हरित मिशन को दिया वैज्ञानिक धार, सुंदरलाल बहुगुणा के जंगल और जमीन की लड़ाई में बीएचयू ने जोड़ा जल

हरित मिशन को दिया वैज्ञानिक धार, सुंदरलाल बहुगुणा के जंगल और जमीन की लड़ाई में बीएचयू ने जोड़ा जल

इसके बाद उनके अभियान में जंगल और जमीन के साथ जल भी जुड़ गया और वह जल था मां गंगा का। दरअसल, भारत में पहली बार गंगा प्रदूषण पर जब बीएचयू के पर्यावरणविद प्रो. बी डी त्रिपाठी ने शोध किया तो मुद्दा संसद भवन तक पहुंच गया। अखबार में खबर पढ़कर उत्तराखंड से बहुगुणा जी ने प्रो. त्रिपाठी को फोन किया और गंगा प्रदूषण को खत्म करने के अभियान में साथ काम करने की इच्छा जताई।

सुंदरलाल बहुगुणा हर पांच छह माह के अंतराल पर वह बीएचयू आते थे और पर्यावरण से संबंधित कई कार्यक्रम होते थे। टिहरी डैम के बनने से लेकर गंगा को अविरल बनाए रखने में उन्होंने बीएचयू का बखूबी साथ निभाया। यूँ तो 1973 में चिपको आंदोलन के बाद सुंदरलाल बहुगुणा पर्यावरण के सबसे बड़े अग्रदूत बनकर उभरे थे, मगर उनके हरित आदोलनों को वैज्ञानिक धार तब मिली जब वह बीएचयू से वर्ष 1981 में जुड़े।

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इसके बाद उनके अभियान में जंगल और जमीन के साथ जल भी जुड़ गया और वह जल था मां गंगा का। दरअसल, भारत में पहली बार गंगा प्रदूषण पर जब बीएचयू के पर्यावरणविद प्रो. बी डी त्रिपाठी ने शोध किया तो मुद्दा संसद भवन तक पहुंच गया। अखबार में खबर पढ़कर उत्तराखंड से बहुगुणा जी ने प्रो. त्रिपाठी को फोन किया और गंगा प्रदूषण को खत्म करने के अभियान में साथ काम करने की इच्छा जताई।

बीएचयू ने दी थी बेहतर आक्सीजन देने वाले पौधों को अभियान में शामिल करने की सलाह

प्रो. त्रिपाठी कहते हैं कि बीएचयू में आने के बाद उनके वृक्षारोपण अभियान में वैज्ञानिकता आ गई। उन्होंने यहां पर जाना कि किसी जगह की मिट्टी और जलवायु के अनुसार कौन से पौधे तेजी से उगते हैं। स्थानीयता के साथ ही जो पेड़ पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन प्रदान करने के अलावा प्रदूषण भी कम करते हो ऐसे पौधे लगाने की तरकीब दी गई। जैसे कि चौड़े पत्ते वाले वृक्षों की प्रजातियां बरगद, पीपल आदि। इसके बाद बहुगुणा जी ने अपने अभियान के दौरान इन बातों को उत्तराखंड की जमीन पर उतारा और काफी बेहतर परिणाम देखने को मिले। यहीं से उन्होंने बीएचयू को अपना वैज्ञानिक सलाहकार मान लिया। सुंदरलाल हर पांच छह माह के अंतराल पर वह बीएचयू आते थे और पर्यावरण से संबंधित कई कार्यक्रम होते थे। टिहरी डैम के बनने से लेकर गंगा को अविरल बनाए रखने में उन्होंने बीएचयू का बखूबी साथ निभाया।





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