निगमबोध दाह संस्कार घाट के दो कर्मचारियों को अब नहीं लगता कोरोना से डर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 24, 2020   18:03
निगमबोध दाह संस्कार घाट के दो कर्मचारियों को अब नहीं लगता कोरोना से डर

निगमबोध घाट के कर्मचारी मनोज कुमार ने कहा कि भय उनकी इस नौकरी का हिस्सा नहीं है और कोरोना वायरस के समय में दाह संस्कार हमेशा की तरह ही एक काम है।

नयी दिल्ली। ऐसे समय जब कोरोना वायरस का डर जगह-जगह फैला हुआ है, उत्तरी दिल्ली में निगमबोध दाह संस्कार घाट के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें इस बीमारी से भय नहीं लगता। निगमबोध घाट के कर्मचारी हरिन्दर प्रसाद (55) का कहना है कि कोरोना वायरस मरीजों के सफेद थैलों में आने वाले शवों के साथ ही उनका डर भी दूर हो गया है। उनके सहकर्मी मनोज कुमार भी अब इसके अभ्यस्त हो गए हैं और उन्हें कोरोना वायरस का डर नहीं रहा। लेकिन एक अन्य कर्मचारी पप्पू के भीतर अब भी डर है लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि उनके काम पर इस डर का असर नहीं हो। यह घाट उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत आता है और कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में संभवत: सबसे व्यस्त श्मशान घाट बन गया है। इस बीमारी के कारण दिल्ली में 2,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बवाना निवासी प्रसाद सीएनजी आधारित शवदाह गृह में एक के बाद एक कई शवों को जलते देखा है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना वायरस से संक्रमित टीएमसी विधायक तमोनाश घोष का निधन 

उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि आम लोगों के साथ श्मशान घाट के कर्मचारी भी बहुत भयभीत होते हैं जब वे कोविड-19 मरीजों के शव देखते हैं। लेकिन मैं अभ्यस्त हो गया हूं। प्रसाद ने कहा कि शवों को देखकर अब डर नहीं लगता। कुमार ने भी कहा कि भय उनकी इस नौकरी का हिस्सा नहीं है और कोरोना वायरस के समय में दाह संस्कार हमेशा की तरह ही एक काम है। लेकिन 39 वर्षीय पप्पू का कहना है कि शुरू में इससे जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण बहुत डर था। अब, हम इंसानों ने किसी तरह वायरस के साथ रहना सीख लिया है, लेकिन मेरे अंदर अब भी डर है। दस साल से अधिक समय से निगमबोध घाट पर काम कर रहे पप्पू के घर में उनकी मां, पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं और उनका कहना है कि वह हर महीने 8,700 रुपये कमाते हैं। आईटीओ स्थित जदीद कब्रिस्तान अहले इस्लाम में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। यहां बीमारी से मरने वाले मुसलमानों को दफनाया जाता है। कब्रिस्तान के प्रभारी कार्यवाहक मोहम्मद शमीम ने कहा कि कोरोना वायरस से प्रभावित 400 से अधिक लोगों के शव मार्च से अब तक यहां दफनाए गए हैं। उनका घर पास में ही है और वह अपने परिवार के सदस्यों - पत्नी और चार लड़कियों से दूरी बनाए रखने की कोशिश करते हैं।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।