मेरठ में धरने पर बैठे किसानो ने कहा की कृषि कानून के संसद में रिपील होने तक घर वापसी नहीं

मेरठ में धरने पर बैठे किसानो ने कहा की कृषि कानून के संसद में रिपील होने तक घर वापसी नहीं

पीएम मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के एलान पर पश्चिमी यूपी में किसान नेताओं में खुशी की लहर है। पंजाब से शुरू हुए आंदोलन को वेस्ट यूपी के किसानों ने मुकाम तक पहुंचाया। पंजाब के किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू किया था, हरियाणा व वेस्ट यूपी का साथ मिला था।

मेरठ , प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की घोषणा के साथ ही किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद से आंदोलनरत किसानों के साथ साथ आंदोलन का समर्थन कर रही जनता में खुशी की लहर है। पंजाब से शुरू हुए आंदोलन को वेस्ट यूपी के किसानों ने मुकाम तक पहुंचाया। पंजाब के किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू किया था, हरियाणा व वेस्ट यूपी का साथ मिला था। 26 जनवरी को आंदोलन खत्म होने की कगार पर पहुंचा तो, वेस्ट यूपी के किसानों ने दोबारा खड़ा करके कानून वापसी की मंजिल तक पहुंचाया। 

कृषि कानूनों की वापसी को लेकर भाकियू  के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए कहा कि किसान आंदोलन तत्काल वापस नहीं लिया जाएगा। हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानून को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार एमएसपी के साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें। यह बातें टिकैत ने अपने ट्वीट साझा कीं। 

टिकैत के ट्वीट के बाद मेरठ में सिवाया टोल प्लाजा पर मिनी गाजीपुर बनाकर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष मनोज त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत है लेकिन कृषि कानून संसद द्वारा पास किए गए थे और जब तक संसद द्वारा किसी कानून वापस नहीं किए जाते हैं और आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को सम्मान नहीं मिलता, तब तक घर वापसी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसान पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही घर जाएगा।





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