भारत से लेकर अमेरिका तक क्या है चुनाव हाल ? जानें कहां-कहां टले चुनाव

भारत से लेकर अमेरिका तक क्या है चुनाव हाल ? जानें कहां-कहां टले चुनाव

कोरोना के चलते अब चुनाव टलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। अमेरिका में ऐसा हुआ भी है। एक तरफ डेलीगेट्स के चुनाव टल गए हैं तो दूसरी तरफ पार्टियां चुनाव प्रचार-प्रसार नहीं कर पा रही हैं।

नयी दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी के चलते विश्वभर में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अर्थव्यवस्था का भी बुरा हाल है। लॉकडाउन खुलने के बाद बहुत से लोगों की नौकरियां जाने के भी अनुमान लगाए जा रहे हैं। इन तमाम बातों के बीच एक खबर ये भी है कि बहुत से देशों में होने वाले चुनाव भी टल सकते हैं।

कोरोना के चलते अब चुनाव टलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। अमेरिका में ऐसा हुआ भी है। एक तरफ डेलीगेट्स के चुनाव टल गए हैं तो दूसरी तरफ पार्टियां चुनाव प्रचार-प्रसार नहीं कर पा रही हैं। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव टाले जाने की संभावनाओं से इंकार कर दिया और कहा कि मैंने चुनाव की तारीख टालने के बारे में कभी नहीं सोचा। मैं ऐसा क्यों करुंगा? तीन नवंबर अच्छी तारीख है। 

इसे भी पढ़ें: कोरोना को चीन में ही नहीं रोका गया, तभी तो 184 देश नर्क से गुजर रहे हैं: डोनाल्ड ट्रंप 

हिन्दुस्तान पर भी पड़ा असर

कोरोना वायरस नामक महामारी ने लगभग हर एक देश को अपनी चपेट में ले लिया है और इसका असर चुनावों में पड़ता हुआ दिखाई भी दे रहा है। अगर हम हिन्दुस्तान की बात करें तो चुनाव आयोग ने 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को अंतिम समय में टाल दिया और अब असम में होने वाले बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल यानी बीटीसी के चुनाव भी टल गए। यहां पर 4 अप्रैल को 40 सीटों के लिए चुनाव होने वाले थे लेकिन महामारी के चलते यह मुमकिन नहीं हो पाया।

बीटीसी का मौजूदा कार्यकाल भी 27 अप्रैल को खत्म हो गया। जिसके बाद राज्यपाल शासन लागू हो गया। जिसका मतलब साफ है कि जब तक चुनाव नहीं हो जाते तब तक राज्यपाल जगदीश मुखी की देखरेख में भी कामकाज होगा। 

इसे भी पढ़ें: हिलेरी क्लिंटन ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल जो बाइडेन के अनुभव की प्रशंसा की 

असम के बीटीसी चुनाव ही नहीं बल्कि कई राज्यों में होने वाले एमएलसी के चुनाव भी लटक गए हैं।

चुनाव टलने के पीछे वजह सिर्फ इतनी है कि हर मुल्क की पहली प्राथमिकता कोरोना के खिलाफ जंग को जीतना है और फिर उसके बाद चुनाव की तरफ जाना है।

बिहार में भी होने वाले हैं चुनाव

अगर हम बिहार चुनाव की बात करें तो वह अक्टूबर-नवंबर में होने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तब तक देश बड़ी मजबूती के साथ खुद को आगे लेकर आ चुका होगा और हम कोरोना वायरस को हराने में सफल होंगे। हालांकि ये देखना काफी दिलचस्प होगा। 

इसे भी पढ़ें: राष्ट्रपति चुनाव टालने से ट्रंप का इनकार, बताई इलेक्शन की तारीख 

तमाम राजनीतिक पार्टियां इन दिनों देशवासियों को जागरुक करने का काम कर रही हैं और उन तक आवश्यक सामग्रियां पहुंचाने में जुटी हैं। मगर मौजूदा स्थिति को देखते हुए ही राज्यसभा चुनाव टाले गए हैं। राज्यसभा चुनाव टालने के पहले चुनाव आयोग ने एक बैठक की थी। जहां पर फैसला किया गया था कि देश में अभी चुनाव कराए जाने के हालात नहीं है। हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है। ऐसे में चुनाव की स्थिति के बारे में तो जुलाई-अगस्त के महीने में ही साफ हो पाएगा। इतना ही नहीं अगले साल यानी की 2021 में होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव के बारे में अभी कुछ कहा जाना ठीक नहीं होगा।

स्थानीय चुनाव पर बना संकट

अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले 15 राज्यों में प्राइमरी का चुनाव है। जो मार्च से लेकर मई के बीच होना है। जिस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ठीक यही हाल रूस में 5 अप्रैल से 23 जून के बीच होने वाले क्षेत्रीय और स्थानीय चुनाव का हाल भी कुछ ऐसा ही है।  

इसे भी पढ़ें: असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद का संभाला कार्यभार 

कई देशों में टाल दिया गया मतदान

इथियोपिया, सीरिया, ईरान, श्रीलंका, डोमेनिकल रिपब्लिक, सर्बिया, बोल्विया, पापुआ न्यू गिनी और स्विट्डरलैंड में होने वाले मतदान को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। लेकिन दक्षिण कोरिया की सरकार ने साफ शब्दों में कहा था कि यहां पर तय समय पर ही चुनाव होंगे और चुनाव की पूरी प्रक्रिया के दौरान सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जाएगा। यहां पर महामारी के बीच चुनाव भी हो गए और कम लोकप्रियता से जूझ रही सत्ताधारी पार्टी ने रिकॉर्ड बहुमत हासिल भी कर लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया की तरह और देश चुनाव के बारे में जल्दी नहीं सोचेंगे क्योंकि उनकी पहली प्राथमिकता महामारी से निपटने की होगी। हालांकि, महामारी से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया के मॉडल को अपनाने की आवश्यकता जरूर है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।