पंजाब में बिगड़ सकता है कांग्रेस और आप का चुनावी गणित, महागठबंधन की तैयारी में बीजेपी

पंजाब में बिगड़ सकता है कांग्रेस और आप का चुनावी गणित, महागठबंधन की तैयारी में बीजेपी

भारत के उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। राज्य में किस पार्टी की सरकार बनेगी इसके फैसला लोगों के वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा लेकिन राज्य की राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी गणित लगाना शुरू कर दिया है।

साल 2022 में भारत के उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। राज्य में किस पार्टी की सरकार बनेगी इसके फैसला लोगों के वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा लेकिन राज्य की राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी गणित लगाना शुरू कर दिया है। ताजा रुझानों के अनुसार पंजाब की बात करें तो माना जा रहा था कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, लेकिन पंजाब की राजनीति का चक्र घूमता हुआ दिखाई पड़ रहा है। दोनों पार्टियों के खिलाफ राज्य में तीसरा महागठबंधन बन रहा है, जिसमें अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी की अगुवायी में शिरोमणि अकाली दल, बसपा, कैप्टन अमरिंदर सिंह की हाल ही में गठित की गयी नयी पार्टी शामिल हो सकते हैं। 

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शिरोमणि अकाली दल की तरफ से दिए गये संकेत से यह जाहिर है कि शिअद पंजाब विधानसभा चुनाव में गठबंधन के साथ लड़ने के लिए तैयार है। राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी किसी के साथ गठबंधन के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस के साथ नहीं। माना जा रहा है कि गठबंधन का ऐलान दिसंबर के आखिर तक कर दिया जाएगा। 

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हाल ही में एक लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस को छोड़ दिया। अब कांग्रेस की कमान पंजाब में नवजोत सिंह सिद्दू के पास हैं। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अपनी नयी पार्टी बना ली है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने के बाद बीजेपी के वरिष्ट नेता अमित शाह से मुलाकात भी की थी और किसानों वाले मुद्दे पर बात की। इस मुलाकात को इस बात का संकेत माना जा रहा था कि अमरिंदर, बीजेपी के साथ आ सकते हैं। अभी औपचारिक ऐलान तो नहीं हुआ है लेकिन केंद्र सरकार ने जिस तरह से कृषि कानून बिल वापस लिया है उसका यहीं संकेत हैं कि बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मिलकर पंजाब विधानसभा के चुनावी मैदान में कांग्रेस और आप को टक्कर देने के लिए उतरेंगे।

पंबाज में सभी पार्टियों के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती है वो है आम आदमी पार्टी। आम आदमी पार्टी (आप) चुनाव जीतने की उम्मीद में बिना घोड़े पर सवार हुए सरपट दौड़ती दिख रही हैअकालियों (शिअद) और कांग्रेस के विपरीत, आप के पास न तो बुरा ऐतिहासिक बोझ है और न ही ऐतिहासिक लाभ। वह एकदम फ्रेश तरीके से चुनाव में जीतने की उम्मीद से उतर रही है। पार्टी को अपनी खुद की एक क्षेत्रीय पहचान विकसित करनी है। एक अनुमान से देखा जाए तो आप दिल्ली की तर्ज पर ही सब कुछ मुफ्त देने के वादे के साथ मैदान में उतर रही हैं लेकिन एक गणित के अनुसार आप का वोट शेयर 2014 और 2019 के संसद चुनावों के बीच 24 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गया।





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