बिहार की रजिया सुल्तान ने रचा इतिहास, मुस्लिम समुदाय से डीएसपी बनने वाली पहली महिला बनीं

बिहार की रजिया सुल्तान ने रचा इतिहास, मुस्लिम समुदाय से डीएसपी बनने वाली पहली महिला बनीं

बिहार में एक 27 वर्षीय मुस्लिम लड़की ने 64वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद बिहार पुलिस बल में डीएसपी बनने वाली मुस्लिम समुदाय की पहली महिला बनकर इतिहास रच दिया है।

भारत में महिलाओं की स्थिति जमीनी स्तर पर चाहे जैसी हो लेकिन अगर एक औरत कुछ करने की ठान ले तो उसे वो काम पूरा करने से भगवान भी नहीं रोक पाता है। हम सभी जानते हैं कि कुछ जॉब ऐसी है जहां महिलाओं को काम करने में काफी मुश्किलें होती है इनमें से ही एक है पुलिस डिपार्टमेंट की जॉब। सरकार की तरफ से महिलाओं को बराबरी का दर्जा देकर हर जहग उन्हें काम करने का अधिकार दे दिया गया है लेकिन  डिपार्टमेंन में काम करके अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी है। आज हम आपकों एक ऐसी सच्ची खबर बताने जा रहे हैं जो महिलाओं के हौसलों को बुलंद करने में काफी मदद करेगी।

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मुस्लिम लड़की बिहार पुलिस में डीएसपी बनने वाली समुदाय की पहली महिला

बिहार में एक 27 वर्षीय मुस्लिम लड़की ने 64वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद बिहार पुलिस बल में डीएसपी बनने वाली मुस्लिम समुदाय की पहली महिला बनकर इतिहास रच दिया है। रजिया सुल्तान उन 40 उम्मीदवारों में से एक हैं जिनका चयन बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ है। बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ की रहने वाली रजिया सुल्तान वर्तमान में बिहार सरकार के बिजली विभाग में सहायक अभियंता के पद पर तैनात हैं।

 

 रजिया सुल्तान बनीं महिलाओं के लिए मिसाल

रजिया बिहार के गोपालगंज की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा झारखंड के बोकारो से पूरी की क्योंकि उनके पिता मोहम्मद असलम अंसारी बोकारो स्टील प्लांट में स्टेनोग्राफर के पद पर तैनात थे। 2016 में उनका निधन हो गया। उनकी मां अभी भी बोकारो में रहती हैं। रजिया एक भाई और छह बहनों सहित सात भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उसकी सभी बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है जबकि भाई एमबीए करने के बाद उत्तर प्रदेश के झांसी में एक निजी कंपनी में कार्यरत है। रजिया बोकारो से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद जोधपुर चली गईं, जहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया।

मुस्लिम महिलाओं के विकास के लिए काम करना चाहती है रजिया सुल्तान

इंडिया टुडे टीवी  के साथ उन्होंने बातचीत की और बात करते हुए रजिया ने कहा कि वह बचपन से ही लोक सेवा आयोग की परीक्षा देना चाहती थीं। डीएसपी के लिए चयनित होना एक सपने के सच होने जैसा था। वह 2017 में बिहार सरकार के बिजली विभाग में सहायक अभियंता के रूप में शामिल होने के बाद से बीपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

रजिया बचपन से ही पुलिस बनना चाहती थी

रजिया सुल्तान ने कहा "मैं एक पुलिस अधिकारी के रूप में सेवा करने के लिए बहुत उत्साहित हूं। कई बार लोगों को न्याय नहीं मिलता है, खासकर महिलाओं को। महिलाएं पुलिस को उनके खिलाफ अपराध की किसी भी घटना की रिपोर्ट करने से कतराती हैं। मैं इस तरह के मामलों को सुनिश्चित करने की कोशिश करूंगा। उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय में लड़कियों की शिक्षा की कमी पर भी चिंता व्यक्त की और माता-पिता से अपने सपनों को पूरा करने के लिए बच्चे का समर्थन करने की अपील की।

 

हिजाब या बुर्का पहनने को लेकर रजिया की राय

रजिया सुल्तान ने भी हिजाब या बुर्का पहनने वाली लड़कियों का समर्थन किया और कहा कि यह उन लड़कियों के लिए बाधक नहीं हो सकती जो स्कूल या कॉलेज जाना चाहती हैं। रजिया सुल्तान ने कहा, "बुर्का या हिजाब पहनना कोई प्रतिबंध नहीं है। अगर हम सोचते हैं कि हम कोई भी काम कर सकते हैं तो अल्लाह हमें हर तरह की बाधाओं को दूर करने की शक्ति देता है।" रजिया, जो हाल ही में कोविड -19 से उबरी हैं, ने मुस्लिम समुदाय से टीकाकरण के बारे में अफवाहों और गलतफहमी को दूर करने और जान बचाने के लिए जाब करने की अपील की है।





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