किसान का बेटा बनेगा देश का नया CJI, जिस पर इस राज्य के मुख्यमंत्री ने लगाए थे गंभीर आरोप

CJI
अभिनय आकाश । Mar 25, 2021 3:11PM
कानून मंत्री की तरफ से पत्र में बोबडे के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए नाम की सिफारिश के बारे में पूछा था। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठता क्रम के नियमों का पालन करते हुए रमना के नाम की सिफारिश की है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे के रिटायर होने में एक महीने से भी कम समय बचा है। 23 अप्रैल 2021 को वे रिटायर हो रहे हैं। इसके साथ ही सीजेआई ने अपने उत्तराधिकारी और देश के 48वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमणा के नाम की सिफारिश की है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जस्टिस बोबडे को हाल ही में पत्र के जरिये नये सीजेआई के नाम की सिफारिश करने को कहा था। कानून मंत्री की तरफ से पत्र में बोबडे के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए नाम की सिफारिश के बारे में पूछा था। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठता क्रम के नियमों का पालन करते हुए रमना के नाम की सिफारिश की है। अगर सबकुछ सही रहा तो जस्टिस रमणा 24 अप्रैल को सीजेआई के तौर पर शपथ ले सकते हैं। चीफ जस्टिस के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 16 महीने का होगा। वो 26 अगस्त 2022 को रियायर होंगे। 

कौन हैं जस्टिस एनवी रमणा?

जस्टिस रमणा का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नावरम गांव में एक किसा परिवार में हुआ। 1983 में उन्होंने आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। 27 जून 2000 को उन्हें आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का परमानेंट जज बनाया। 2 सितंबर 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया और 17 फरवरी 2014 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने। एनवी रमणा चीफ जस्टिस बोबडे के बाद सबसे वरिष्ठ जज हैं। आंध्र प्रदेश से पहले व्यक्ति हैं जो सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई का पद संभालेंगे।  

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जस्टिस रमणा के कुछ अहम फैसले

  • जस्टिस रमणा अयोध्या मामले की सुनवाई करने वाली जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक पीठ का हिस्सा रहे हैं।  
  • इंटरनेट को अनुछेद 19 के तहत मौलिक अधिकार मानना और जम्मू कश्मीर में 4जी चालू करने की मांग वाली याचिका पर कमेटी गठन करने जैसे फैसलों में जस्टिस रमणा शामिल रहे हैं। 
  • सीजेआई ऑफिस को आरटीआई के दायरे में लाने वाले पांच जजों की बेंच में जस्टिस रमणा भी शामिल थे। 
  • इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश के मामले में राज्यपाल अपनी मर्जी से विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला नहीं ले सकता बल्कि सीएम और कैबिनेट की सलाह पर ही सत्र बुलाया जा सकता है जैसे फैसले देने वाली पांच जजों की बेंच में रमणा शामिल रहे। 

आंध्र प्रदेश के सीएम ने लगाए थे गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री रेड्डी की न्यायमूर्ति रमणा के खिलाफ शिकायत को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले की जानकारी अदालत की वेबसाइट पर जारी एक बयान के माध्यम से दी गई। बयान में कहा गया, “आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा छह अक्टूबर 2020 को उच्चतम न्यायालय में एक शिकायत भेजी गई जिस पर आंतरिक प्रक्रिया के तहत गौर किया गया और उचित विमर्श के बाद उसे खारिज कर दिया गया। यह दर्ज किया जाए कि आंतरिक प्रक्रिया के तहत निपटाए जाने वाले मामले बेहद गोपनीय प्रकृति के होते हैं और उन्हें सार्वजनिक किये जाने की जरूरत नहीं हैं।” एक अभूतपूर्व कदम के तहत रेड्डी ने छह अक्टूबर को सीजेआई बोबडे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के कामकाज में दखल दे रहे हैं और तेलुगु देशम पार्टी और उसके मुखिया चंद्रबाबू नायडु के हितों में काम कर रहे हैं। रेड्डी ने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का इस्तेमाल “लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई उनकी सरकार को अस्थिर करने और गिराने” के लिये किया जा रहा है। रेड्डी ने सीजेआई से इस मामले को देखकर विचार करने तथा “प्रदेश की न्यायपालिका की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिये जो भी उचित व उपयुक्त लगे”, वैसा कदम उठाने का अनुरोध किया था। बाद में मुख्यमंत्री के इस पत्र को आंध्र प्रदेश के अमरावती में पिछले साल 10 अक्टूबर को उनके प्रधान सलाहकार अजय कल्लम ने मीडिया को भी जारी किया था। 

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