अमित शाह बोले- सही अर्थों में राष्ट्रीय नेता हैं नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री शब्द को वास्तविक पहचान दी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मई 8, 2022   19:55
अमित शाह बोले- सही अर्थों में राष्ट्रीय नेता हैं नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री शब्द को वास्तविक पहचान दी

तीन दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री मोदी के विश्वासपात्र शाह ने लिखा है कि एक नेता के लिए सबसे अच्छा शिक्षक है-साधारण स्थानों की यात्रा करना, सामान्य परिवारों से मिलना, सामान्य अनुभव साझा करना और यह सब सामान्य तरीकों से करना।

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सही अर्थों में ‘‘राष्ट्रीय नेता’’ हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री शब्द को वास्तविक पहचान दी है। शाह ने यह भी कहा कि इससे पहले यह तमगा उन नेताओं को भी मिल जाता था जो कभी अपनी योग्यता साबित नहीं कर सके और जो केवल एक या दो सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र से ही चुनाव जीतने में सक्षम थे। शाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के तत्काल बाद राष्ट्रीय नेताओं की पहचान स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी के कारण क्षेत्रों में उनके नाम से थी। उन्होंने कहा कि बाद के दशकों में विशेष रूप से गठबंधन युग के समयइस अभिव्यक्ति (राष्ट्रीय नेता) का बहुत दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली मीडिया ने उदारता से अपने ‘‘दोस्तों और पसंदीदा लोगों’’ को राष्ट्रीय नेता का दर्जा वितरित किया। 

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रूपा पब्लिकेशन की 11 मई को आने वाली पुस्तक ‘मोदी@20 ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ में शाह ने मोदी के बारे में यह बात कही है जिनके नेतृत्व में 2019 के आम चुनाव में बड़े अंतर से जीत दोहराने से पहले भाजपा ने साल 2014 में अपनी सबसे बड़ी लोकसभा जीत हासिल की थी। तीन दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री मोदी के विश्वासपात्र शाह ने लिखा है कि एक नेता के लिए सबसे अच्छा शिक्षक है-साधारण स्थानों की यात्रा करना, सामान्य परिवारों से मिलना, सामान्य अनुभव साझा करना और यह सब सामान्य तरीकों से करना। शाह ने कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी ने पिछले 75 वर्षों में किसी भी राजनेता की तुलना में अधिक आवृत्ति और दृढ़ता के साथ ऐसा किया है।’’ वर्ष 1984 से 2014 तक किसी भी पार्टी के लोकसभा में बहुमत हासिल नहीं करने के मद्देनजर शाह ने कहा कि वर्ष 1952 और 1984 के बीच दलों और प्रधानमंत्रियों ने स्वतंत्रता आंदोलन की सद्भावना, पारिवारिक विरासत, सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ गुस्से (1977) , तुष्टीकरण के साथ भय और सहानुभूति के मिश्रण (1984), वर्गीय पूर्वाग्रह, वोट बैंक लामबंदी और वर्ष 1971 के गरीबी हटाओ जैसे खोखले नारे के आधार पर बहुमत हासिल किया। शाह ने लिखा कि अब हर कोई मानता है कि वर्ष 2014 का चुनाव भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे निर्णायक बदलाव था। उन्होंने कहा कि मोदी की अपील को राज्य के चुनावों में भाजपा की जीत के एक प्रमुख कारक के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव शामिल हैं। 

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शाह ने कहा “वह (मोदी) सिर्फ एक जोड़ भर नहीं हैं, या कुछ कार्यक्रमों और रैलियों के लिए एक शुभंकर नहीं हैं। वह स्थानीय राजनीति की गहरी समझ और राज्य की भाजपा इकाइयों तथा नेताओं की चिंताओं के पूरक हैं। वह अन्य दलों के उन कथित राष्ट्रीय नेताओं से बहुत अलग हैं, जो केवल आने-जाने वाले आगंतुक हैं और जिन्हें जमीनी हकीकत का कोई अंदाजा नहीं है।” पुस्तक ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा संपादित और संकलित है। यह प्रख्यात बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों द्वारा लिखित अध्यायों का संकलन है। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चुनाव विशेषज्ञ प्रदीप गुप्ता, प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधु, बैंकर उदय कोटक, अर्थशास्त्री और नीति आयोग के पूर्व प्रमुख अरविंद पनगड़िया, प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ देवी शेट्टी और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी का भी योगदान है।





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