नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी को लेकर विवाद! निरंजनी अखाड़ा ने कहा- पंच परमेश्वर करेंगे चुनाव, सुसाइड नोट पर विश्वास नहीं

Narendra Giri
अंकित सिंह । Sep 23 2021 2:01PM

अखाड़ा परिषद के सचिव महंत हरी गिरि की ओर से बताया गया कि अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष का चुनाव कोई जल्दबाजी का काम नहीं है। पहले भी यह पद 6-6 महीने तक खाली रहा है।

महंत नरेंद्र गिरि की कथित आत्महत्या के बाद उन्हें भू समाधि दे दी गई है। इसके साथ ही आत्महत्या के साथ एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया था। इस सुसाइड नोट में बलवीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी को लेकर अखाड़ा परिषद में विवाद हो सकता है। दरअसल, मठ बाघंबरी गद्दी निरंजनी अखाड़ा के अंतर्गत आता है और यह अखाड़ा बलवीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी मानने को तैयार नहीं है। अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि उत्तराधिकारी का चुनाव पंच परमेश्वर करेंगे। जिस सुसाइड नोट में यह बातें कही गई है उसे हम बिल्कुल नहीं मानते। लेटर में विभिन्न प्रकार की खामियां हैं और इसलिए हमें उस पर विश्वास नहीं है कि उसे महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा होगा। अखाड़े की ओर से यह भी कहा गया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इसको लेकर हम कुछ आगे बढ़ेंगे। 

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सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरि की लिखावट नहीं

निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी महाराज ने दावा किया कि पुलिस को महंत नरेंद्र गिरि का जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें महंत की लिखावट नहीं है। दिवंगत महंत के सबसे करीबी माने जाने वाले संतों में से एक कैलाशानंद जी महाराज ने कहा कि मैं इस सुसाइड नोट को सुसाइड नोट नहीं मानता क्योंकि इसमें नरेंद्र गिरि जी की लिखावट नहीं है। मैं उन्हें 20 साल से जानता हूं, नरेंद्र गिरि जी लिखते नहीं थे।  उन्होंने दावा किया कि निःसंदेह नरेंद्र गिरि जी महाराज कभी पत्र नहीं लिखते थे। यदि उनका लिखा हुआ किसी के पास कुछ है तो वह दिखाए। मुझसे अधिक उन्हें कोई नहीं जानता। मैं 2003 से उनसे, इस मठ से जुड़ा हुआ था। हर परिस्थिति में मैंने उनका साथ दिया। वह हस्ताक्षर भी बहुत मुश्किल से करते थे।  कैलाशानंद महाराज ने कहा, “उनके हस्ताक्षर में नाम के सारे शब्द अलग होते थे। वहीं जो सुसाइड नोट सामने आया है, उसमें बड़े टेक्निकल शब्द लिखे हुए हैं। कई ऐसे शब्द हैं जैसे आद्या तिवारी। ऐसा लग रहा है किसी विद्वान व्यक्ति ने यह लिखा है।” 

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6-6 महीने तक पद रहा है खाली

अखाड़ा परिषद के सचिव महंत हरी गिरि की ओर से बताया गया कि अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष का चुनाव कोई जल्दबाजी का काम नहीं है। पहले भी यह पद 6-6 महीने तक खाली रहा है। हमारी प्राथमिकता महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर सच्चाई सामने लाना है और दोषियों को सजा दिलाना है। इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। सरकार काफी संजीदगी से इस मामले को देख रही है और हम अपने स्तर पर भी इसकी पड़ताल कर रहे हैं। बलबीर गिरी को लेकर यह जरूर कहा जा रहा है कि वह एक अच्छे संत हैं और निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर में भी शामिल हैं। उन्हें बाघंबरी गद्दी के महंत पद पर निर्णय लेने का अधिकार है। लेकिन हम सुसाइड नोट की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। अखाड़े की ओर से दावा किया जा रहा है कि सुसाइड नोट को नरेंद्र गिरी ने नहीं बल्कि किसी अच्छे पढ़े लिखे व्यक्ति ने लिखा है।

 

 

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