नई पारी का आगाज कर सकते हैं गुलाम नबी आजाद, 4 सितंबर को जम्मू में करेंगे विशाल जनसभा को संबोधित

Ghulam Nabi Azad
ANI
अंकित सिंह । Aug 30, 2022 7:24PM
सबसे खास बात तो यह है कि गुलाम नबी आजाद की यह जनसभा ऐसे दिन हो रही है जिस दिन कांग्रेस ने भी महंगाई के खिलाफ हल्ला बोल रैली का आयोजन किया है। कांग्रेस की रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में होगी। इसके अलावा देश के 22 शहरों में संवाददाता सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।

गुलाम नबी आजाद देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक है। हालांकि, इन दिनों गुलाम नबी आजाद काफी सुर्खियों में है। दरअसल, गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। वह काफी पुराने कांग्रेस के नेता रहे हैं। पिछले कई महीनों से वह आलाकमान से नाराज चल रहे थे। इस्तीफे के बाद गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पर कई बड़े आरोप लगा दिए थे। खबर यह भी है कि गुलाम नबी आजाद अपनी नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। गुलाम नबी आजाद के समर्थन में जम्मू कश्मीर के कई बड़े दिग्गज कांग्रेस नेता भी पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। इन सबके बीच जम्मू-कश्मीर में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए गुलाम नबी आजाद जुट गए हैं। खबर यह है कि गुलाम नबी आजाद जम्मू के सैनिक कॉलोनी इलाके में 4 सितंबर को जनसभा को संबोधित करेंगे। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनकी यह पहली जनसभा होगी।

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सबसे खास बात तो यह है कि गुलाम नबी आजाद की यह जनसभा ऐसे दिन हो रही है जिस दिन कांग्रेस ने भी महंगाई के खिलाफ हल्ला बोल रैली का आयोजन किया है। कांग्रेस की रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में होगी। इसके अलावा देश के 22 शहरों में संवाददाता सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। इन सबके बीच खबर यह है कि गुलाम नबी आजाद से आज कांग्रेस के तीन टिकट नेताओं ने मुलाकात की है। खबर के मुताबिक के पृथ्वीराज चव्हाण, आनंद शर्मा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गुलाम नबी आजाद से दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात की है। कांग्रेस छोड़ने के बाद गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस और आलाकमान पर निशाना साधा था। कांग्रेस की ओर से भी लगातार उन पर पलटवार किया जा रहा है।

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गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और 21 अन्य कांग्रेस नेताओं ने अगस्त, 2020 में बैठक कर सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने पार्टी को फिर से मज़बूत करने के लिये कई मांग की थी जिनमें संगठन के चुनाव कराने और सक्रिय नेतृत्व की मांग प्रमुख थीं। उनके इस पत्र को कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती के रूप में देखा गया। इस समूह के कई नेता जैसे आजाद, कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़ चुके हैं तथा वीरप्पा मोइली जैसे कुछ नेताओं ने इस समूह से खुद को अलग कर लिया है। आजाद ने गत शुक्रवार को पार्टी से नाता तोड़ लिया था। सोमवार को उन्होंने अपने पुराने दल और उसके नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि ‘बीमार’ कांग्रेस को दुआ की नहीं, दवा की जरूरत है, लेकिन उसका इलाज ‘कम्पाउंडर कर रहे हैं।

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