केरल सरकार पर आरिफ मोहम्मद खान ने फिर साधा निशाना, बोले- नेतृत्व को नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी

Arif Mohammad Khan
ANI
अंकित सिंह । Nov 21, 2022 2:57PM
राज्यपाल ने कहा कि मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि देश के कानून को बरकरार रखा जाए। मेरा काम यह देखना है कि विश्वविद्यालय कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त हों। उन्होंने आगे कहा कि यह सुनिश्चित करना मेरा कर्तव्य है कि पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आधार पर नियुक्तियां नहीं होने दी जाएं।

केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और पी विजयन के नेतृत्व वाली सरकार में लगातार उठापटक का दौर देखने को मिल रहा है। दोनों एक दूसरे पर जबरदस्त तरीके से हमलावर भी हैं। विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर राज्यपाल ने पिछले दिनों केरल सरकार पर कई सवाल उठाए थे। आज एक बार फिर से उन्होंने केरल सरकार और मुख्यमंत्री पी विजयन पर निशाना साधा है। केरल के राज्यपाल ने साफ तौर पर कहा कि नेतृत्व को नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अगर कोई मुख्यमंत्री के कार्यालय में बैठा वीसी को अपने रिश्तेदारों को नियुक्त करने का निर्देश दे रहा है और अगर मुख्यमंत्री को इसके बारे में पता नहीं है, तो यह दर्शाता है कि वह कितने अक्षम हैं। 

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इसके बारे में पता है, तो वे भी उतने ही दोषी हैं। इसके आगदे उन्होंने कहा कि मैंने बार-बार कहा है कि मैं व्यक्तिगत स्वार्थ की तलाश में नहीं हूं। किसी से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि देश के कानून को बरकरार रखा जाए। मेरा काम यह देखना है कि विश्वविद्यालय कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त हों। उन्होंने आगे कहा कि यह सुनिश्चित करना मेरा कर्तव्य है कि पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आधार पर नियुक्तियां नहीं होने दी जाएं। इसके साथ ही राज्यपाल ने यह भी कह दिया कि जब तक मैं यहां हूं, मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा। केवल वही लोग नियुक्त किए जाएंगे जो योग्य हैं और यूजीसी की सभी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। 

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आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि 1956 में केरल के अस्तित्व में आने से पहले भी राज्यपाल विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति थे। यह एक ऐसी चीज है जिस पर एक राष्ट्रीय सहमति बनी और एक राष्ट्रीय परिपाटी विकसित हुई। क्यों? ताकि विश्वविद्यालयों में कोई कार्यकारी हस्तक्षेप न हो और उनकी स्वायत्तता सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि वे एक राष्ट्रीय परिपाटी या राष्ट्रीय सर्वसम्मति को नहीं तोड़ सकते। यह उनकी शक्तियों से परे है। उन्हें कोशिश करने दें। वहीं, केरल की वाम सरकार का दावा है कि राज्यपाल को विधानसभा द्वारा एक कानून के माध्यम से कुलाधिपति का पद दिया गया था और इसलिए इसे वापस लिया जा सकता है। 

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