बिहार में टल सकता है पहले चरण का चुनाव !

By अंकित सिंह | Publish Date: Mar 13 2019 1:06PM
बिहार में टल सकता है पहले चरण का चुनाव !
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जैसा कि आपको पता है कि औरंगाबाद में सूर्य देव का मंदिर है जहां छठ पर्व के अवसर पर लाखों लोग जुटते है। इसका मतलब साफ है कि अगर 11 अप्रैल को मतदान हुए तो आसपास के इलाके में धारा 144 लागू रहेंगे।

लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की जा चुकी है और पहले चरण के लिए 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। 40 सीटों वाले बिहार में सातों चरण में मतदान होंगे। इस बीच बिहार में पहले चरण के मतदान टल जाने के संकेत मिल रहे हैं। बिहार में पहले चरण में चार सीटों पर मतदान होंगे। यह चार सीटें है- औरंगाबाद, जमुई, नवादा और गया। लोकतंत्र के महापर्व के पहले चरण के मतदान के टलने का मुख्य कारण लोक आस्था का महान पर्व छठ बताया जा रहा है। इस बार चैती छठ का पहला अर्घ्य 11 अप्रैल को ही है।  

मतदान टलने का मुख्य कारण
जैसा कि आपको पता है कि औरंगाबाद में सूर्य देव का मंदिर है जहां छठ पर्व के अवसर पर लाखों लोग जुटते है। इसका मतलब साफ है कि अगर 11 अप्रैल को मतदान हुए तो आसपास के इलाके में धारा 144 लागू रहेंगे। ऐसे में व्रतियों के साथ- साथ स्थानीय लोगों को भी काभी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा मदतान के प्रतिशत में भी भारी गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस अवसर पर लगने वाले मेलें से लगभग 10 से 15 पोलिंग बूथ प्रभावित होंगे। 
 
स्थानिय प्रसाशन और लोगों की राय


सबसे पहले स्थानिय लोगों की बात करें तो इनका साफ कहना है कि 11 अप्रैल को मतदान होने से उन्हें कई प्रकार के दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। स्थानिय लोगों ने यह भी कहा कि मेलें में आसपास के इलाकों से करीब 10 लाख से ज्यादा लोग आत हैं। ऐसे में पर्व के साथ-साथ हमारे आमदनी पर भी इसका साफ असर पड़ सकता है। औरंगाबाद के जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने कहा कि हमने चुनाव आयोग को इस बारे में सुचित कर दिया है और जरूरत पड़ी तो हम दोबारा से इस पर चर्चा करने को तैयार हैं। डीएम ने यह भी कहा कि अगर तय समय पर चुनाव हुए तो मदतान प्रतिशत में भारी गिरावट तो होगा ही साथ ही कानून व्यव्स्था को भी संभालना एक बड़ी चुनौती होगी।   
 
दिक्कत कहां है
आयोग द्वारा तय किए गए तारीख पर चुनाव नहीं कराएं जाते है तो इसका असर सारे चरणों पर पड़ सकता है। इसके अलावा बाद में चुनाव कराने के लिए अलग से व्यव्स्था करना भी एक कड़ी चुनौती है। साथ ही साथ किसी पर्व-त्योहार को लेकर मतदान टाली जाती है तो हो सकता है कि दूसरा पक्ष भी इस तरह की मांग शुरू कर दें जो कि हाल में भी देखने को मिला। 

 


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