नामीबिया से चीते लाने वाला विमान शनिवार को जयपुर के बजाय ग्वालियर में उतरेगा

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नामीबिया से आठ चीतों के आगमन से एक दिन पहले शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि चीतों को लाने वाला विशेष मालवाहक विमान राजस्थान के जयपुर के बजाय अब शनिवार सुबह को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में उतरेगा। इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से कुनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाकर बाड़े में छोड़ा जाएगा।

नामीबिया से आठ चीतों के आगमन से एक दिन पहले शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि चीतों को लाने वाला विशेष मालवाहक विमान राजस्थान के जयपुर के बजाय अब शनिवार सुबह को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में उतरेगा। इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से कुनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाकर बाड़े में छोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि विमान सुबह लगभग पांच से छह बजे के बीच ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पहुंचेगा जो भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा संचालित है। इसके बाद चीतों को हेलीकॉप्टर से कुनो नेशनल पार्क (केएनपी) स्थानांतरित किया जाएगा।

कुनो राष्ट्रीय उद्यान प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है जो ग्वालियर से लगभग 165 किलोमीटर दूर स्थित है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, देश के वन्य जीवन में विविधता लाने के अपने प्रयासों के तहत नामीबिया से लाए जा रहे चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ेंगे। पहले की योजना के तहत इन चीतों को लाने वाले विमान को राजस्थान के जयपुर में उतरना था, जहां से उन्हें लगभग 400 किलोमीटर दूर कुनो भेजा जाता।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वन्यजीव जेएस चौहान ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘चीते ग्वालियर पहुंचेंगे और वहां से उन्हें एक विशेष हेलीकॉप्टर के जरिये कुनो उद्यान भेजा जाएगा।’’ अधिकारियों ने बताया कि पांच मादा और तीन नर चीतों को नामीबिया की राजधानी विंडहोक से विशेष मालवाहक विमान बोइंग 747-400 के जरिये ग्वालियर हवाई अड्डे पर लाया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुष्टि की कि ग्वालियर से चीतों को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिये केएनपी हेलीपैड पर उतारा जाएगा।

चीता संरक्षण कोष (सीसीएफ) के मुताबिक, केएनपी लाए जा रहे चीतों में से पांचों मादा की उम्र दो से पांच साल के बीच, जबकि नर चीतों की आयु 4.5 साल से 5.5 साल के बीच है। देश में अंतिम चीते की मौत 1947 में कोरिया जिले में हुई थी, जो छत्तीसगढ़ में स्थित है। चीते को 1952 में भारत में विलुप्त घोषित किया गया था। ‘अफ्रीकन चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया’ 2009 में शुरू हुआ था और इसने हाल के कुछ वर्षों में गति पकड़ी है। भारत ने चीतों के आयात के लिए नामीबिया सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

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