चिकबल्लापुर क्षेत्र में जाति की अहम भूमिका नहीं होगी: वीरप्पा मोइली

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Apr 15 2019 5:45PM
चिकबल्लापुर क्षेत्र में जाति की अहम भूमिका नहीं होगी: वीरप्पा मोइली
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प्रदेश की राजधानी बेंगलुरु से करीब 60 किलोमीटर दूर चिकबल्लापुर में वोक्कालिगा समुदाय का दबदबा है जिनकी तादाद करीब चार लाख हैं। इस सीट से तीसरी बार अपनी जीत के लिये दांव लगा रहे मोइली ने कहा कि 1984 से 1991 तक वी कृष्णा राव की हैट-ट्रिक इस बात का अच्छा संकेतक है कि वोक्कालिगा समुदाय के दबदबे वाले इस संसदीय क्षेत्र में जातिगत राजनीति की कोई भूमिका नहीं होती।

डोड्डाबल्लापुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने सोमवार को कहा कि वोक्कालिगा बाहुल्य चिकबल्लापुर संसदीय क्षेत्र में जाति की अहम भूमिका नहीं होगी। वह एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जो 1977 से कांग्रेस का गढ़ रही है। उन्होंने डोड्डाबल्लापुर नगर में अपने चुनाव अभियान के तीसरे दौर के दौरान कहा, “यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ है। हम 1977 में इसके गठन के बाद सिर्फ एक बार हारे हैं। हम 1996 के लोकसभा चुनाव में आर एल जालप्पा से हार गए थे। उन्होंने तब जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसलिये जाति कारक की यहां कोई भूमिका नहीं होगी।”

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प्रदेश की राजधानी बेंगलुरु से करीब 60 किलोमीटर दूर चिकबल्लापुर में वोक्कालिगा समुदाय का दबदबा है जिनकी तादाद करीब चार लाख हैं। इस सीट से तीसरी बार अपनी जीत के लिये दांव लगा रहे मोइली ने कहा कि 1984 से 1991 तक वी कृष्णा राव की हैट-ट्रिक इस बात का अच्छा संकेतक है कि वोक्कालिगा समुदाय के दबदबे वाले इस संसदीय क्षेत्र में जातिगत राजनीति की कोई भूमिका नहीं होती।

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भाजपा को हालांकि लगता है कि कांग्रेस और जद(एस) के बीच हुए गठजोड़ को लेकर नाखुशी के चलते वोक्कालिगा “वोटबैंक” का एक बड़ा हिस्सा पार्टी की तरफ आएगा। भाजपा के कर्नाटक प्रभारी मुरलीधर राव ने कहा कि जद(एस) के वोक्कालिगा मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद चिकबल्लापुर इलाके समेत ओल्ड मैसूरू क्षेत्र में भाजपा की तरफ आएगी। मोइली (79) ने कहा कि क्षेत्र “धर्मनिरपेक्ष” है और सांप्रदायिक बलों को बर्दाश्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने काफी काम किया जिससे राज्य के लोगों को उनकी जाति से इतर फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें वोट मिलेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने सभी के साथ समान व्यवहार किया। मैंने साझा प्रवेश परीक्षा शुरू की जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों को मेडिकल सीटें दी गईं भले ही उनकी जाति जो कुछ भी हो। मैंने क्षेत्र में पानी और सिंचाई परियोजनाएं शुरू कीं। मैंने जो अच्छे काम किये, मेरा मानना है कि लोग उसे याद रखेंगे।”

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