डीयू में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अगले साल से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को मंजूरी

Four year graudation will start by next year in DU under NEP
नई शिक्षा नीति अब छात्रों को समग्र विकास को मौका देगी। इसका मतलब यह है कि बीटेक के छात्र अब खुद को अपनी इंजीनियरिंग शाखा तक सीमित नहीं रखेंगे। इसके बजाय, उनके कार्यक्रमों में कला और मानविकी भी शामिल होगा।
नई शिक्षा नीति अब छात्रों को समग्र विकास को मौका देगी। इसका मतलब यह है कि बीटेक के छात्र अब खुद को अपनी इंजीनियरिंग शाखा तक सीमित नहीं रखेंगे। इसके बजाय, उनके कार्यक्रमों में कला और मानविकी भी शामिल होगा। वहीं कला और मानविकी के छात्र विज्ञान सीखेंगे और व्यावसायिक विषयों और सॉफ्ट स्किल्स को शामिल करने का प्रयास करेंगे।

भारत में स्नातक पाठ्याक्रम बीटेक और एमबीबीएस जैसे प्रोफेशनल कोर्स आमतौर पर तीन साल तक चलते हैं। नई नीति में डिग्री पाठ्याक्रमों में बहु-विषयक शिक्षा दी जाएगी। स्नातक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र एक अतिरिक्त वर्ष का अध्ययन करेंगे, उनके पास प्रमाणीकरण के साथ छोड़ने का विकल्प भी होगा।

पहले वर्ष के बाद छोड़ने पर आपको एक प्रमाणपत्र, दूसरे वर्ष के बाद डिप्लोमा और तीसरे वर्ष के बाद स्नातक की डिग्री प्राप्त होगी। यदि छात्र शोध कार्य को पूरा करता है तो अनुसंधान के साथ स्नातक की डिग्री दी जाएगी। दिल्ली विश्वविद्यालय इस एनईपी को लागू करने वाला पहला संस्थान है।  

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एनईपी से पहले च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पेश किया था। इस प्रणाली के तहत आप डिग्री के दौरान प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए क्रेडिट अर्जित करना होगा। एनईपी द्वारा प्रस्तावित एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) वह जगह है, जहां उच्च शिक्षा संस्थान छात्रों द्वारा पढ़े गए पाठ्यक्रमों के लिए अर्जित क्रेडिट को डिजिटल रूप से जमा करेंगे।

प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए क्रेडिट निर्धारित करने का अर्थ यह भी होगा कि सामुदायिक जुड़ाव, सेवा, पर्यावरण शिक्षा, विज्ञान, गणित, कला, खेल और मूल्य-आधारित शिक्षा जैसे क्षेत्रों में पाठ्यक्रम या परियोजनाएँ महत्वपूर्ण होंगी।

नई शिक्षा नीति के शिक्षा के माध्यम से भारतीय भाषाओं, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देती है। उच्च शिक्षा संस्थान क्षेत्रीय भाषाओं या स्थानीय भाषा को अपनाएं। शुरुआत में सरकार ने 14 इंजीनियरिंग कॉलेजों को पांच भाषाओं मराठी, तमिल, बंगाली, तेलुगु और हिंदी में चयनित इंजीनियरिंग कार्यक्रमों को पढ़ाने की अनुमति दी है। 

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