भूपेश बघेल ने PM मोदी को लिखा पत्र, वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन की मांग

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 4 2019 3:55PM
भूपेश बघेल ने PM मोदी को लिखा पत्र, वन संरक्षण अधिनियम में संशोधन की मांग
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बघेल ने कहा कि राज्य के 10 आकांक्षी जिलों में से नौ जिलों के अधिकांश भागों में वन है। वन क्षेत्रों के निवासियों के जीवन में खुशहाली लाना राज्य सरकार का नैतिक दायित्व है, लेकिन इसके लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग अत्यन्त आवश्यक है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के वन क्षेत्रों में विकास के कार्यों के लिए वन संरक्षण अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। बघेल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य के कुल भू-भाग का 44 प्रतिशत भाग वनों से आच्छादित है। छत्तीसगढ़ को  हरित प्रदेश  अथवा सम्पूर्ण देश को शुद्ध वायु आपूर्ति करने वाला राज्य होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन वनों के आधिक्य के कारण वन क्षेत्रों के निवासियों का जीवन अत्यन्त कठिन है। पत्र में कहा गया है कि कृषि, व्यापार, उद्योग, सेवा क्षेत्र, संचार एवं परिवहन गतिविधियों का प्रसार  वन अधिनियम एवं वन संरक्षण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के कारण अत्यन्त सीमित है। इन कठिनाइयों के कारण ही वन क्षेत्रों के निवासियों की आय में वृद्धि, गरीबी में कमी और जीवन स्तर में वृद्धि एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बन चुका है। 

 
बघेल ने कहा कि राज्य के 10 आकांक्षी जिलों में से नौ जिलों के अधिकांश भागों में वन है। वन क्षेत्रों के निवासियों के जीवन में खुशहाली लाना राज्य सरकार का नैतिक दायित्व है, लेकिन इसके लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियों के जीवन स्तर में वृद्धि के लिए लघु वनोपज प्रसंस्करण, कृषि प्रसंस्करण और खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित सूक्ष्म तथा लघु औद्योगिक इकाइयों, जिनसे किसी प्रकार का प्रदूषण न होता हो, की स्थापना के लिए वन संरक्षण अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर इन्हें वानिकी गतिविधियों में शामिल किया जाए जिससे इन उद्योगों की बड़ी संख्या में स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सके।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि वन क्षेत्रों के निवासियों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत कठिन है। बिना ऊर्जा के किसी भी समुदाय की आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इस समस्या के निराकरण के लिए यह आवश्यक है कि वन क्षेत्रों में एक से पांच मेगावाट क्षमता की सौर संयंत्र परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुमति प्रदान की जाए।



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