1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट में बड़ी कामयाबी, अहमदाबाद से चार आरोपियों को किया गया गिरफ़्तार

mumbai blast accuse
ANI
अंकित सिंह । May 17, 2022 2:35PM
गुजरात एटीएस के डीआईजी दीपक भद्रन ने बताया कि जांच में पता चला कि ये चारों आरोपी 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले के वांछित अपराधी है। इन्होंने दाऊद इब्राहिम के साथ एक मीटिंग में भाग लिया था।

गुजरात एटीएस को बड़ी कामयाबी मिली है। दरअसल, गुजरात एटीएस ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन चारों आरोपियों की गिरफ्तारी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से हुई है। दावा किया जा रहा है कि मुंबई ब्लास्ट के बाद यह सभी आरोपी विदेश भागने में कामयाब रहे थे और फिलहाल फर्जी पासपोर्ट के जरिए अहमदाबाद पहुंचे थे। जिन लोगों की गिरफ्तारी की गई है उनके नाम अबू बकर, युसूफ भटाका, शोएब बाबा और सैयद कुरेशी है। गुजरात एटीएस के डीआईजी दीपक भद्रन ने बताया कि जांच में पता चला कि ये चारों आरोपी 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले के वांछित अपराधी है। इन्होंने दाऊद इब्राहिम के साथ एक मीटिंग में भाग लिया था।

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दीपक भद्रन ने आगे कहा कि दाऊद इब्राहिम के कहने पर ये पाकिस्तान गए थे और इन्हें ISI के द्वारा विस्फोट करने की ट्रेनिंग दी गई थी। एटीएस को इस बात की सूचना मिली थी कि कुछ संदेह जनक लोग अहमदाबाद शहर के अंदर छुपे हुए हैं। गुजरात एटीएस की टीम ने इन लोगों को पकड़ा और लगातार पूछताछ की। इनके पास से फर्जी पासपोर्ट मिले हैं। यह चारों 1993 मुंबई ब्लास्ट के वांछित अपराधी है। मुंबई में 12 मार्च को जो सीरियल ब्लास्ट हुए थे उसमें यह सभी शामिल थे। आपको बता दें कि मुंबई में 12 मार्च 1993 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जबकि 800 लोग घायल हुए हैं। 

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वहीं, उच्च न्यायालय ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में अपनी भूमिका के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे प्रत्यर्पित ‘गैंगस्टर’ अबू सलेम को वह याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी जिसमें उसने भारत में अपनी हिरासत को गैर-कानूनी करार देने का अनुरोध किया था। सलेम ने खुद को पुर्तगाल प्रत्यर्पित करने की भी मांग की थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने आदेश दिया कि सलेम की संबंधित याचिका खारिज की जाती है। सलेम के वकील ने कहा कि यही मामला अब उच्चतम न्यायालय में लंबित है, इसलिए इसे उच्च न्यायालय से वापस लिये जाने की अनुमति दी जाये।

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