उत्तर प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में हुआ फर्जीवाड़ा, 350 फर्जी नियुक्ति में वरिष्ठ सहायक के खिलाफ मामला दर्ज

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बलिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी के करीब 350 कर्मचारियों की कथित फर्जी नियुक्ति व वेतन भुगतान के मामले में एक वरिष्ठ सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्राथमिकी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) सर्वेश कुमार गुप्ता की शिकायत पर कोतवाली थाने में दर्ज की गयी है।

बलिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी के करीब 350 कर्मचारियों की कथित फर्जी नियुक्ति व वेतन भुगतान के मामले में एक वरिष्ठ सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्राथमिकी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) सर्वेश कुमार गुप्ता की शिकायत पर कोतवाली थाने में दर्ज की गयी है। आरोपी वर्तमान समय में चित्रकूट जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत है। एसीएमओ गुप्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि चित्रकूट जिले में सीएमओ कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात दयाशंकर जब बलिया में कार्यरत थे, तब 2009-2017 के बीच फर्जी भर्ती हुई थी।

दयाशंकर को 2018 में बलिया से बाहर तैनात किया गया। गुप्ता ने बताया कि फर्जी तरीके से भर्ती किए गए कर्मचारियों में वार्ड ब्वॉय, सफाईकर्मी, गार्ड और दाइयां शामिल हैं। बलिया शहर कोतवाली के प्रभारी प्रवीण सिंह ने शुक्रवार को बताया कि आरोपी दयाशंकर वर्मा के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने दर्ज मुकदमे का हवाला देते हुए बताया कि जिले के स्वास्थ्य विभाग में 350 कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति व वेतन भुगतान के मामले में एक जांच समिति द्वारा जांच कर अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को दी गयी है।

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इस जांच समिति में सिटी मजिस्ट्रेट, जिला विकास अधिकारी, मुख्य कोषाधिकारी व वित्त एवं लेखाधिकारी (शिक्षा) शामिल थे। सिंह ने बताया कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत रहे दयाशंकर वर्मा द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित पत्रावली अपने कृत्यों पर पर्दा डालने व जांच से बचने के लिए छिपा कर रख दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभिलेखों के अभाव में जांच करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

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