इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक की जमानत याचिका खारिज की

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 5, 2021   07:56
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक की जमानत याचिका खारिज की

कासगंज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 25 अगस्त, 2021 को अपीलकर्ता शेरवानी और अन्य सात लोगों को हत्या के प्रयास के अपराध समेत भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था और दो साल के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 1000-1000 रुपये जुर्माना लगाया था।

प्रयागराज| इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक हसरत उल्लाह शेरवानी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कासगंज की सत्र अदालत ने शेरवानी को पुलिस हवालात में एक व्यक्ति पर हमला करने का दोषी करार दिया था।

न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम ने शेरवानी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, “आजकल विधायक और राजनीतिक लोग खुद को कानून से ऊपर मानते हैं। इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इससे कड़ाई से निपटे जाने की जरूरत है।” अपीलकर्ता शेरवानी 30 अगस्त, 2012 को इस घटना के समय विधायक थे।

न्यायालय ने कहा, “कानून के दुरुपयोग का मुद्दा विधानसभा में उठाना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन इसके बजाय उन्होंने खुद कानून को अपने हाथ में लिया और पीड़ित को हवालात में डलवाया। यह कृत्य पुलिस तंत्र का दुरुपयोग है, इसलिए उनका कृत्य सहानुभूति के लायक नहीं है, बल्कि निंदा के लायक है।”

उल्लेखनीय है कि कासगंज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 25 अगस्त, 2021 को अपीलकर्ता शेरवानी और अन्य सात लोगों को हत्या के प्रयास के अपराध समेत भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था और दो साल के कठोर कारावास की सजा के साथ ही 1000-1000 रुपये जुर्माना लगाया था। मुकदमे के मुताबिक किसी मामले में शमशाद नामक व्यक्ति को पुलिस ने हवालात में डाला था।

तीस अगस्त, 2012 को शेरवानी अपने रिश्तेदारों और समर्थकों के साथ थाने में आये और पुलिस को शमशाद की बुरी तरह से पिटाई करने के लिए कहा।

इसके बाद राइफल से लैस शेरवानी और लाठी डंडों से लैस उसके समर्थकों ने शमशाद की पिटाई की। हालांकि तत्कालीन एसएचओ राममूर्ति यादव के हस्तक्षेप से शमशाद की जान बचाई जा सकी। इस घटना के बाद शमशाद ने अपीलकर्ता एवं अन्य सात लोगों के खिलाफ 14 सितंबर, 2012 को कासगंज के ढलाना पुलिस थाने में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई।

न्यायालय ने 12 नवंबर, 2021 के अपने आदेश में कहा था कि ऐसा लगता है कि अपीलकर्ता शेरवानी के प्रभाव में आकर गवाह मुकर गए हैं।





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