मुस्लिम शख्स को तलाक देने से और दूसरी शादी करने से नहीं रोक सकती अदालत

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निधि अविनाश । Aug 25, 2022 5:22PM
जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और सोफी थॉमस की खंडपीठ ने 17 अगस्त के आदेश में कहा "न्यायालय को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के जनादेश को नहीं भूलना चाहिए, जो न केवल किसी को धर्म का पालन करने की अनुमति देता है बल्कि अभ्यास करने की भी अनुमति देता है।"

एक मुस्लिम व्यक्ति को अपनी पत्नी को तलाक देने से कोर्ट नहीं रोक सकता। यह सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट ने कहा है। साथ में यह भी कहा कि कोर्ट की तरफ से अगर शख्स दूसरी शादी करना चाहता है तो उसे रोक नहीं सकते है। इसका कारण है कि यह मुस्लिम कानून या शरीयत के अनुसार एक अधिनियम है।

उच्च न्यायालय ने 30 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा दो पारिवारिक अदालत के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका की अनुमति देते हुए यह बात कही है। जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और सोफी थॉमस की खंडपीठ ने 17 अगस्त के आदेश में कहा  "न्यायालय को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के जनादेश को नहीं भूलना चाहिए, जो न केवल किसी को धर्म का पालन करने की अनुमति देता है बल्कि अभ्यास करने की भी अनुमति देता है।"

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कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सीमित है। कोर्ट यह सुनवाई एक मुस्लिम शख्स की याचिका पर कर रही है जिसमें एक पत्नी को दो बार तलाक बोलने के बाद फैमिली कोर्ट ने तीसरी बार तलाक देने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उचित समय पर, यदि कानून के अनुसार तलाक का प्रयोग नहीं किया जाता है, तो पत्नी अपनी शिकायतों के निवारण के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती है। लेकिन फैमिली कोर्ट मुस्लिम शख्स को तलाक देने से और दूसरी शादी करने से रोक नहीं सकती है।

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