मुख्यमंत्री को दिख रहा सिर्फ आपदा में अवसर, मध्य प्रदेश में हो रही यूरिया की कालाबाजारी

मुख्यमंत्री को दिख रहा सिर्फ आपदा में अवसर, मध्य प्रदेश में हो रही यूरिया की कालाबाजारी

मुख्यमंत्री सिर्फ बातें ही करते है, और बातें हैं, बातों का क्या....माफियाओं को सिर्फ चेतावनी व कोरी धमकियां कार्यवाही के नाम पर ढाक के तीन पात। जमीनी हकीकत यह है कि कालाबाजारी व मिलावट खोरी रोकने के कोई इंतजाम नहीं है। किसान परेशान होकर सड़कों पर उतर रहा है।

भोपाल। मध्य प्रदेश में उप चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार किसानों का मुद्दा उठा रही है। जहां एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सोयाबीन की चौपट हो रही फसल को लेकर शिवराज सरकार को घेरने में लगे है। तो दूसरी ओर बिजली, यूरिया खाद की कालाबाजारी और सोयाबीन की बर्बाद हुई फसल के मुआबजे को लेकर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भाजपा की शिवराज सरकार को घेरने की कोशिश की। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेट में प्रेसवर्ता के दौरान पीसी शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार का किसान विरोधी चेहरा किसी से छुपा नहीं है। जो हर रोज एक नए रूप में सामने आ रहा है। जिस दिन से राज्य में पिछले दरबाजे से भाजपा की सरकार सत्ता पर काबिज हुईं है, प्रदेश का किसान उसी दिन से परेशान हो रहा है। कमलनाथ सरकार द्वारा किसानों की ऋणमाफी को कृषि मंत्री कमल पटेल कलंक बता रहे हैं। किसान पुत्र होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री को सिर्फ आपदा में अवसर दिख रहा है। प्रदेश के अन्नदाता किसान की किसी को फिक्र नहीं है। आज प्रदेश में यूरिया का संकट विकराल बन चुका है। प्रदेश के कई जिलों में किसानो को यूरिया के लिये भटकना पड़ रहा है। यूरिया की कालाबाजारी जमकर जारी है। किसानो को महँगे दामों पर यूरिया खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। खाद के लिये लाइनों में लगा किसान पुलिस की लाठियाँ भी खा रहा है।

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किसान इस महामारी में लंबी-लंबी लाइन लगाकर एक-एक बोरी खाद के लिये भटक रहा है, वही दूसरी और किसानो को मिलने वाली खाद को भूमिहीनो व मृतकों के नाम पर फर्जी तरीके से आवंटित कर लाखों क्विंटल खाद को भाजपा समर्थित व्यापारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर ठिकाने लगाया जा रहा है। इसके प्रमाण भी प्रदेश के कई हिस्सों से सामने आ चुके है। प्रदेश में यूरिया की जमकर कालाबाजारी हो रही है, प्रदेश में अमानक खाद की बिक्री भी चरम पर है। किसान एक-एक बोरी खाद के लिये परेशान हो रहा है।मुख्यमंत्री सिर्फ बातें ही करते है, और बातें हैं, बातों का क्या....माफियाओं को सिर्फ चेतावनी व कोरी धमकियां कार्यवाही के नाम पर ढाक के तीन पात। जमीनी हकीकत यह है कि कालाबाजारी व मिलावट खोरी रोकने के कोई इंतजाम नहीं है। किसान परेशान होकर सड़कों पर उतर रहा है।

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पीसी शर्मा ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री जी को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार द्वारा प्रदेश के 26 लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ किया गया है, जिसके प्रमाण के रूप में माननीय कमलनाथ जी ने पैनड्राइव के रूप में मीडिया को उपलब्ध करवाई है। जिसमें किसानों के नाम, पते, मोबाइल नंबर, अकाउंट नंबर और कितना कर्जा माफ हुआ है, उसकी राशि दर्ज है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान जी ने सोयाबीन की फसल बर्बाद होने पर 40 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर देने का किसानों से वादा किया था। जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी आपसे मांग करती है, कि उसे आप पूरा करें। आज किसान खून के आंसू रोने को मजबूर है। अगर प्रदेश का अन्नदाता किसान मरने को मजबूर होगा और किसानों के हितों की रक्षा नहीं होगी तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर आएगी। 

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बेहताशा बढ़े हुए बिजली के बिलों से किसान के साथ शहरी उपभोक्ता भी परेशान है। कांग्रेस पार्टी आरोप लगाती है कि इसके पीछे सरकार की बिजली कंपनियों को फायदा पहुचाने की साजिश है। आवश्यक सेवाओं में शुमार बढ़े हुए बिजली बिलों को कमलनाथ सरकार की इंदिरा ज्योति योजना के तहत 100 रुपए में 100 यूनिट देने की योजना को लागू किया जाए ताकि बिजली उपभोक्ताओं को राहत की सांस मिले। पीछे के रास्ते से सत्ता में काबिज हुई शिवराज सरकार अब अपना बोरिया बिस्तर बांधने को तैयार हो जाए क्योंकि उप चुनाव के बाद यह सरकार जाने वाली है। क्योंकि भारत का गरीब, किसान और एक आम इंसान गद्दारी पसन्द नहीं करता। यह लड़ाई कांग्रेस पार्टी की नहीं गद्दारों और जनता के बीच की है। कांग्रेस तो सेवा करने सत्ता में आई थी और प्रदेश की जनता की सेवा में लगी थी लेकिन कुछ गद्दारों ने इतिहास दोहरा दिया। हमारी शिवराज सरकार से मांग है कि किसान कर्जमाफी के साथ ही बर्बाद हुए सोयाबीन के मुआवजे के रूप में 40 हजार प्रति हेक्टेयर किसानों को दिया जाए। बिजली बिल पूर्ण माफ किए जाए।





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