोह को बताया दिखाया

पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव के पोते तेलंगाना भाजपा के प्रवक्ता एन वी सुभाष ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी का दिवंगत नेता के नाम पर जयंती मनाना सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने राव के योगदानों की अनदेखी की है और उनका अपमान किया है। 

राव बहाना तेलंगाना निशाना

दक्षिण भारत कांग्रेस का हमेशा से मजबूत किला रहा है। लेकिन हालिया वर्षों में कांग्रेस की जड़े क्षेत्रिय क्षत्रपों के आगे कमजोर हुई है। आंध्र प्रदेश हो या तमिलनाडु या फिर तेलंगाना सभी राज्यों में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर ही हुई है।  जिस तरह से बीते दिनों  पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशती पर कार्यक्रम और फिर भारत रत्न देने की मांग की है। वहीं बीजेपी भी लगातार बढ़ चढ़कर नरसिम्हा राव के दौर में उठाए गए आर्थिक सुधार के लिए उन्हें याद करती रहती है। जिसके वर्षों तक नरसिम्हा राव से किनारा करने वाली कांग्रेस को आज डेढ़ दशक बाद दक्षिण भारत की राजनीति में अपनी खोझ जमीन पाने के लिए राव सबसे मुफीद चेहरा और शख्सियत नजर आ रहे हैं। 





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