किसान परिवार से आने वाले भूपेश बघेल ने बनाई है खुद की पहचान तो सरगुजा रियासत के 118वें राजा हैं टीएस सिंह देव

Bhupesh Baghel and Ts singh deo
भूपेश बघेल ने यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की थी। उनके पिता का राजनीति से कोई भी वास्ता नहीं था, उन्होंने अपने दम पर ही मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जारी अंतर्कलह बाकी के राज्यों की तरह उजागर हो गई है। लेकिन हम बात विवादों की नहीं नेताओं की करने वाले हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव की बदौलत ही प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनी है। लेकिन विवादों को अगर जल्द ही नहीं सुलझाया गया तो हालात मध्य प्रदेश की तरह हो सकते हैं। 

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कौन हैं भूपेश बघेल ?

23 अगस्त, 1961 को जन्में भूपेश बघेल ने यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की थी। उनके पिता का राजनीति से कोई भी वास्ता नहीं था, उन्होंने अपने दम पर ही मुख्यमंत्री पद तक का सफर तय किया है। संपन्न किसान परिवार से आने वाले भूपेश बघेल अविभाजित मध्य प्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार में मंत्री रहे हैं और फिर बाद में छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी की सरकार में भी मंत्रिपद की जिम्मेदारी संभाली हैं।

किसानों के परिश्रम से वाकिफ भूपेश बघेल तीव्र बुद्धि वाले और परिश्रमी व्यक्ति हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई है।

भूपेश बघेल ने पाटन विधानसभा क्षेत्र से पांच बार चुनाव जीता। हालांकि साल 2008 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फिर भी उनका हौसला कमजोर नहीं हुआ और रमन सिंह सरकार में मजबूत विपक्ष के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसी दौरान वो ओबीसी का प्रमुख चेहरा बने। 

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आपको बता दें कि भूपेश बघेल ओबीसी में आने वाली कुर्मी जाति से आते हैं, जिसका हिन्दी भाषी राज्यों में खासा दबदबा है। साल 2013 में जब प्रदेश कांग्रेस के मुख्य नेता मारे गए थे तब उन्होंने पार्टी को मजबूत करने का जिम्मा उठाया था। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रमन सिंह सरकार को सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए मतदाताओं का विश्वास जीता। हालांकि जीत का श्रेय भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव को ही जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए भूपेश बघेल ने बाजी मार ली थी।

महाराजा टीएस सिंह देव को कितना जानते हैं आप ?

हाल ही में सुर्खियां बटोरने वाले टीएस सिंह देव का पूरा नाम त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह है। जिन्हें ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले के तहत प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है। टीएस बाबा के नाम से प्रसिद्ध टीएस सिंह देव की एक कहानी तो सभी ने सुनी ही होगी। अगर आपने ने नहीं सुनी तो हम आपको पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी हुई एक बात बता देते हैं।

टीएस सिंह देव कट्टर कांग्रेसी नेता हैं। पुरखों के जमाने से कांग्रेस के प्रति वफादारी निभाने वाले टीएस सिंह देव अविभाजित मध्य प्रदेश की सरगुजा रियासत के 118वें राजा हैं। लेकिन राजपरिवार के होने के बावजूद उनकी लोगों के बीच में अच्छी पकड़ है। 

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जब नेहरू के साथ किया था डिनर

हम जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा किस्सा बता रहे थे आपको। दरअसल, जवाहरलाल नेहरू ने सरगुजा रियासत के महाराज रामानुज शरण सिंहदेव को इलाहाबाद में डिनर के लिए बुलाया था लेकिन उनके साथ उनके पोते टीएस सिंह देव नहीं पहुंचे थे। तब उन्होंने उनके बारे में पूछा तो पता चला कि वो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। उसी वक्त नेहरू ने उन्हें बुलाने को कहा और फिर उनके साथ मिलकर डिनर किया था।

भले ही भूपेश बघेल ओबीसी की चेहरा हों लेकिन ऊंची जाति के बीच में पार्टी का चेहरा टीएस सिंह देव ही हैं और इन्हीं दोनों नेताओं के दम पर ही प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में लौटी है।

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