इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में अनियमितता के साक्ष्य अदालत को सौंपे गए

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अरुण कुमार साहू ने बताया कि जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति चयन में धाँधली/भ्रष्टाचार एवं अपराध हुआ है तथा कुलपति का चयन फ़िक्सिंग हो गया है कुलपति के पेनल में प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो एडीएन बाचपेयी, प्रो प्रकाशमनी त्रिपाठी का नाम है जिसे कुलपति चयन समिति अध्यक्ष प्रो कृष्णा भट्ट ने अपने परिचितों को लाभ पहुचाने की नियत से धोखा करके अंजाम दिया है।

अमरकंटक। मध्य प्रदेश के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में कई गंभीर अपराध के मामले में प्रो टी वी कटटीमनी, कुलपति, प्रो बसव राज डोनुर, केंद्रीय विश्वविद्यालय कर्नाटक, प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी, प्रो रवीन्द्रनाथ मनुकोंडा आदि पर अदालत ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने आदेश पारित किया कि प्रस्तुत आवेदन के तथ्यों से प्रथम दृष्ट्या दर्शित अपराध संज्ञेय अपराध होकर वारंट ट्रायल मामला प्रकट होता है, जिसके विधिवत अन्वेषण किए जाने हेतु प्रकरण पुलिस को प्रेषित किया जाना उचित प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा कि आवेदन स्वीकार कर निर्देशित किया जाता है कि आवेदन मय दस्तावेज़ आरक्षी केंद्र अमरकंटक को विधिवत कार्यवाही कर प्रतिवेदन पेश किए जाने हेतु प्रेषित किया जावे। भर्ती परीक्षा (प्रवेश लेने के लिए भर्ती (एंट्रेन्स) परीक्षा तथा नौकरी लेने के लिए भर्ती की लिखित परीक्षा) में भर्ती कराने के लिए प्रश्न पत्र बेचने, फर्जी तरीक़े एवं गैर क़ानूनी रूप से अपने लोंगो को भर्ती करवाने के लिए ईमानदारी में कमी करने, शासकीय पद का दुरुपयोग करने, भ्रष्टाचार करने, धोखाधड़ी करने, कूटरचना करने, भारत सरकार के साथ धोखाधड़ी करने के जुर्म में आवेदन प्रस्तुत हुआ है। करोड़ रुपए के बिल्डिंग घोटाला करने, प्रवेश परीक्षा में भर्ती घोटाला करने, नियुक्ति घोटाला करने, कुलपति नियुक्ति की फ़िक्सिंग करने, मात्र दशवी पास लड़की को पीएचडी एनट्रेंस परीक्षा में बायो टेक्नॉलोजी विषय की ऑल इंडिया टॉपर बनाने 

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अरुण कुमार साहू ने बताया कि जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति चयन में धाँधली/भ्रष्टाचार एवं अपराध हुआ है तथा कुलपति का चयन फ़िक्सिंग हो गया है कुलपति के पेनल में प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो एडीएन बाचपेयी, प्रो प्रकाशमनी त्रिपाठी का नाम है जिसे कुलपति चयन समिति अध्यक्ष प्रो कृष्णा भट्ट ने अपने परिचितों को लाभ पहुचाने की नियत से धोखा करके अंजाम दिया है। अरुण कुमार ने आगे बताया कि विश्वविद्यालय में कई करोड़ के बिल्डिंग घोटाला हुआ है, विवि को मिनिस्ट्री ओफ सोसल जस्टिस एंड इम्पावरमेंट ने दिनांक तीन दिसंबर 2014 को जारी पत्र में ओबीसी छात्रों के लिए 100 सीट तथा 100 सीट की दो हॉस्टल बनाने हेतु आईजीएनटीयू को केंद्रीय सहयोग राशि रुपए पाँच करोड़ चालीस लाख भेजा जिसमें तीन करोड़ की अतिरिक्त राशि लगाकर कुछ दूसरा निर्माण किया गया तथा विवि ने भारत सरकार को झूठी एवं बनावटी जानकारी भेजकर बताया कि ओबीसी छात्रों के लिए 100 सीट तथा 100 सीट की दो हॉस्टल बन गयी है तथा 200 ओबीसी छात्रों नाम की फर्जी लिस्ट भारत सरकार को भेजी गयी है जबकि ओबीसी छात्रों के लिए ना तो हॉस्टल बना है ना ही उसमें ओबीसी छात्रों ने शिफ़्ट किया है। इतना ही नहीं विवि में बड़े पैमाने पर अलग - अलग बिल्डिंग घोटाला हुए है तथा ऐसी भी बिल्डिंग बनी है जो कभी भी गिर सकती है तथा हज़ारों आदिवासी एवं अन्य वर्ग के छात्रों की जान जा सकती है। 

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अरुण कुमार ने आगे बताया कि विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर बहाली घोटाला हुआ है, विवि में बहाली में गड़बड़ी सामने आयी है और ऐसे उम्मीदवार लिखित परीक्षा में टॉपर हो गए है जो बुनियादी सवालों के जवाब देने में असमर्थ है, राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में लिखित परीक्षा में उन्ही उम्मीदवारों का रिज़ल्ट निकाला जिन लोगों से भर्ती पूर्व सेटिंग हो गयी थी, जो वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में जिन्हें अयोग्य/ अपात्र घोषित किया गया था उन पदों के लिखित परीक्षा का रिज़ल्ट नहीं आया तथा ये सभी अयोग्य उम्मीदवार को वर्ष 2017 में विज्ञापन निकालकर भर्ती कर दिया गया ऐसे लोग लिखित परीक्षा में टॉपर हो गए है जो दो लाइन हिंदी तथा अंग्रेज़ी नही लिख सकते है। आज भी अनेक उम्मीदवार वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में लिखित परीक्षा के रिज़ल्ट के इंतज़ार में है ऐसे हज़ारों छात्रों का फ़ीस का भी ग़बन कर दिया गया है जिसका साक्ष्य दे दिया गया है। विवि में बहाली करवाने के लिए परीक्षा पूर्व प्रश्नपत्र बेच दिए जाते है या अपने परिचितों को दे दिए जाते है तथा उत्तरपुस्तिका ख़ाली छोड़कर आने पर भी उसे बाद में भर दिया जाता है इस कार्य को अंजाम देने के लिए कुलपति प्रो टी वी कटटीमनी ने एक गिरोह बनाया है जो प्रो टी वी कटटीमनी के इशारे पर फर्जी स्किल टेस्ट लेते है जिसका रिज़ल्ट कोई अन्य अधिकारी बनाया है। वर्ष 2015 से लेकर मार्च 2018 तक नान-टीचिंग के विभिन्न पदों पर हुए भर्ती की प्रक्रिया, भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा, भर्ती के लिए आयोजित स्किल टेस्ट में किस प्रकार भ्रष्टाचार, लापरवाही, शासकीय पद का दुरुपयोग, ईमानदारी में कमी, धोखा, कूटरचना, आर्थिक अपराध एवं सामूहिक रूप से अपराध हुए है इसका साक्ष्य माननीय न्यायालय को दे दिया गया है। 

 

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