दिल्ली का हुआ बुरा हाल! कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़कर 417 पहुंची, 2.45 लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 28, 2020   12:04
दिल्ली का हुआ बुरा हाल! कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़कर 417 पहुंची,  2.45 लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग

अधिकारी ने कहा कि पुन: मूल्यांकन से पहले राजधानी में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या 280 थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने दिल्ली में घर-घर जाकर सर्वेक्षण में करीब दो लाख लोगों की कोविड-19 संबंधी स्क्रीनिंग की है।

नयी दिल्ली। दिल्ली में कोविड-19 के निषिद्ध क्षेत्रों का पुन: आकलन करने के बाद ऐसे क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 417 हो गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 को फैलने से रोकने की बड़ी कवायद के तहत अब तक करीब 2.45 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि केंद्र के निर्देशों के बाद निषिद्ध क्षेत्रों को लेकर समीक्षा की जा रही है। कुछ जिलों में समीक्षा का काम अभी पूरा नहीं हुआ है तथा ऐसे क्षेत्रों की संख्या और बढ़ सकती है।

इसे भी पढ़ें: 65 साल बाद एक बार फिर दिल्ली पहुंचा टिड्डी दल, रास्ते में कई जिलों में फसलें बर्बाद कीं 

अधिकारी ने कहा कि पुन: मूल्यांकन से पहले राजधानी में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या 280 थी। उन्होंने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘हमने दिल्ली में घर-घर जाकर सर्वेक्षण में करीब दो लाख लोगों की कोविड-19 संबंधी स्क्रीनिंग की है। निषिद्ध क्षेत्रों में भी 45 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है।’’ प्रत्येक घर में स्क्रीनिंग की प्रक्रिया छह जुलाई तक पूरी की जानी है।

इसे भी पढ़ें: बिस्तरों की कमी के कारण जून के पहले सप्ताह में दिल्ली में मृतकों की संख्या बढ़ने लगी: केजरीवाल

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में 34.35 लाख घर हैं जिनमें 33.56 लाख शहरी क्षेत्रों में और 79,574 ग्रामीण इलाकों में हैं। दिल्ली सरकार द्वारा जारी कोविड-19 कार्रवाई योजना के अनुसार निषिद्ध क्षेत्रों के पुन: आकलन का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।