मालाबार नौसेना अभ्यास: पहला चरण बंगाल की खाड़ी में तीन से छह नवंबर के बीच होगा

Malabar Naval Exercise
एक अधिकारी ने बताया कि चार देशों के इस नौसेना अभ्यास का दूसरा चरण 17 से 20 नवंबर के बीच अरब सागर में होगा। पिछले हफ्ते, भारत ने यह घोषणा की थी कि आस्ट्रेलिया इस नौसेना अभ्यास का हिस्सा होगा।

नयी दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर गतिरोध बने रहने के बीच भारत पहले चरण का ‘मालाबार नौसेना अभ्यास’ तीन से छह नवंबर तक अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के साथ विशाखापत्तनम तट के पास बंगाल की खाड़ी में करेगा। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चार देशों के इस नौसेना अभ्यास का दूसरा चरण 17 से 20 नवंबर के बीच अरब सागर में होगा। पिछले हफ्ते, भारत ने यह घोषणा की थी कि आस्ट्रेलिया इस नौसेना अभ्यास का हिस्सा होगा, जिसके साथ ही अब यह प्रभावी तरीके से ‘क्वॉड’ या ‘चतुष्कोणीय गठबंधन’ के सभी चार सदस्य देशों का अभ्यास हो गया है। 

इसे भी पढ़ें: नौसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के लिए केंद्र को 31 दिसंबर तक की मोहलत दी 

चीन, मालाबार अभ्यास को लेकर सशंकित है क्योंकि उसे लगता है कि यह वार्षिक युद्ध अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव कायम रखने की इन देशों की कोशिश है। ‘क्वॉड’ सदस्य राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों की तोक्यो में बैठक के दो हफ्ते बाद भारत ने आस्ट्रेलियाई नौसेना को अभ्यास में हिस्सा लेने का न्योता दिया था। जापान में हुई इस बैठक में चारों देशों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत बातचीत की गई थी। इस क्षेत्र में चीन अपना सैन्य प्रभाव बढ़ा रहा है। 

एक सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘यह अभ्यास मित्र नौसेनाओं के बीच समन्वय को दिखाएगा। साथ ही यह, समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा मूल्यों एवं प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। ’’ अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण के अभ्यास में जटिल एवं अत्याधुनिक नौसेना अभ्यास होंगे, जिनमें पनडुब्बी रोधी एवं हवाई युद्ध रोधी अभियान होंगे। इसके अलावा एक जंगी जहाज से उड़ान भर कर दूसरे युद्ध पोत पर भी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर उतरेंगे। हथियारों से फायरिंग का भी अभ्यास किया जाएगा। 

इसे भी पढ़ें: देश का पहला सीप्लेन, 31 अक्टूबर को साबरमती रिवरफ्रंट से भरेगा उड़ान ! 

उन्होंने बताया कि यह अभ्यास कोविड-19 महामारी के मद्देनजर (नौसैनिकों के बीच) गैर संपर्क वाला और सिर्फ समुद्र में ही होगा। मालाबार अभ्यास 1992 में भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच हिंद महासागर में एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था। बाद में, 2015 में जापान इसका स्थायी सदस्य बन गया। यह वार्षिक नौसेना अभ्यास 2019 में जापान के तट पर हुआ था। इस साल के अभ्यास में भारतीय नौसेना अपने विध्वंसक पोत रणविजय, युद्ध पोत शिवालिक, समुद्र तटीय गश्ती नौका सुकन्या, जहाजों के बेड़े को सहायता पहुंचाने वाले पोत शक्ति और पनडुब्बी सिंधुराज को शामिल करेगी।

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा अत्याधुनिक जेट प्रशिक्षक हॉक, लंबी दूरी का समुद्री गश्त विमान पी 8 आई, डोर्नियर समुद्री गश्त विमान और कई सारे हेलीकॉप्टर भी अभ्यास में हिस्सा लेंगे। हाल ही में हुई ‘टू-प्लस-टू’ वार्ता के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने मालाबार अभ्यास में शामिल होने के लिये भारत द्वारा आस्ट्रेलिया को न्योता दिये जाने का स्वागत किया था। चीन की बढ़ती आक्रमकता को रोकने के लिये अमेरिका एक सुरक्षा ढांचे के रूप में ‘क्वॉड’ का समर्थन कर रहा है। 

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी नौसेना का विमान हुआ दुर्घटनाग्रस्त, दो लोगों की मौत 

पूर्वी लद्दाख में पांच महीनों से भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध बना हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच के संबंधों में तनाव बढ़ा है। दोनों देशों ने विवाद का हल करने के लिये सिलसिलेवार कूटनीतिक और सैन्य वार्ता की है। हालांकि, गतिरोध को खत्म करने के लिये अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। मालाबार अभ्यास का न्योता मिलने के बाद आस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री लिंडा रेनॉल्ड्स सीएससी ने कहा कि यह अभ्यास आस्ट्रेलिया के रक्षा बल के लिये एक बड़ा अवसर है और यह हिंद-प्रशांत के चार बड़े लोकतंत्रों के बीच गहरे विश्वास एवं साझा सुरक्षा हितों पर एकजुट होकर काम करने की उनकी साझा इच्छा को प्रदर्शित करता है। पिछले कुछ वर्षों में आस्ट्रेलिया ने इस अभ्यास में भाग लेने की गहरी रूचि दिखाई है। भारत और आस्ट्रेलिया के बीच रक्षा एवं सुरक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं।

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

अन्य न्यूज़