चिदंबरम ने रिजर्व बैंक से टकराव को लेकर मोदी सरकार पर साधा निशाना

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 21, 2018   18:09
चिदंबरम ने रिजर्व बैंक से टकराव को लेकर मोदी सरकार पर साधा निशाना

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब घरेलू बचत, औद्योगिक कर्ज, निर्यात वृद्धि तथा रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा रोजगार सृजन जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों में नरमी है, तब उच्च वृद्धि दर के आंकड़े समझ से परे है।

हैदराबाद। पूर्व कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रिजर्व बैंक और सरकार के बीच संबंधों में कथित टकराव को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने बुधवार को कहा कि पिछली संप्रग सरकार के समय वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर मिल जुल कर चलते थे। उन्होंने इस सरकार के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ऊंचे आंकड़ों पर भी सवाल उठाये। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब घरेलू बचत, औद्योगिक कर्ज, निर्यात वृद्धि तथा रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा रोजगार सृजन जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों में नरमी है, तब उच्च वृद्धि दर के आंकड़े समझ से परे है।

चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘...सामान्य रूप से वित्त मंत्री और गवर्नर हर सप्ताह बात करते हैं, प्रत्येक महीने मुलाकात करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक की बैठकों तथा कई अन्य मौकों पर मिलकर काम करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पर राजग सरकार में वे साथ मिलकर काम नहीं कर रहे। राजग सरकार और पूर्व संप्रग सरकार में यही अंतर है। हमेशा से सरकार की अपनी सोच रही है तथा आरबीआई के अपने विचार रहे हैं।’’

चिदंबरम ने कहा कि कभी भी ऐसी स्थिति नहीं आयी जब आरबीआई कानून की धारा 7 लगाने की धमकी दी गयी हो या केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल की बैठक नौ घंटे तक चली हो। उल्लेखनीय है कि अधिशेष भंडार साझा करने समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार के केंद्रीय बैंक के कामकाज में कथित हस्तक्षेप के बीच आरबीआई के निदेशक मंडल की सोमवार को नौ घंटे बैठक चली। ऐसी खबरें हैं कि सरकार ने अपनी इच्छानुसार चीजों को क्रियान्वित करने के लिये आरबीआई कानून के उस उपबंध का उपयोग किया जिसका अबतक उपयोग नहीं किया गया था। 

रिजर्व बैंक कानून, 1934 की धारा 7 के तहत सरकार केंद्रीय बैंक को जनहित में कुछ काम करने को लेकर निर्देश जारी कर सकती है।चिदंबरम ने सरकार पर जीडीपी आंकड़ों के आकलन में ‘हस्तक्षेप’ करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब घरेलू बचत, औद्योगिक कर्ज, निर्यात वृद्धि तथा रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा रोजगार सृजन जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों में नरमी है, तब उच्च वृद्धि दर के आंकड़े समझ से परे है।





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