दिल्ली सरकार ने इमरान का घटाया कद, हौज काजी मंदिर विवाद से जुड़ा था नाम

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jul 16 2019 2:27PM
दिल्ली सरकार ने इमरान का घटाया कद, हौज काजी मंदिर विवाद से जुड़ा था नाम
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देश की राजधानी दिल्ली में पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जाती है। राजधानी में वैसे तो प्रदूषण का मुद्दा कई सालों से उठता रहा है। लेकिन तमाम प्रयासों और निर्देशों के बाद भी कुछ खास महीनों में दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रहती। जिसके बाद हर साल ऐन वक्त पर दिल्ली सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को फजीहत झेलनी पड़ती है।

लोकसभा चुनाव 2019 में हुई भीषण पराजय के बाद कभी अरमानों और सपनों के सहारे सत्ता पर सवार होने वाली आम आदमी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए खुद को संवारने और संभालने में लग गई है। दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर पराजय झेलने के बाद टीम केजरीवाल फिर से पांच साल राज करने के लिए सियासी तैयारी में जुट गई है। वैसे तो दिल्ली में विधानसभा चुनाव अगले साल है लेकिन इस वक्त को महीने के हिसाब से उंगलियों पर गिना जा सकता है। किसी भी सरकार के लिए सत्ता में वापसी की कुंजी होती है उसका शासन और इस दौरान किए गए कार्य। जिसके सहारे वह फिर से सत्ता में वापसी की उम्मीद करता है। उसी उम्मीद और भरोसे के आसरे दिल्ली की सत्ता पर काबिज अरविंद केजरीवाल सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले अपने मंत्रीमंडल में मामूली मगर अहम फेरबदल किए हैं। मामूली इसलिए क्योंकि एक ही बदलाव किया गया है। मगर अहम इसलिए क्योंकि यह बदलाव पर्यावरण मंत्रालय को लेकर किया गया है।

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बता दें कि केजरीवाल सरकार में परिवहन और कानून मंत्री कैलाश गहलोत अब पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग को संभालेंगे। वहीं, इमरान हुसैन खाद्य और आपूर्ति विभाग के मंत्री ही बने रहेंगे। इससे पहले इमरान के पास पर्यावरण मंत्रालय भी था। लेकिन उनसे यह जिम्मेदारी लेकर दिल्ली सरकार ने गहलोत को थमा दी। 
देश की राजधानी दिल्ली में पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जाती है। राजधानी में वैसे तो प्रदूषण का मुद्दा कई सालों से उठता रहा है। लेकिन तमाम प्रयासों और निर्देशों के बाद भी कुछ खास महीनों में दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रहती। जिसके बाद हर साल ऐन वक्त पर दिल्ली सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को फजीहत झेलनी पड़ती है। ऐसे में पर्यावरण विभाग की नई जिम्मेदारी पाने वाले मंत्री कैलाश गहलोत के सामने एक चुनौती भी होगी, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले सर्दी के मौसम में प्रदूषण दस्तक दे सकता है। इसके अलावा पूर्व पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन के कार्यकाल पर नजर डालें तो वो लगातार विवादों में बने रहे। पिछले साल उन पर सरकारी कॉलोनी को बसाने के लिए 16 हजार से अधिक पेड़ काटने की मंजूरी देने के आरोप भी लगे थे। जिसके बाद दिल्ली पर्यावरण बचाओं और सेव ट्री जैसे आंदोलनों से रूबरू हुई थी। 
हालांकि इमरान लगातार ऐसे आरोपों से इंकार भी करते रहे। अपने ऊपर रिश्वत लेकर पेड़ कटवाने को मंजूरी देने के आरोप लगाने वाले कपिल मिश्रा, नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता और बीजेपी-अकाली विधायक मनजिंदर सिरसा के खिलाफ इमरान ने कोर्ट में आपराधिक मानहानि की याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई जारी चल रही है। वैसे इमरान हुसैन के एक बयान की वजह से भी खूब विवाद हुआ था जब उन्होंने दाह संस्कार में लकड़ियों के प्रयोग को हतोत्साहित करने की बात कही थी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने जनवरी 2017 को भारत सरकार के पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र) को चिट्ठी लिखते हुए कहा था कि दाह संस्कार में लकड़ियों के प्रयोग को हतोत्साहित किया जाए। इमरान हुसैन के मुताबिक, दाह संस्कार में इस्तेमाल होने वाली लकड़ियों के इस्तेमाल से प्रदूषण फैलता है, इसलिए दूसरे किसी उपाय को अपना कर लगाम लगायी जा सकती है।
ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ा चाहती है। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें हासिल करने वाली आप का ग्राफ 2019 में आकर काफी गिरा है। 2015 के विस चुनाव के सहारे 54.3 प्रतिशत वोट तक पहुंचने वाली आम आदमी पार्टी को लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली में पार्टी को 18.1 प्रतिशत वोट ही मिले थे। लेकिन सबसे बड़ा विवाद हालिया चांदनी चौक के हौज काज़ी इलाके में पार्किंग को लेकर हुए झगड़े और सांप्रदायिक तनाव के रुप में सामने आया था। जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तलब भी किया था। आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने उस वक्त आरोप था कि जब मंदिर तोड़ा जा रहा था, उस भीड़ के सपोर्ट में केजरीवाल के मंत्री इमरान हुसैन भी आये थे।  वहीं भाजपा नेता विजय गोयल ने भी कहा था कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया है कि अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री इमरान हुसैन ने रात को आकर इस झगड़े को तूल दिया था। 
आप मंत्री पर उठे सवाल और फिर उसके कुछ ही दिन बाद उनके कद को कम करते हुए एक मंत्रालय लिया जाना, केजरीवाल सरकार के हिन्दुओं को लुभाने की कोशिश के रुप में भी देखा जा रहा है। मामले के वक्त केजरीवाल सरकार पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के भी आरोप खूब लगे थे। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती। राजनीतिक जानकार इसे केजरीवाल सरकार के इस कदम चांदनी चौक मुद्दे को बड़ा मुद्दा नहीं बनने देने के लिए यह कदम के रुप में भी देख रहे हैं। 
 

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