केंद्र के ‘किसान मारो, पंजाब मारो’ षड्यंत्र का हिस्सा हैं कृषि विधेयक: अमरिंदर सिंह

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 18, 2020   18:32
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केंद्र के ‘किसान मारो, पंजाब मारो’ षड्यंत्र का हिस्सा हैं कृषि विधेयक: अमरिंदर सिंह
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सिंह ने कहा कि किसान विरोधी इस कदम से पंजाब का माहौल बिगड़ेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 65 सालों में भारत को खाद्य के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब के किसानों ने जो बलिदान दिया है वह सब इन विधेयकों से व्यर्थ हो जाएगा।

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को कृषि सुधार संबंधी विधेयकों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इन्हें भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार, ‘किसान मारो, पंजाब मारो’ के षड्यंत्र के तहत राष्ट्र पर थोपना चाहती है। लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के ‘किसान मेले’ की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे नहीं पता कि भाजपा और अकालियों की पंजाब से क्या दुश्मनी है और वे हमें क्यों बर्बाद करना चाहते हैं।”

सरकार की ओर से यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार मेले के उद्घाटन में सौ स्थानों से डिजिटल माध्यम से किसान, किसानों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। सिंह ने फिर चेतावनी दी कि विधेयकों से सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में आक्रोश बढ़ेगा और पाकिस्तान इसका फायदा उठा सकता है। सिंह ने कहा कि किसान विरोधी इस कदम से पंजाब का माहौल बिगड़ेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 65 सालों में भारत को खाद्य के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब के किसानों ने जो बलिदान दिया है वह सब इन विधेयकों से व्यर्थ हो जाएगा। 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मुद्दे पर अकाली “अपने राजनीतिक खेल” खेल रहे हैं। उन्होंने बादल दंपति से पूछा कि शिरोमणि अकाली दल इन विधेयकों के खिलाफ और पानी के महत्वपूर्ण मुद्दे पर पंजाब सरकार के साथ क्यों नहीं खड़ा है। उन्होंने कहा कि सतलज यमुना लिंक के मुद्दे पर पहले से ही स्थिति गंभीर है और ऐसे में शिअद ने कृषि विधेयकों का “समर्थन” कर समस्या को केवल बढ़ाया ही है।





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छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के 1324 नए मामले, 18 लोगों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:29
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छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण के 1324 नए मामले, 18 लोगों की मौत
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स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य में सोमवार को 153 लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई है, वहीं 1586 लोगों ने गृह-पृथकवास पूरा किया है ।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान 1324 नए लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है और राज्य में इस वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या 2,37,322 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी । स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य में सोमवार को 153 लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई है, वहीं 1586 लोगों ने गृह-पृथकवास पूरा किया है । राज्य में कोरोना वायरस संक्रमित 18 लोगों की मौत हुई है। विभाग के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि आज संक्रमण के 1324 मामले आए हैं। इनमें रायपुर जिले से 186, दुर्ग से 169, राजनांदगांव से 73, बालोद से 74, बेमेतरा से 26, कबीरधाम से 28, धमतरी से 33, बलौदाबाजार से 57, महासमुंद से 35, गरियाबंद से 23, बिलासपुर से 103, रायगढ़ से 104, कोरबा से 63, जांजगीर—चांपा से 118, मुंगेली से 14, गौरेला—पेंड्रा—मरवाही से चार, सरगुजा से 30, कोरिया से 21, सूरजपुर से 47, बलरामपुर से 32, जशपुर से आठ, बस्तर से 12, कोंडागांव से 19, दंतेवाड़ा से 18, सुकमा से तीन, कांकेर से 19, नारायणपुर से एक, बीजापुर से दो तथा अन्य राज्य से दो मरीज शामिल हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 2,37,322 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है जिसमें से 2,14,826 मरीज इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हुए हैं, राज्य में 19,635 मरीज उपचाराधीन हैं। राज्य में वायरस से संक्रमित 2861 लोगों की मौत हुई है। राज्य के रायपुर जिले में सबसे अधिक 46,526 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई है। जिले में कोरोना वायरस संक्रमित 656 लोगों की मौत हुई है।





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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:15
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CM अमरिंदर ने किसानों के संघर्ष को बताया न्यायपूर्ण, कहा- सरकार किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही
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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।

सुलतानपुर लोधी। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष को ‘न्यायपूर्ण’ बताते हुये केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह किसानों की आवाज क्यों नहीं सुन रही है और इस मुद्दे पर उसका हठी रवैया क्यों है। सिंह ने दोहराया कि उनकी सरकार इन ‘काले कानूनों’ के खिलाफ किसानों के साथ खड़ी रहेगी।

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मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक कस्बों सुल्तानपुर लोधी और डेरा बाबा नानक की यात्रा के दौरान अनौपचारिक तौर पर मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘ जनता की बात सुनना सरकार का काम है । अगर कई राज्यों के किसान इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि वे वास्तव में दुखी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मोदी शुरू से यही कह रहे हैं और यही वजह है कि पंजाब इसके लिए अपने विधेयक लेकर आया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह उस पर ‘बैठ’ गए हैं।





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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   08:03
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किसानों और सरकार के बीच आज होगी बात, दोपहर 3 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में चर्चा
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के नेताओं को कोविड-19 महामारी एवं सर्दी का हवाला देते हुये तीन दिसंबर की जगह मंगलवार को बातचीत के लिये आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर पिछले पांच दिनों से धरने पर हैं । केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ उनका यह धरना सोमवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। इन कानूनों के बारे में किसानों को आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा।

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तोमर ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी एवं सर्दी को ध्यान में रखते हुये हमने किसान यूनियनों के नेताओं को तीन दिसंबर की बैठक से पहले ही चर्चा के ​लिये आने का न्यौता दिया है। उन्होंने बताया कि अब यह बैठक एक दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में दोपहर बाद तीन बजे बुलायी गयी है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को हुई बैठक में शामिल सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।

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इस बीच कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने 32 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों को पत्र लिख कर एक दिसंबर को चर्चा के लिये आमंत्रित किया है। अग्रवाल ने जिन संगठनों को पत्र लिखा है उनमें क्रांतिकारी किसान यूनियन, जम्मुहारी किसान सभा, भारतीाय किसान सभा (दकुदा), कुल हिंद किसान सभा और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं। इससे पहले 13 नवंबर को हुयी बैठक बेनतीजा रही थी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को तीन दिसंबर को दूसरे दौर की बातचीत के लिये आमंत्रित किया था ताकि तीन नये कृषि कानूनों से उपजी उनकी चिंताओं का निराकरण किया जा सके।





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