HC ने अर्णब गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकियों को किया निलंबित

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जून 30, 2020   17:48
HC ने अर्णब गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकियों को किया निलंबित

न्यायमूर्ति उज्जल भूयां और न्यायमूर्ति रियाज चागला की एक खंड पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि पहली नजर में गोस्वामी के खिलाफ किसी अपराध का खुलासा नहीं किया गया है तथा उनका इरादा समाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने या हिंसा भड़काने का नहीं था।

मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी के खिलाफ दायर दो प्राथमिकियों को निलंबित कर दिया। पालघर में पीट-पीटकर की गयी संतों की हत्या के मामले और लॉकडाउन के बीच बांद्रा रेलवे स्टेशन के बाहर प्रवासी श्रमिकों की भीड़ जमा होने के संबंध में कथित उकसावे और भड़काऊ टिप्पणियों के लिए उनके खिलाफ ये प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी थीं। न्यायमूर्ति उज्जल भूयां और न्यायमूर्ति रियाज चागला की एक खंड पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि पहली नजर में गोस्वामी के खिलाफ किसी अपराध का खुलासा नहीं किया गया है तथा उनका इरादा समाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने या हिंसा भड़काने का नहीं था। 

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गोस्वामी की याचिका विचारार्थ स्वीकार करते हुए अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि अंतिम सुनवाई होने और याचिका के निपटारे तक उनके साथ कोई दंडात्मक कोई कार्रवाई न करे। गोस्वामी ने उनके विरूद्ध दर्ज दो प्राथमिकियां खारिज करने का अनुरोध किया था। उनके विरूद्ध एक प्राथमिकी नागपुर में और दूसरी प्राथमिकी मुम्बई में दर्ज की गयी है। नागपुर मामले का संबंध खबरिया चैनल रिपब्लिक टीवी पर प्रसारित एक शो से है जहां गोस्वामी ने पालघर में दो संतों की पीट-पीटकर की गयी हत्या से जुड़े मामले में कथित रूप से सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। मुम्बई का मामला तब दर्ज किया गया था जब इसी चैनल पर इस चैनल पर प्रसारित एक कार्यक्रम में गोस्वामी ने बांद्रा रेलवे स्टेशन के बाहर प्रवासी श्रमिकों की भीड़ जमा होने के संबंध में कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी की थी। 

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गोस्वामी के वकील हरीश साल्वे ने दलील दी कि कांग्रेस ने देशभर में गोस्वामी के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज करवायीं और कहा कि ऐसे मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं आपराधिक कानून के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और राजा ठाकरे ने याचिका का विरोध किया और कहा कि पत्रकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक तो है लेकिन उन्हें ये घोषित करने का अधिकार नहीं है कि एक व्यक्ति की केवल इसलिए हत्या की गयी क्योंकि वह खास धर्म का था।





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