गरीब परिवार में पैदा होने के बावजूद विचारों से कभी गरीब नहीं रहे कर्पूरी ठाकुर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 24, 2020   19:52
गरीब परिवार में पैदा होने के बावजूद विचारों से कभी गरीब नहीं रहे कर्पूरी ठाकुर

देश के आजादी के संघर्ष और आजादी के बाद गणतंत्र के निर्माण में महात्मा गांधी, डा. बाबा साहेब अंबेडकर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, चौधरी चरण सिंह, राजनारायण, जनेश्वर मिश्रा जैसे समाजवादी नेताओं के योगदान का विस्तार से उल्लेख करते हुये आर.एस. यादव ने कहा कि इस देश को समाजवादी ही सही दिशा दे सकते हैं।

धर्म और राजनीति का घालमेल करके समाज में पैदा की जा रही है धर्मांधता समाजवादी पार्टी दिल्ली प्रदेश ने शुक्रवार को दिवंगत समाजवादी नेता जननायक कर्पूरी ठाकुर की 96वीं जयंती पर उन्हें याद किया। इस अवसर पर दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये समाजवादी पार्टी दिल्ली प्रदेश के पूर्व प्रमुख महासचिव एवं प्रवक्ता आर.एस. यादव ने कहा जनवरी का महीना गणतंत्र दिवस के लिये जाना जाता है। दो दिन बाद देश में 71वां गणतंत्र दिवस मनाया जायेगा। आज जिस राजनेता जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर नमन करने के लिये इकट्ठा हुए हैं, उस गणतंत्र की स्थापना में उनका क्या योगदान रहा है इस बारे में जानना हम सभी समाजवादियों के लिये बहुत जरूरी है।

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आर.एस. यादव ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था, लेकिन वह सोच से कभी गरीब नहीं रहे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के बैनर तले लड़े गये स्वतंत्रता संग्राम में समाजवादी नेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही, जिसमें कर्पूरी ठाकुर का नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 1942 से लेकर 1946 तक समाजवादियों का आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर पढ़ाई बीच में ही छोड़कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम में कूद गये थे। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय  26 महीने जेल में बिताए थे।

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देश के आजादी के संघर्ष और आजादी के बाद गणतंत्र के निर्माण में महात्मा गांधी, डा. बाबा साहेब अंबेडकर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, चौधरी चरण सिंह, राजनारायण, जनेश्वर मिश्रा जैसे समाजवादी नेताओं के योगदान का विस्तार से उल्लेख करते हुये आर.एस. यादव ने कहा कि इस देश को समाजवादी ही सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज संविधान को तोड़ने का काम किया जा रहा है। राजनीति सामाजिक शुचिता के लिये होनी चाहिये, न कि व्यवसाय के लिये होनी चाहिये। आज अंग्रेजो से माफी मांगने वालों को महिला मंडित किया जा रहा है। धर्म और राजनीति का घालमेल करके समाज में धर्मांधता पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी नेताओं की छत्रछाया में संस्कारित समाजवादी पार्टी के मार्गदर्शक व संस्थापक धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव ने समाजवाद के जिस वटवृक्ष को खड़ा किया है उसे हमारी पार्टी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मजबूती देने में जुटे हैं। उनके नेतृत्व को मजबूत करके इस संघर्ष को आगे बढ़ाना हम सबका परम कर्त्तव्य है। यही कर्पूरी ठाकुर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम को जानेमाने इतिहासकार डा. भगवान सिंह, वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली, जयशंकर गुप्त, सपा के राज्यसभा सांसद विश्वंभर प्रसाद निषाद, समाजवादी विचारक मोहन सिंह, लक्ष्मण यादव, तिब्बत की निवार्सित संसद के उपाध्यक्ष आचार्य तोशी फुंगशोक, विनोद सिंह ने भी संबोधित किया। इनके अलावा समाजवादी विचारक डा. अंबुज, पूर्व सपा नेता डा. सुनीलम और समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्त्ता भी इस मौके पर उपस्थित थे।





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